छत्तीसगढ़ संवाददाता
दुर्ग, 1 दिसंबर। नेशनल हेराल्ड प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध नई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल मच गई है। इसी क्रम में दुर्ग के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक संस्थाओं के खुले दुरुपयोग की संज्ञा दी है और केंद्र सरकार पर कड़ी आपत्ति जताई है।
वोरा ने अपना विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस देश के सर्वमान्य नेता हैं। वे करोड़ों भारतीयों के संवैधानिक मूल्यों की आवाज हैं। उनकी निष्ठा और त्याग पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा है। वे दोनों बेदाग हैं, निर्भीक हैं और सत्य के मार्ग पर अडिग हैं। उनके विरुद्ध इस प्रकार की राजनीतिक प्रेरित कार्रवाइयाँ न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि केंद्र सरकार की असुरक्षा और घबराहट को भी उजागर करती हैं।
वोरा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएंईडी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस किसी भी व्यवस्था की रीढ़ होती हैं, परंतु आज वही संस्थाएँ राजनीतिक दबाव और सत्ता की मंशा के आगे झुकाकर विपक्ष को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
उन्होंने कहा केंद्र सरकार अपनी नाकामियों, आर्थिक संकट और जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मामलों को हवा दे रही है। कांग्रेस कभी ऐसे दमन से नहीं झुकेगी। न्याय, सत्य और संविधान की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। पूर्व महापौर आर.एन वर्मा ने कहा- जब कार्रवाई देश के दो शीर्ष नेताओं पर हो और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस प्रकार राजनीतिक मामलों में इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है। यह प्रवृत्ति लंबी अवधि में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।
कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता इसे केंद्र सरकार की ओछी राजनीति बता रहे हैं। यह विवाद केवल कानूनी नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य और संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
दुर्ग, 1 दिसंबर। नेशनल हेराल्ड प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध नई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल मच गई है। इसी क्रम में दुर्ग के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक संस्थाओं के खुले दुरुपयोग की संज्ञा दी है और केंद्र सरकार पर कड़ी आपत्ति जताई है।
वोरा ने अपना विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस देश के सर्वमान्य नेता हैं। वे करोड़ों भारतीयों के संवैधानिक मूल्यों की आवाज हैं। उनकी निष्ठा और त्याग पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा है। वे दोनों बेदाग हैं, निर्भीक हैं और सत्य के मार्ग पर अडिग हैं। उनके विरुद्ध इस प्रकार की राजनीतिक प्रेरित कार्रवाइयाँ न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि केंद्र सरकार की असुरक्षा और घबराहट को भी उजागर करती हैं।
वोरा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएंईडी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस किसी भी व्यवस्था की रीढ़ होती हैं, परंतु आज वही संस्थाएँ राजनीतिक दबाव और सत्ता की मंशा के आगे झुकाकर विपक्ष को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
उन्होंने कहा केंद्र सरकार अपनी नाकामियों, आर्थिक संकट और जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मामलों को हवा दे रही है। कांग्रेस कभी ऐसे दमन से नहीं झुकेगी। न्याय, सत्य और संविधान की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। पूर्व महापौर आर.एन वर्मा ने कहा- जब कार्रवाई देश के दो शीर्ष नेताओं पर हो और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस प्रकार राजनीतिक मामलों में इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है। यह प्रवृत्ति लंबी अवधि में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।
कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता इसे केंद्र सरकार की ओछी राजनीति बता रहे हैं। यह विवाद केवल कानूनी नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य और संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।