शिवपुरी में मानसून की देरी से किसान चिंतित:टमाटर रोपाई 10 दिन से ज्यादा पिछड़ी; पौध हो रही खराब

शिवपुरी जिले में मानसून की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में समय पर बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल शिवपुरी में इस बार टमाटर की रोपाई का काम 10 दिन से अधिक पिछड़ गया है। खेत तैयार होने के बावजूद किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। 10 दिन से अधिक पिछड़ी टमाटर की रोपाई जिले के किसानों ने टमाटर की पौध तैयार कर खेतों तक पहुंचा दी है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। सामान्य तौर पर इस समय तक कई क्षेत्रों में रोपाई का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। खेतों तक पहुंच चुकी है तैयार पौध किसानों ने मौसम के अनुमान के आधार पर पहले ही पौध तैयार कर ली थी। कई किसानों ने पौध को खेतों तक भी पहुंचा दिया है, लेकिन मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से पौध रोपना जोखिम भरा माना जा रहा है। ऐसे में किसान मजबूरी में इंतजार कर रहे हैं। बारिश नहीं हुई तो पौध की गुणवत्ता होगी प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो टमाटर की पौध जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाएगी। इससे पौध की गुणवत्ता प्रभावित होगी और खेत में लगाने के बाद उसकी बढ़वार और उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। नई पौध खरीदने की नौबत आने की आशंका किसान अशोक कुशवाह ने बताया कि यदि बारिश में ज्यादा देरी हुई तो पुरानी पौध उपयोग लायक नहीं रह जाएगी। ऐसी स्थिति में किसानों को नई पौध खरीदकर दोबारा रोपाई करनी पड़ सकती है। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आर्थिक नुकसान भी होगा। किसानों पर बढ़ सकता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ पहले से तैयार पौध खराब होने की स्थिति में किसानों को दोबारा निवेश करना पड़ेगा। बीज, पौध, मजदूरी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। शिवपुरी जिला प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां उत्पादित टमाटर की आपूर्ति मध्य प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों में भी की जाती है। जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में टमाटर उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ऐसे में रोपाई में देरी का असर सीधे किसानों की आय पर पड़ सकता है। सोयाबीन और मक्का की बुवाई भी प्रभावित केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी बारिश पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश शुरू हो जाती है तो बुवाई का काम समय पर पूरा किया जा सकता है, लेकिन 10 से 15 दिन की और देरी उत्पादन पर असर डाल सकती है। प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी मध्य प्रदेश में भी इस बार मानसून का इंतजार लंबा हो गया है। सामान्य तौर पर 15 से 16 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार करीब 10 दिन की देरी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अब इसके 25 जून के आसपास प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। कम बारिश का असर खेती-किसानी पर साफ दिखाई देने लगा है। किसानों की निगाहें आसमान पर फिलहाल शिवपुरी जिले के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। खेत तैयार हैं, पौध तैयार है और बुवाई का समय लगातार आगे बढ़ रहा है। किसानों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय होगा और खेती का काम रफ्तार पकड़ सकेगा। यदि बारिश में और देरी हुई तो लागत बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

शिवपुरी में मानसून की देरी से किसान चिंतित:टमाटर रोपाई 10 दिन से ज्यादा पिछड़ी; पौध हो रही खराब
शिवपुरी जिले में मानसून की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में समय पर बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल शिवपुरी में इस बार टमाटर की रोपाई का काम 10 दिन से अधिक पिछड़ गया है। खेत तैयार होने के बावजूद किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। 10 दिन से अधिक पिछड़ी टमाटर की रोपाई जिले के किसानों ने टमाटर की पौध तैयार कर खेतों तक पहुंचा दी है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। सामान्य तौर पर इस समय तक कई क्षेत्रों में रोपाई का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। खेतों तक पहुंच चुकी है तैयार पौध किसानों ने मौसम के अनुमान के आधार पर पहले ही पौध तैयार कर ली थी। कई किसानों ने पौध को खेतों तक भी पहुंचा दिया है, लेकिन मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से पौध रोपना जोखिम भरा माना जा रहा है। ऐसे में किसान मजबूरी में इंतजार कर रहे हैं। बारिश नहीं हुई तो पौध की गुणवत्ता होगी प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो टमाटर की पौध जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाएगी। इससे पौध की गुणवत्ता प्रभावित होगी और खेत में लगाने के बाद उसकी बढ़वार और उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। नई पौध खरीदने की नौबत आने की आशंका किसान अशोक कुशवाह ने बताया कि यदि बारिश में ज्यादा देरी हुई तो पुरानी पौध उपयोग लायक नहीं रह जाएगी। ऐसी स्थिति में किसानों को नई पौध खरीदकर दोबारा रोपाई करनी पड़ सकती है। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आर्थिक नुकसान भी होगा। किसानों पर बढ़ सकता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ पहले से तैयार पौध खराब होने की स्थिति में किसानों को दोबारा निवेश करना पड़ेगा। बीज, पौध, मजदूरी और सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। शिवपुरी जिला प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां उत्पादित टमाटर की आपूर्ति मध्य प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों में भी की जाती है। जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में टमाटर उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ऐसे में रोपाई में देरी का असर सीधे किसानों की आय पर पड़ सकता है। सोयाबीन और मक्का की बुवाई भी प्रभावित केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी बारिश पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश शुरू हो जाती है तो बुवाई का काम समय पर पूरा किया जा सकता है, लेकिन 10 से 15 दिन की और देरी उत्पादन पर असर डाल सकती है। प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी मध्य प्रदेश में भी इस बार मानसून का इंतजार लंबा हो गया है। सामान्य तौर पर 15 से 16 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार करीब 10 दिन की देरी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अब इसके 25 जून के आसपास प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। कम बारिश का असर खेती-किसानी पर साफ दिखाई देने लगा है। किसानों की निगाहें आसमान पर फिलहाल शिवपुरी जिले के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। खेत तैयार हैं, पौध तैयार है और बुवाई का समय लगातार आगे बढ़ रहा है। किसानों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय होगा और खेती का काम रफ्तार पकड़ सकेगा। यदि बारिश में और देरी हुई तो लागत बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।