जल संकट पर महिलाओं का खाली बर्तन बजाकर प्रदर्शन:सीहोर के गांव में 2 किमी दूर से मटमैला पानी लाने को मजबूर; बोरवेल की मांग

सीहोर जिले के ग्राम रोला, आलमपुरा और पचामा की महिलाओं ने सोमवार को जल संकट के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने-अपने गांवों में बोर नलकूप खनन की मांग की। अनसूया बाई, ताराबाई, कालभाई और नीता बाई ने बताया कि वे गंभीर जल संकट से जूझ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है। कई गांवों में ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए 2 किलोमीटर दूर से मटमैला पानी लाने को मजबूर हैं। कड़ी धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे गांव से एक-दो किलोमीटर दूर खेतों और कुओं से पानी लाने को विवश हैं। पानी के अभाव में कई ग्रामीण परिवार गांव छोड़कर शहरों या खेतों पर रहने को मजबूर हो गए हैं। 'लाडली बहनों' का कहना है कि उनकी सारी कमाई पानी खरीदने में खर्च हो रही है। खाली बर्तन बजाकर विरोध जताया इन महिलाओं ने पानी की कमी के विरोध में खाली बर्तन बजाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मांग की कि उनके गांवों में शीघ्र नए नलकूप खोदे जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय में प्रदर्शन करेंगी, और इसके बाद भी समाधान न होने पर भोपाल जाकर मंत्री और मुख्यमंत्री निवास पर पानी की मांग करेंगी। ग्रामीण जनता ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री निवास और मुख्य सचिव कार्यालय से प्रमुख अभियंता, पीएचई विभाग, भोपाल को सीहोर जिले के दर्जनों गांवों में नवीन नलकूप खनन के शीघ्र आदेश दिए गए हैं। प्रभारी मंत्री ने भी पीएचई विभाग को लिखित में निर्देश दिए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन सीहोर इन आदेशों का पालन करने को तैयार नहीं है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर ने नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में पानी के बिल अधिक से समय लंबित हैं, वहां किस्तों में बिल की वसूली की जाए, ताकि राजस्व भी एकत्रित हो सके और नलजल योजनाएं भी चलती रहें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।

जल संकट पर महिलाओं का खाली बर्तन बजाकर प्रदर्शन:सीहोर के गांव में 2 किमी दूर से मटमैला पानी लाने को मजबूर; बोरवेल की मांग
सीहोर जिले के ग्राम रोला, आलमपुरा और पचामा की महिलाओं ने सोमवार को जल संकट के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने-अपने गांवों में बोर नलकूप खनन की मांग की। अनसूया बाई, ताराबाई, कालभाई और नीता बाई ने बताया कि वे गंभीर जल संकट से जूझ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले महीनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है। कई गांवों में ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए 2 किलोमीटर दूर से मटमैला पानी लाने को मजबूर हैं। कड़ी धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे गांव से एक-दो किलोमीटर दूर खेतों और कुओं से पानी लाने को विवश हैं। पानी के अभाव में कई ग्रामीण परिवार गांव छोड़कर शहरों या खेतों पर रहने को मजबूर हो गए हैं। 'लाडली बहनों' का कहना है कि उनकी सारी कमाई पानी खरीदने में खर्च हो रही है। खाली बर्तन बजाकर विरोध जताया इन महिलाओं ने पानी की कमी के विरोध में खाली बर्तन बजाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मांग की कि उनके गांवों में शीघ्र नए नलकूप खोदे जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय में प्रदर्शन करेंगी, और इसके बाद भी समाधान न होने पर भोपाल जाकर मंत्री और मुख्यमंत्री निवास पर पानी की मांग करेंगी। ग्रामीण जनता ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री निवास और मुख्य सचिव कार्यालय से प्रमुख अभियंता, पीएचई विभाग, भोपाल को सीहोर जिले के दर्जनों गांवों में नवीन नलकूप खनन के शीघ्र आदेश दिए गए हैं। प्रभारी मंत्री ने भी पीएचई विभाग को लिखित में निर्देश दिए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन सीहोर इन आदेशों का पालन करने को तैयार नहीं है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर ने नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में पानी के बिल अधिक से समय लंबित हैं, वहां किस्तों में बिल की वसूली की जाए, ताकि राजस्व भी एकत्रित हो सके और नलजल योजनाएं भी चलती रहें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।