श्री हनुमंत कथा में पंडित दिलीप व्यास ने कहा:धार्मिक कर्म, यज्ञ और दान का फल अवश्य मिलता है; कुमावत धर्मशाला में कथा का आयोजन हो रहा

मंदसौर के नरसिंहपुरा स्थित कुमावत धर्मशाला में 29 दिसंबर से श्री हनुमंत कथा का आयोजन जारी है। कथा का वाचन हनुमान भक्त पंडित दिलीप व्यास प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक कर रहे है। मंदसौर ढहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य कथा का श्रवण करने के लिए पहुंच रहे हैं। यह आयोजन 4 जनवरी को समाप्त होगा। तीसरे दिन राम जन्म की कथा मंगलवार को कथा के तीसरे दिन पंडित दिलीपजी व्यास ने भगवान श्री राम के जन्म की पूर्व कथा का भावपूर्ण श्रवण करवाया। उन्होंने भगवान श्रीराम के वंशजों के सनातन धर्म और संस्कृति के योगदान का वर्णन किया। राजा हरिशचंद्र, भागीरथजी और राजा दशरथ के जीवन परिचय के माध्यम से पंडितजी ने धर्म और सत्य पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान बताया गया कि राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति की कामना से पुत्र कामेष्टी यज्ञ किया था, जिसके फलस्वरूप राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। पंडितजी ने कहा कि धार्मिक कर्म, यज्ञ और दान का फल मानव को अवश्य मिलता है, भले ही इसमें समय लगे। उन्होंने धर्म पर दृढ़ रहने और धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। रघुकुल की परंपरा और भागीरथ का योगदान पंडित दिलीप व्यास ने “रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम के वंशजों के आदर्शों का वर्णन किया। राजा हरिशचंद्र के सत्य और वचन पालन की मिसाल ने श्रद्धालुओं को गहरे प्रभावित किया। भागीरथजी की तपस्या और गंगा अवतरण की कथा ने धर्म और संस्कृति के प्रति उनका अद्भुत योगदान उजागर किया। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में झेलकर गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराया। इस कथा को सुनते ही माता गंगा के जयकारे गूंज उठे।

श्री हनुमंत कथा में पंडित दिलीप व्यास ने कहा:धार्मिक कर्म, यज्ञ और दान का फल अवश्य मिलता है; कुमावत धर्मशाला में कथा का आयोजन हो रहा
मंदसौर के नरसिंहपुरा स्थित कुमावत धर्मशाला में 29 दिसंबर से श्री हनुमंत कथा का आयोजन जारी है। कथा का वाचन हनुमान भक्त पंडित दिलीप व्यास प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक कर रहे है। मंदसौर ढहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य कथा का श्रवण करने के लिए पहुंच रहे हैं। यह आयोजन 4 जनवरी को समाप्त होगा। तीसरे दिन राम जन्म की कथा मंगलवार को कथा के तीसरे दिन पंडित दिलीपजी व्यास ने भगवान श्री राम के जन्म की पूर्व कथा का भावपूर्ण श्रवण करवाया। उन्होंने भगवान श्रीराम के वंशजों के सनातन धर्म और संस्कृति के योगदान का वर्णन किया। राजा हरिशचंद्र, भागीरथजी और राजा दशरथ के जीवन परिचय के माध्यम से पंडितजी ने धर्म और सत्य पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान बताया गया कि राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति की कामना से पुत्र कामेष्टी यज्ञ किया था, जिसके फलस्वरूप राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। पंडितजी ने कहा कि धार्मिक कर्म, यज्ञ और दान का फल मानव को अवश्य मिलता है, भले ही इसमें समय लगे। उन्होंने धर्म पर दृढ़ रहने और धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। रघुकुल की परंपरा और भागीरथ का योगदान पंडित दिलीप व्यास ने “रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम के वंशजों के आदर्शों का वर्णन किया। राजा हरिशचंद्र के सत्य और वचन पालन की मिसाल ने श्रद्धालुओं को गहरे प्रभावित किया। भागीरथजी की तपस्या और गंगा अवतरण की कथा ने धर्म और संस्कृति के प्रति उनका अद्भुत योगदान उजागर किया। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में झेलकर गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराया। इस कथा को सुनते ही माता गंगा के जयकारे गूंज उठे।