करोड़ों की खरीद में गड़बड़ी, पूर्व कुलसचिव शैलेन्द्र दुबे निलंबित
करोड़ों की खरीद में गड़बड़ी, पूर्व कुलसचिव शैलेन्द्र दुबे निलंबित
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 24फरवरी।अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये की खरीद में गड़बड़ी सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। उच्च शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने पर पूर्व कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र दुबे को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल मच गई है।
आरोप है कि विश्वविद्यालय में सरकारी नियमों को दरकिनार कर करोड़ों की खरीदी की गई। उच्च शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक,कुलसचिव रहते हुए डॉ. दुबे ने छत्तीसगढ़ स्टोर्स क्रय नियम2002 (संशोधित2025)का पालन नहीं किया। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम1965के नियम3के विपरीत माना गया है। साथ ही,छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियम1966के नियम9(1)(क) के प्रावधानों के उल्लंघन की भी बात सामने आई है।
शिकायत के अनुसार15अप्रैल2025को गवर्मेंट ई मार्केटप्लेस पोर्टल के जरिए एक ही दिन में26खरीद आदेश जारी किए गए। इन आदेशों की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इतनी बड़ी खरीद के लिए नियमित टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे ऑर्डर जारी कर दिए गए।
जारी किए गए ऑर्डर जांजगीर की तीन फर्मों सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और ओशन एंटरप्राइजेज को जारी किए गए। जांच में पाया गया कि फर्मों के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
सरकारी संस्थानों में किसी भी बड़ी खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया,प्रतिस्पर्धी दर और स्पष्ट दस्तावेज जरूरी होते हैं। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाए तो इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना जाता है।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि खरीद प्रक्रिया में आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया गया। इसी आधार पर कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच के आधार विस्तृत विभागीय जांच अब आगे बढ़ेगी।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 24फरवरी।अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये की खरीद में गड़बड़ी सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। उच्च शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने पर पूर्व कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र दुबे को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल मच गई है।
आरोप है कि विश्वविद्यालय में सरकारी नियमों को दरकिनार कर करोड़ों की खरीदी की गई। उच्च शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक,कुलसचिव रहते हुए डॉ. दुबे ने छत्तीसगढ़ स्टोर्स क्रय नियम2002 (संशोधित2025)का पालन नहीं किया। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम1965के नियम3के विपरीत माना गया है। साथ ही,छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियम1966के नियम9(1)(क) के प्रावधानों के उल्लंघन की भी बात सामने आई है।
शिकायत के अनुसार15अप्रैल2025को गवर्मेंट ई मार्केटप्लेस पोर्टल के जरिए एक ही दिन में26खरीद आदेश जारी किए गए। इन आदेशों की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इतनी बड़ी खरीद के लिए नियमित टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे ऑर्डर जारी कर दिए गए।
जारी किए गए ऑर्डर जांजगीर की तीन फर्मों सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और ओशन एंटरप्राइजेज को जारी किए गए। जांच में पाया गया कि फर्मों के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
सरकारी संस्थानों में किसी भी बड़ी खरीद के लिए पारदर्शी प्रक्रिया,प्रतिस्पर्धी दर और स्पष्ट दस्तावेज जरूरी होते हैं। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाए तो इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना जाता है।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि खरीद प्रक्रिया में आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया गया। इसी आधार पर कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच के आधार विस्तृत विभागीय जांच अब आगे बढ़ेगी।