उपभोक्ता फोरम ने कहा- डॉक्टर तय करेगा इलाज,बीमा कंपनी नहीं:केशलैस सुविधा नहीं देने पर दिया आदेश- 18,277 रु. का भुगतान करें; 45 दिन समय सीमा
उपभोक्ता फोरम ने कहा- डॉक्टर तय करेगा इलाज,बीमा कंपनी नहीं:केशलैस सुविधा नहीं देने पर दिया आदेश- 18,277 रु. का भुगतान करें; 45 दिन समय सीमा
ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा केशलैस सुविधा से इनकार को सेवा में कमी करार दिया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस को उपभोक्ता को इलाज पर खर्च किए गए 18,277 रुपए का भुगतान 45 दिन में करने का निर्देश दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्क, दस्तावेजों और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया था। मरीज को भर्ती करने या ओपीडी में इलाज देने का निर्णय पूरी तरह चिकित्सक के विवेक पर निर्भर करता है, न कि बीमा कंपनी के आकलन पर। यदि तय समय-सीमा में भुगतान नहीं होता है, तो कंपनी को 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति के लिए 1,500 रुपए और वाद व्यय के रूप में 1,000 रुपए देने के भी आदेश दिए गए हैं। 2 साल पहले हुए थे अस्पताल में भर्ती परिवादी पुलकित श्रीवास्तव ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके पास बीमा कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थी। पॉलिसी अवधि के दौरान, 16 अगस्त 2023 को उन्हें पेट में तेज दर्द, उल्टी और लूज मोशन की गंभीर शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की सलाह पर उनका उपचार किया गया और 18 अगस्त 2023 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। परिवादी का कहना था कि अस्पताल में भर्ती के दौरान केशलैस इलाज के लिए बीमा कंपनी को सूचना दी गई थी। हालांकि, 17 अगस्त 2023 को कंपनी ने यह कहते हुए केशलैस अनुरोध निरस्त कर दिया कि मरीज की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसे अस्पताल में भर्ती किया जाए।इ सके बाद, परिवादी ने इलाज में खर्च की गई राशि की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी को दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया। कंपनी का तर्क स्थिति गंभीर नहीं थी बीमा कंपनी ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि मरीज की स्थिति गंभीर नहीं थी और सभी जांच सामान्य थी, इसलिए केशलैस सुविधा अस्वीकृत की गई थी। कंपनी का यह भी कहना था कि डिस्चार्ज के बाद विधिवत बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे भुगतान संभव नहीं था।
ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा केशलैस सुविधा से इनकार को सेवा में कमी करार दिया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस को उपभोक्ता को इलाज पर खर्च किए गए 18,277 रुपए का भुगतान 45 दिन में करने का निर्देश दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्क, दस्तावेजों और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया था। मरीज को भर्ती करने या ओपीडी में इलाज देने का निर्णय पूरी तरह चिकित्सक के विवेक पर निर्भर करता है, न कि बीमा कंपनी के आकलन पर। यदि तय समय-सीमा में भुगतान नहीं होता है, तो कंपनी को 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति के लिए 1,500 रुपए और वाद व्यय के रूप में 1,000 रुपए देने के भी आदेश दिए गए हैं। 2 साल पहले हुए थे अस्पताल में भर्ती परिवादी पुलकित श्रीवास्तव ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके पास बीमा कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थी। पॉलिसी अवधि के दौरान, 16 अगस्त 2023 को उन्हें पेट में तेज दर्द, उल्टी और लूज मोशन की गंभीर शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की सलाह पर उनका उपचार किया गया और 18 अगस्त 2023 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। परिवादी का कहना था कि अस्पताल में भर्ती के दौरान केशलैस इलाज के लिए बीमा कंपनी को सूचना दी गई थी। हालांकि, 17 अगस्त 2023 को कंपनी ने यह कहते हुए केशलैस अनुरोध निरस्त कर दिया कि मरीज की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसे अस्पताल में भर्ती किया जाए।इ सके बाद, परिवादी ने इलाज में खर्च की गई राशि की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी को दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया। कंपनी का तर्क स्थिति गंभीर नहीं थी बीमा कंपनी ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि मरीज की स्थिति गंभीर नहीं थी और सभी जांच सामान्य थी, इसलिए केशलैस सुविधा अस्वीकृत की गई थी। कंपनी का यह भी कहना था कि डिस्चार्ज के बाद विधिवत बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे भुगतान संभव नहीं था।