फसल सीजन में दोहरी मार: बिजली संकट के बीच बैंक में पैसे को तरसे किसान
फसल सीजन में दोहरी मार: बिजली संकट के बीच बैंक में पैसे को तरसे किसान
छत्तीसगढ़ संवाददाता
केशकाल, 24 मार्च। फसल के इस महत्वपूर्ण सीजन में किसान पहले से ही लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे सिंचाई और खेती का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अब बैंक की अव्यवस्था ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। कोंडागांव जिले के फरसगांव स्थित जिला सहकारी बैंक में किसान दिनभर भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन 3 से 4 दिन तक चक्कर काटने के बाद भी उन्हें केवल 10 से 20 हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं, जिससे किसान संतुष्ट नहीं हैं और उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बैंक के बाहर रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं, जहां कोई तीन दिन से तो कोई चार दिन से इंतजार कर रहा है। किसानों का कहना है कि जब उनका नंबर आता भी है, तो उन्हें सीमित राशि देकर वापस भेज दिया जाता है, जिससे खेती-किसानी के काम प्रभावित हो रहे हैं।
महज 10-20 हजार की सीमित निकासी
किसानों ने बताया कि वे सुबह से धूप में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन बैंक से संतोषजनक जवाब तक नहीं मिलता। कई दिनों के इंतजार के बाद भी जरूरत के मुताबिक पैसे नहीं मिल पाते, जिससे खेतों का काम ठप होने की स्थिति बन रही है। किसानों ने मांग की है कि जिस दिन वे विड्रॉल फार्म भरते हैं, उसी दिन उन्हें पूरी राशि उपलब्ध कराई जाए।
कैश की कमी बताकर पल्ला झाड़ रहा बैंक प्रबंधन
वहीं दूसरी ओर बैंक प्रबंधन अपनी मजबूरी बता रहा है। बैंक मैनेजर एम.आर. सेठिया ने बताया -शाखा में कैश लिमिट कम मिलने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। जहां प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये की आवश्यकता है, वहीं वर्तमान में केवल 50 लाख रुपये ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
इस संबंध में उच्च कार्यालय को कई बार पत्र लिखकर कैश लिमिट बढ़ाने की मांग की जा चुकी है। प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही कैश लिमिट बढ़ेगी, स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि फिलहाल किसानों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
केशकाल, 24 मार्च। फसल के इस महत्वपूर्ण सीजन में किसान पहले से ही लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे सिंचाई और खेती का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अब बैंक की अव्यवस्था ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। कोंडागांव जिले के फरसगांव स्थित जिला सहकारी बैंक में किसान दिनभर भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन 3 से 4 दिन तक चक्कर काटने के बाद भी उन्हें केवल 10 से 20 हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं, जिससे किसान संतुष्ट नहीं हैं और उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बैंक के बाहर रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं, जहां कोई तीन दिन से तो कोई चार दिन से इंतजार कर रहा है। किसानों का कहना है कि जब उनका नंबर आता भी है, तो उन्हें सीमित राशि देकर वापस भेज दिया जाता है, जिससे खेती-किसानी के काम प्रभावित हो रहे हैं।
महज 10-20 हजार की सीमित निकासी
किसानों ने बताया कि वे सुबह से धूप में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन बैंक से संतोषजनक जवाब तक नहीं मिलता। कई दिनों के इंतजार के बाद भी जरूरत के मुताबिक पैसे नहीं मिल पाते, जिससे खेतों का काम ठप होने की स्थिति बन रही है। किसानों ने मांग की है कि जिस दिन वे विड्रॉल फार्म भरते हैं, उसी दिन उन्हें पूरी राशि उपलब्ध कराई जाए।
कैश की कमी बताकर पल्ला झाड़ रहा बैंक प्रबंधन
वहीं दूसरी ओर बैंक प्रबंधन अपनी मजबूरी बता रहा है। बैंक मैनेजर एम.आर. सेठिया ने बताया -शाखा में कैश लिमिट कम मिलने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। जहां प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये की आवश्यकता है, वहीं वर्तमान में केवल 50 लाख रुपये ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
इस संबंध में उच्च कार्यालय को कई बार पत्र लिखकर कैश लिमिट बढ़ाने की मांग की जा चुकी है। प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही कैश लिमिट बढ़ेगी, स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि फिलहाल किसानों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।