सिंगरौली में आदिवासी भूमि अधिग्रहण का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया रोकने की मांग की

सिंगरौली जिले में आदिवासी समुदाय की भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद गहरा गया है। गुरुवार को किसान संघर्ष समिति सिंगरौली के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें एक निजी कंपनी द्वारा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को तत्काल रोकने की मांग की गई है। समिति ने जानकारी दी कि प्रस्तावित परियोजना के लिए लगभग 1400 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का आवेदन किया गया है। इस परियोजना से 8 गांवों के 600 से अधिक परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ग्रामीणों का दावा है कि यह क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील जनजाति समूह (PVTG) से संबंधित है। उनके अनुसार, यह भूमि अधिग्रहण इन समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, ग्रामसभा की स्वीकृति और पारंपरिक वनाधिकारों का उल्लंघन करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव में पुलिस द्वारा आदिवासी परिवारों को जबरन उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को अनैतिक और कानून के विरुद्ध बताया। ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तत्काल बंद करना, वनाधिकार कानून का पालन सुनिश्चित करना, तथा ग्रामीणों पर हो रहे उत्पीड़न, दबाव और धमकाने की घटनाओं पर रोक लगाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में वन कटाई और जबरन विस्थापन पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वालों में रामप्रसाद, पटेलसिंह, अब्बल शाह, मंगला नरेश, धर्मेंद्र सिंह और काशी प्रसाद सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल थे।

सिंगरौली में आदिवासी भूमि अधिग्रहण का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया रोकने की मांग की
सिंगरौली जिले में आदिवासी समुदाय की भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद गहरा गया है। गुरुवार को किसान संघर्ष समिति सिंगरौली के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें एक निजी कंपनी द्वारा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को तत्काल रोकने की मांग की गई है। समिति ने जानकारी दी कि प्रस्तावित परियोजना के लिए लगभग 1400 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का आवेदन किया गया है। इस परियोजना से 8 गांवों के 600 से अधिक परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ग्रामीणों का दावा है कि यह क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील जनजाति समूह (PVTG) से संबंधित है। उनके अनुसार, यह भूमि अधिग्रहण इन समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, ग्रामसभा की स्वीकृति और पारंपरिक वनाधिकारों का उल्लंघन करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव में पुलिस द्वारा आदिवासी परिवारों को जबरन उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को अनैतिक और कानून के विरुद्ध बताया। ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तत्काल बंद करना, वनाधिकार कानून का पालन सुनिश्चित करना, तथा ग्रामीणों पर हो रहे उत्पीड़न, दबाव और धमकाने की घटनाओं पर रोक लगाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में वन कटाई और जबरन विस्थापन पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने वालों में रामप्रसाद, पटेलसिंह, अब्बल शाह, मंगला नरेश, धर्मेंद्र सिंह और काशी प्रसाद सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल थे।