30 साल बाद सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग:श्रद्धालुओं ने की पीपल की परिक्रमा, सुख-समृद्धि और शाति की कामना

पन्ना जिले में सोमवार, 15 जून को सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जिला मुख्यालय सहित बृजपुर, पवई और अजयगढ़ जैसे क्षेत्रों में सुबह से ही प्राचीन मंदिरों और पीपल वृक्षों के पास भक्तों की कतारें देखी गईं। पंडितजी के अनुसार, धार्मिक और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ महासंयोग 30 साल बाद आया है। इससे पहले ऐसा विशेष योग वर्ष 1996 में बना था। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है, जबकि सोमवार और अमावस्या की तिथि भगवान शिव व पितरों से संबंधित है। इस त्रिवेणी संगम के कारण श्रद्धालुओं में नर्मदा स्नान और दान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। सोमवारी अमावस्या के महत्व को देखते हुए, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, मंदिरों की ओर जाते हुए दिखाई दिए। पारंपरिक परिधानों में सजी भक्तों की टोलियां भजन-कीर्तन करती हुई पूजा स्थलों तक पहुंचीं। बृजपुर के प्रमुख शिव मंदिरों और अन्य देवस्थानों पर सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का दूध और गंगाजल से अभिषेक किया। उन्होंने बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर परिवारों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। सनातन परंपरा के अनुसार, सोमवारी अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। पन्ना जिले में कई स्थानों पर महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने पीपल के वृक्ष के चारों ओर सूत लपेटकर 108 परिक्रमा की। परिक्रमा कर रही श्रद्धालु भावना शर्मा ने बताया कि विधि-विधान से 108 परिक्रमा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में खुशहाली आती है। इससे मन को शांति भी मिलती है। भक्तों ने अपनी परिक्रमा के संकल्प को पूरा करने के लिए फल, फूल, मखाने, मिष्ठान और अन्न का अर्पण किया।

30 साल बाद सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग:श्रद्धालुओं ने की पीपल की परिक्रमा, सुख-समृद्धि और शाति की कामना
पन्ना जिले में सोमवार, 15 जून को सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जिला मुख्यालय सहित बृजपुर, पवई और अजयगढ़ जैसे क्षेत्रों में सुबह से ही प्राचीन मंदिरों और पीपल वृक्षों के पास भक्तों की कतारें देखी गईं। पंडितजी के अनुसार, धार्मिक और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ महासंयोग 30 साल बाद आया है। इससे पहले ऐसा विशेष योग वर्ष 1996 में बना था। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है, जबकि सोमवार और अमावस्या की तिथि भगवान शिव व पितरों से संबंधित है। इस त्रिवेणी संगम के कारण श्रद्धालुओं में नर्मदा स्नान और दान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। सोमवारी अमावस्या के महत्व को देखते हुए, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, मंदिरों की ओर जाते हुए दिखाई दिए। पारंपरिक परिधानों में सजी भक्तों की टोलियां भजन-कीर्तन करती हुई पूजा स्थलों तक पहुंचीं। बृजपुर के प्रमुख शिव मंदिरों और अन्य देवस्थानों पर सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का दूध और गंगाजल से अभिषेक किया। उन्होंने बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर परिवारों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। सनातन परंपरा के अनुसार, सोमवारी अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। पन्ना जिले में कई स्थानों पर महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने पीपल के वृक्ष के चारों ओर सूत लपेटकर 108 परिक्रमा की। परिक्रमा कर रही श्रद्धालु भावना शर्मा ने बताया कि विधि-विधान से 108 परिक्रमा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में खुशहाली आती है। इससे मन को शांति भी मिलती है। भक्तों ने अपनी परिक्रमा के संकल्प को पूरा करने के लिए फल, फूल, मखाने, मिष्ठान और अन्न का अर्पण किया।