ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त

किसान को कमजोर करने का किया जा रहा काम छत्तीसगढ़ संवाददाता बेमेतरा, 19 अक्टूबर। जमीन बिक्री के लिए ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त होने की खबर से राजस्व विभाग का जमीनी अमला हैरान है। कुछ तो सिर पीट रहे हैं कि अगली सुबह खबर न आ जाए कि पटवारी अब जमीन दलाली का काम करेंगे जिससे सरकार का राजस्व वृद्धि होता रहे। सरकार द्वारा ऋण पुस्तिका को जमीन बिक्री में आने वाली बाधा से दूर करने का तर्क दिया गया है पर इसे लेकर जो समस्या आएगी इसका कोई अध्ययन नहीं किया गया है। इस निर्णय को नई मुसीबत बताते हुए समाज सेवक संतोष साहू ने कहा कि अब साइबर अपराध में वृद्धि होगी। ऋण पुस्तिका किसान की ताकत है उसे कमजोर किया जा रहा है। जमीन बिक जाएगी ऋण पुस्तिका का संधारण कैसे होगा, ऋण पुस्तिका में लगे फोटो से किसान की पहचान होती थी अब कौन पूछेगा, ऋण पुस्तिका में दर्ज लेख को प्रमाणित माना जाता है अब कौन मानेगा। साहू ने कहा कि लोक व्यवहार में किसान स्थानीय स्तर पर कर्ज लेता था अब उस पर भरोसा कौन करेगा। अब जमानत मिलने पर देरी होगी क्योंकि ऋण पुस्तिका को संदेह की नजर से देखा जाएगा। सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड को भुईयां के माध्यम से संधारित किया है पर यह भी तकनीकी त्रुटि से परे नहीं है। कुछ साल पूर्व भिलाई में 765 एकड़ सरकारी जमीन को आन लाइन अपने नाम कर एक व्यक्ति ने बैंक से लोन ले लिया था। राजनादगांव में पटवारी, तहसीलदार की आईडी हैक कर जमीन की भूस्वामी बदल दिया था। आन लाइन जमीन बंधक हटाने का गोरख धंधा को नकारा नहीं जा सकता। बेमेतरा में एक किसान पटवारी से सी फॉर्म ले जाकर सिमगा में लोन ले लिया। जमीन बंधक चढऩे के पहले जमीन बेच दिया बाद में जब उक्त खसरा नंबर पर बंधक दर्ज हुआ तो क्रेता कोर्ट का चक्कर लगा रहा है। जानकारों की माने तो ऋण पुस्तिका के अभाव में तकनीकी त्रुटि का लाभ भू माफिया उठाएंगे। दो हम नाम व्यक्ति हुए यदि जाति उल्लेख नहीं तो दूसरे की जमीन बिक जाएगी। चुनाव में जिस तरह हम नाम का उपयोग होता है ठीक जमीन बिक्री में यही होगा।

ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त
किसान को कमजोर करने का किया जा रहा काम छत्तीसगढ़ संवाददाता बेमेतरा, 19 अक्टूबर। जमीन बिक्री के लिए ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त होने की खबर से राजस्व विभाग का जमीनी अमला हैरान है। कुछ तो सिर पीट रहे हैं कि अगली सुबह खबर न आ जाए कि पटवारी अब जमीन दलाली का काम करेंगे जिससे सरकार का राजस्व वृद्धि होता रहे। सरकार द्वारा ऋण पुस्तिका को जमीन बिक्री में आने वाली बाधा से दूर करने का तर्क दिया गया है पर इसे लेकर जो समस्या आएगी इसका कोई अध्ययन नहीं किया गया है। इस निर्णय को नई मुसीबत बताते हुए समाज सेवक संतोष साहू ने कहा कि अब साइबर अपराध में वृद्धि होगी। ऋण पुस्तिका किसान की ताकत है उसे कमजोर किया जा रहा है। जमीन बिक जाएगी ऋण पुस्तिका का संधारण कैसे होगा, ऋण पुस्तिका में लगे फोटो से किसान की पहचान होती थी अब कौन पूछेगा, ऋण पुस्तिका में दर्ज लेख को प्रमाणित माना जाता है अब कौन मानेगा। साहू ने कहा कि लोक व्यवहार में किसान स्थानीय स्तर पर कर्ज लेता था अब उस पर भरोसा कौन करेगा। अब जमानत मिलने पर देरी होगी क्योंकि ऋण पुस्तिका को संदेह की नजर से देखा जाएगा। सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड को भुईयां के माध्यम से संधारित किया है पर यह भी तकनीकी त्रुटि से परे नहीं है। कुछ साल पूर्व भिलाई में 765 एकड़ सरकारी जमीन को आन लाइन अपने नाम कर एक व्यक्ति ने बैंक से लोन ले लिया था। राजनादगांव में पटवारी, तहसीलदार की आईडी हैक कर जमीन की भूस्वामी बदल दिया था। आन लाइन जमीन बंधक हटाने का गोरख धंधा को नकारा नहीं जा सकता। बेमेतरा में एक किसान पटवारी से सी फॉर्म ले जाकर सिमगा में लोन ले लिया। जमीन बंधक चढऩे के पहले जमीन बेच दिया बाद में जब उक्त खसरा नंबर पर बंधक दर्ज हुआ तो क्रेता कोर्ट का चक्कर लगा रहा है। जानकारों की माने तो ऋण पुस्तिका के अभाव में तकनीकी त्रुटि का लाभ भू माफिया उठाएंगे। दो हम नाम व्यक्ति हुए यदि जाति उल्लेख नहीं तो दूसरे की जमीन बिक जाएगी। चुनाव में जिस तरह हम नाम का उपयोग होता है ठीक जमीन बिक्री में यही होगा।