छत्तीसगढ़ संवाददाता
सूरजपुर,13 मार्च। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के बंद पड़े ओसीएम खदान से अब फ्लाई ऐश (राखड़) चोरी का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार खदान में कोयला उत्पादन बंद होने के बाद पॉवर प्लांटों से निकले फ्लाई ऐश की भराई का कार्य करीब एक वर्ष तक चला था। हाल ही में क्वारी नंबर-1 में लगभग 13 लाख क्यूबिक मीटर राखड़ भराई पूरी होने के बाद कार्य बंद कर दिया गया, जिसके बाद अब डंप राखड़ की चोरी शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़-दो माह से कुछ स्थानीय बदमाश प्रवृति के युवक गैंग बनाकर रात के समय डोजर और चैन माउंटेन मशीन की मदद से राखड़ ट्रकों में लोड कर ईंट उद्योग संचालकों और पास में बन रहे ओवरब्रिज के ठेकेदार को बेच रहे हैं।
ओसीएम खदान के मैनेजर विजय कुमार सिंह ने बताया कि एनटीपीसी लारा, सीपत, कोरबा और रायगढ़ के पावर प्लांटों से अनुबंध के तहत राखड़ भराई का कार्य किया गया था। अब स्थल को समतल कर ऊपर मिट्टी भरकर वृक्षारोपण किया जाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि खदान क्षेत्र से राखड़ चोरी की जानकारी मिली है और इस संबंध में पुलिस को लिखित सूचना दी गई है।
गौरतलब है कि खदानों से पहले कोयला, कबाड़, केबल, डीजल और स्पेयर पार्ट्स की चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं, वहीं अब चोरों ने राखड़ चोरी का नया तरीका अपना लिया है। खदान के भीतर से इस तरह की चोरी होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
सूरजपुर,13 मार्च। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के बंद पड़े ओसीएम खदान से अब फ्लाई ऐश (राखड़) चोरी का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार खदान में कोयला उत्पादन बंद होने के बाद पॉवर प्लांटों से निकले फ्लाई ऐश की भराई का कार्य करीब एक वर्ष तक चला था। हाल ही में क्वारी नंबर-1 में लगभग 13 लाख क्यूबिक मीटर राखड़ भराई पूरी होने के बाद कार्य बंद कर दिया गया, जिसके बाद अब डंप राखड़ की चोरी शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़-दो माह से कुछ स्थानीय बदमाश प्रवृति के युवक गैंग बनाकर रात के समय डोजर और चैन माउंटेन मशीन की मदद से राखड़ ट्रकों में लोड कर ईंट उद्योग संचालकों और पास में बन रहे ओवरब्रिज के ठेकेदार को बेच रहे हैं।
ओसीएम खदान के मैनेजर विजय कुमार सिंह ने बताया कि एनटीपीसी लारा, सीपत, कोरबा और रायगढ़ के पावर प्लांटों से अनुबंध के तहत राखड़ भराई का कार्य किया गया था। अब स्थल को समतल कर ऊपर मिट्टी भरकर वृक्षारोपण किया जाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि खदान क्षेत्र से राखड़ चोरी की जानकारी मिली है और इस संबंध में पुलिस को लिखित सूचना दी गई है।
गौरतलब है कि खदानों से पहले कोयला, कबाड़, केबल, डीजल और स्पेयर पार्ट्स की चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं, वहीं अब चोरों ने राखड़ चोरी का नया तरीका अपना लिया है। खदान के भीतर से इस तरह की चोरी होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।