खरगोन में चांदगढ़ तालाब की नहर में सीपेज का पानी:रबी की फसल पीली पड़ी, 7 साल से नहीं हुई मरम्मत

खरगोन जिले के चांदगढ़ तालाब की नहरों से पानी रिसने (सीपेज) की समस्या बढ़ गई है। रायबीड़पुरा क्षेत्र में करीब आधा किलोमीटर तक खेतों में दिन-रात पानी भर रहा है, जिससे किसानों की फसलें खराब हो रही हैं। किसान इस लगातार नुकसान से बेहद परेशान हैं। सांगवी के किसान श्रीराम पाटीदार ने बताया कि उनके खेत के पास से गुजरने वाली नहर से पानी लगातार रिस रहा है, जिससे खेत दलदल बन गया है। उनकी 4 एकड़ गेहूं की फसल पीली पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि कई सालों से फसल खराब हो रही है, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने पर भी गर्मी में मरम्मत का आश्वासन देकर शिकायत बंद कर दी जाती है। किसानों का कहना है कि वे पिछले 7 सालों से इस समस्या से परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इस मामले पर जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष मोरे ने बताया कि नहर की मरम्मत के लिए ढाई लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही नहर में छह एमएम मोटी सीमेंट-कंक्रीट की परत डालकर सीपेज रोका जाएगा।उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बजट की कमी के कारण नहरों की मरम्मत और सफाई जैसे जरूरी काम समय पर नहीं हो पाते।

खरगोन में चांदगढ़ तालाब की नहर में सीपेज का पानी:रबी की फसल पीली पड़ी, 7 साल से नहीं हुई मरम्मत
खरगोन जिले के चांदगढ़ तालाब की नहरों से पानी रिसने (सीपेज) की समस्या बढ़ गई है। रायबीड़पुरा क्षेत्र में करीब आधा किलोमीटर तक खेतों में दिन-रात पानी भर रहा है, जिससे किसानों की फसलें खराब हो रही हैं। किसान इस लगातार नुकसान से बेहद परेशान हैं। सांगवी के किसान श्रीराम पाटीदार ने बताया कि उनके खेत के पास से गुजरने वाली नहर से पानी लगातार रिस रहा है, जिससे खेत दलदल बन गया है। उनकी 4 एकड़ गेहूं की फसल पीली पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि कई सालों से फसल खराब हो रही है, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला। किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने पर भी गर्मी में मरम्मत का आश्वासन देकर शिकायत बंद कर दी जाती है। किसानों का कहना है कि वे पिछले 7 सालों से इस समस्या से परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इस मामले पर जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष मोरे ने बताया कि नहर की मरम्मत के लिए ढाई लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही नहर में छह एमएम मोटी सीमेंट-कंक्रीट की परत डालकर सीपेज रोका जाएगा।उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बजट की कमी के कारण नहरों की मरम्मत और सफाई जैसे जरूरी काम समय पर नहीं हो पाते।