रायसेन में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना शुरू:140 साइटों पर सुबह 6 से 10 बजे तक टीमें तैनात, चार देसी प्रजातियां मिलने से वन विभाग उत्साहित

रायसेन वन मंडल में शुक्रवार सुबह से ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का दूसरा चरण शुरू हो गया है। वन विभाग की टीमों ने जिले की 140 चिन्हित साइटों पर सुबह 6 बजे से गिद्धों की गणना का कार्य प्रारंभ किया। यह अभियान 22, 23 और 24 मई तक चलेगा। एसडीओ सुधीर पटले ने बताया कि रायसेन में गिद्ध संरक्षण और उनकी मौजूदगी के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बार गणना के दौरान जिले में गिद्धों की चार देसी प्रजातियां पाई गई हैं, जिनमें लॉन्ग बिल्ड, व्हाइट रम्प, अजबसियन और रेड हेडेड शामिल हैं। यह रायसेन वन मंडल के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पटले ने यह भी बताया कि गिद्ध गणना का समय सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे से 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वन अमला चिन्हित स्थानों पर पहुंचकर गिद्धों की गतिविधियों और उनकी संख्या का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। वन विभाग के अनुसार, शीतकालीन गणना पहले ही पूरी हो चुकी है। शीतकालीन गणना में प्रवासी गिद्ध भी शामिल होते हैं, जबकि ग्रीष्मकालीन गणना में केवल स्थानीय या देसी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। इसी कारण दोनों गणनाओं के आंकड़ों और प्रजातियों में भिन्नता देखने को मिलती है। यह गणना कार्य एसडीओ सुधीर पटले के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस दौरान रेंजर प्रवेश पाटीदार सहित वन विभाग का पूरा अमला मौजूद है।

रायसेन में ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना शुरू:140 साइटों पर सुबह 6 से 10 बजे तक टीमें तैनात, चार देसी प्रजातियां मिलने से वन विभाग उत्साहित
रायसेन वन मंडल में शुक्रवार सुबह से ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का दूसरा चरण शुरू हो गया है। वन विभाग की टीमों ने जिले की 140 चिन्हित साइटों पर सुबह 6 बजे से गिद्धों की गणना का कार्य प्रारंभ किया। यह अभियान 22, 23 और 24 मई तक चलेगा। एसडीओ सुधीर पटले ने बताया कि रायसेन में गिद्ध संरक्षण और उनकी मौजूदगी के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बार गणना के दौरान जिले में गिद्धों की चार देसी प्रजातियां पाई गई हैं, जिनमें लॉन्ग बिल्ड, व्हाइट रम्प, अजबसियन और रेड हेडेड शामिल हैं। यह रायसेन वन मंडल के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पटले ने यह भी बताया कि गिद्ध गणना का समय सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे से 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वन अमला चिन्हित स्थानों पर पहुंचकर गिद्धों की गतिविधियों और उनकी संख्या का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। वन विभाग के अनुसार, शीतकालीन गणना पहले ही पूरी हो चुकी है। शीतकालीन गणना में प्रवासी गिद्ध भी शामिल होते हैं, जबकि ग्रीष्मकालीन गणना में केवल स्थानीय या देसी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। इसी कारण दोनों गणनाओं के आंकड़ों और प्रजातियों में भिन्नता देखने को मिलती है। यह गणना कार्य एसडीओ सुधीर पटले के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस दौरान रेंजर प्रवेश पाटीदार सहित वन विभाग का पूरा अमला मौजूद है।