अस्पताल में जनरल वार्ड की छत का प्लास्टर गिरा:मरीज और परिजन सुरक्षित; मेंटेनेंस की गुणवत्ता पर सवाल

सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के जनरल वार्ड में मंगलवार सुबह छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के समय वार्ड में मरीज और उनके परिजन मौजूद थे। हालांकि, मलबा किसी पर नहीं गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। तेज आवाज से मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्लास्टर गिरते ही तेज आवाज हुई, जिससे वार्ड में मौजूद मरीज और परिजन घबरा गए। सभी सुरक्षित स्थान की ओर भागे। लोगों का कहना है कि यदि मलबा किसी मरीज पर गिरता तो हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल भवन के रखरखाव को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले साल लाखों रुपए की लागत से भवन का मेंटेनेंस और मरम्मत का काम कराया गया था। इसके बावजूद छत का प्लास्टर गिरने से काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने भवन के मेंटेनेंस कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण या मरम्मत में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल में हर दिन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की स्थिति मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। लोगों ने पूरे भवन का तकनीकी निरीक्षण, कमजोर हिस्सों की मरम्मत और नियमित सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घटना की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है।

अस्पताल में जनरल वार्ड की छत का प्लास्टर गिरा:मरीज और परिजन सुरक्षित; मेंटेनेंस की गुणवत्ता पर सवाल
सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के जनरल वार्ड में मंगलवार सुबह छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के समय वार्ड में मरीज और उनके परिजन मौजूद थे। हालांकि, मलबा किसी पर नहीं गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। तेज आवाज से मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्लास्टर गिरते ही तेज आवाज हुई, जिससे वार्ड में मौजूद मरीज और परिजन घबरा गए। सभी सुरक्षित स्थान की ओर भागे। लोगों का कहना है कि यदि मलबा किसी मरीज पर गिरता तो हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल भवन के रखरखाव को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले साल लाखों रुपए की लागत से भवन का मेंटेनेंस और मरम्मत का काम कराया गया था। इसके बावजूद छत का प्लास्टर गिरने से काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों ने भवन के मेंटेनेंस कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण या मरम्मत में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल में हर दिन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की स्थिति मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। लोगों ने पूरे भवन का तकनीकी निरीक्षण, कमजोर हिस्सों की मरम्मत और नियमित सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घटना की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है।