हसदेव जंगल और रामगढ़ में हो रही ब्लास्टिंग के विरोध में धरना

परिवार का छठवें दिन भी आंदोलन जारी छत्तीसगढ़ संवाददाता अंबिकापुर, 7 जनवरी। सरगुजा जिले की धरोहर माने जाने वाले हसदेव जंगल और रामगढ़ क्षेत्र में जारी ब्लास्टिंग और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर अंबिकापुर शहर के घड़ी चौक में एक परिवार का शांतिपूर्ण प्रदर्शन लगातार छठवें दिन भी जारी रहा। एक जनवरी से शुरू इस आंदोलन में अंबिकापुर निवासी उमाशंकर, उनकी पत्नी गीता और उनकी छोटी बेटी भी शामिल हैं। यह परिवार जंगल संरक्षण और कटाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर शहरवासियों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। आंदोलन का संदेश है कि यदि आज जंगल बचेंगे तो भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसी क्रम में शहरवासियों से भी अपील की जा रही है कि वे बड़ी संख्या में आगे आकर इस मुहिम का समर्थन करें, ताकि जिले की अमूल्य वन संपदा को संरक्षित रखा जा सके। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता परवेज़ आलम गांधी भी घड़ी चौक पहुंचे और परिवार के साथ बैठकर आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जंगल सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों की जीवन रेखा हैं, जिन्हें बचाना सभी की जिम्मेदारी है।

हसदेव जंगल और रामगढ़ में हो रही ब्लास्टिंग के विरोध में धरना
परिवार का छठवें दिन भी आंदोलन जारी छत्तीसगढ़ संवाददाता अंबिकापुर, 7 जनवरी। सरगुजा जिले की धरोहर माने जाने वाले हसदेव जंगल और रामगढ़ क्षेत्र में जारी ब्लास्टिंग और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर अंबिकापुर शहर के घड़ी चौक में एक परिवार का शांतिपूर्ण प्रदर्शन लगातार छठवें दिन भी जारी रहा। एक जनवरी से शुरू इस आंदोलन में अंबिकापुर निवासी उमाशंकर, उनकी पत्नी गीता और उनकी छोटी बेटी भी शामिल हैं। यह परिवार जंगल संरक्षण और कटाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर शहरवासियों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। आंदोलन का संदेश है कि यदि आज जंगल बचेंगे तो भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसी क्रम में शहरवासियों से भी अपील की जा रही है कि वे बड़ी संख्या में आगे आकर इस मुहिम का समर्थन करें, ताकि जिले की अमूल्य वन संपदा को संरक्षित रखा जा सके। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता परवेज़ आलम गांधी भी घड़ी चौक पहुंचे और परिवार के साथ बैठकर आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जंगल सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों की जीवन रेखा हैं, जिन्हें बचाना सभी की जिम्मेदारी है।