चलव कातिक नहाए

चलव कातिक नहाए

15-May-2021
चलव कातिक नहाए... बूढ़ा देव के रूप म आदि देव महादेव के संस्कृति जीयत छत्तीसगढ़ के जम्मो परब के जुड़ाव कोनो न कोनो रूप ले शिव परिवार ऊपर आधारित होथे। कातिक महीना म शिव पूजा के जेन इहां चलन हे तेला कातिक नहाना कहे जाथे। कातिक नहाए के सुरुवात लगते कातिक के एकम ले होथे, जेन पूरा अंधियारी पाख म गौरा-पूजा (गौरा-ईसरदेव बिहाव परब) तक चलथे। गांव-गंवई म कातिक नहाए के उत्साह देखते बनथे। पारा भर के जम्मो नोनी मन एक-दूसर घर जा-जा के उनला उठाथें अउ तरिया जाथें जिहां नहा-धो के तरिया के पानी म दिया ढीलथें। बेरा पंगपंगाय के पहिली बरत दिया ल पानी म तउंरत देखबे त गजब के आनंद आथे। दिया ढीले के बाद फेर तरिया पार के मंदिर म भगवान भोलेनाथ के पूजा करे जाथे, अउ ए आसीस मांगे जाथे के उहू मनला भगवान भोलेनाथ जइसे योग्य वर मिलय। कातिक नहाए के सुरूवात होए के संगे-संग इहां गौरा-ईसरदेव बिहाव के नेवता दे के संदेशा गीत-सुवा गीत के रूप म घलोक शुरू हो जाथे। एकरे सेती जम्मो नोनी मन रोज संझा टोपली म माटी के बने सुवा ल मढ़ा के घरों-घर जाथें अउ वोला अंगना के बीच म राख के वोकर आंवर-भांवर घूम-घूम के ताली पीटत गीत गाथें। गीत-नृत्य के बाद घर गोसइन ह जेन सेर-चांउर, तेल अउ पइसा देथे तेला गौरा-गौैरी पूजा जेन कातिक अमावस्या के होथे तेकर खरचा (व्यवस्था) खातिर राखथें। अइसे किसम के कातिक नहाए के परब ह पूरा होथे। कतकों जगा कातिक नहाए के परब ल पूरा महीना भर घलोक करे जाथे। फेर एकर महत्व पंदरा दिन के अंधियारी पाख म जादा हे, जेमा बिहनिया कातिक नहाए, संझा सुवा नाचे अउ अमावय के दिन ईसर देव संग -गौरा बिहाव के जम्मो नोंग-जोंग शामिल होथे। सुशील भोले संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.) मोबा. नं.098269-92811
अगहन बिरस्पत

अगहन बिरस्पत

15-May-2021
अगहन बिरस्पत.... अगहन बिरस्पत म होथे लक्ष्मी दाई के बासा..... कार्तिक महीना के जाय के बाद अगहन महीना लगथे।अउ अगहन महीना मा जउन दिन बिरस्पत परथे उही दिन हमर छत्तीसगढ़ म घरो घर अगहन बिरस्पत के परब बड़ उछाह ले मनाथें। बिकट मान गौन के संग लक्ष्मी माता के पूजा करथें। बुधवार के संझा बेरा ले घर के साफ सफाई, अँगना परछी कुरिया के लिपाई। घर के मुहाटी मा सुघर चउँक पुरके महिला मन रंगोली बनाथें। लक्ष्मी माता ला जेन जघा मढ़ाथें उहू जगा ला सफ्फा करके चाउँर पिसान ला घोर के चउँक पूरथे। घर के ओंटा कोंटा के साफ सफाई करके लक्ष्मी माता के स्थापना करथे। सुघर आमा पत्ता, फूल पान, नरियर, आँवला फल, आँवला पत्ती, केरा पत्ता, अउ,कंद मूल जिमी काँदा, धान के बाली मा सजा के कलश के स्थापना करथे। अउ बुधवार के रात मा सबो जूठा बरतन भाड़ा ला माँज के रखथे, अउ घर मुहाटी ले लक्ष्मी माता के वास तक चाउँर पिसान के सुघर पांव के छप्पा बनाथे। राते मा माता करा दीया जला के रखथे। मुँधरहा ले घर के महिला मन उठ जाथें, नहा धोके घर के दुवारी, रंगोली अउ तुलसी चौंरा मा दीया जलाथें। दीया जलाके घर के दरवाजा ला खोल के रखथें। जेन हा दिन भर खुले रहिथें। पूजा पाठ करके महिला मन उपास रहिथें अउ माता के ध्यान मा लीन रहिथे। अउ ये पूजा के एक ठन अउ खास बात हवै, बुधवारे के दिन महिला मन अपन अपन घर मा सबो मनखे ला चेता के रखे रहिथे आज चुंदी, नाखून नइ कटाना हे, साबुन से नहाना नइ हे, बाल नइ धोना हे, पइसा खरचा भी नइ करना हे, कपड़ा लत्ता धोय के मनाही हे कहिके चेताँय रहिथे। माने भारी नियम धियम माने बर परथे। महिला मन सुघर नवा नवा साड़ी पहिन टिकली, माँहुर, काजर आँज अपन आप ला सुंदर अउ स्वच्छ बनाय रखथे। ये दिन पीला फल, पीला कपड़ा, पीला भोग के बड़ महत्व रहिथे। दान मा केला फल, भोग मा चना के दाल ला बड़ शुभदायी मानथे। पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पुन्नी के साथे मा अगहन के शुरुआत हो जथे, महिला मन अपन घर के सुख समृद्धि अउ यश, धन खातिर माता लक्ष्मी के आराधना करथे। येकर पीछू मान्यता इही हे कि माता लक्ष्मी अगहन महीना मा क्षीरसागर ले निकल पृथ्वी लोक मा विचरण करत रहिथें। जेन मन धरम करम से माता के पूजा पाठ करथे तेकर घर आके वोहा वास करथे। अउ ओकर घर मा सुख, शाँति, समृद्धि अउ ऐश्वर्य के वास हो जथे। इही मान्यता खातिर ये तिहार ला हमर छत्तीसगढ़ मा नियम धियम अउ पारंपरिक रूप ले मनाथे। ये दिन लक्ष्मी पूजा के साथे साथ सुरुज देवता के पूजा, शंख के पूजा अउ ल भारी फलदायी मानथे। अइसे मान्यता हावय सुरुज देव के किरण हा कीटाणु ला नष्ट कर देथे अउ शरीर ला निरोग बनाथे। तेकर सेती सब बिहनिया बिहनिया जल चढ़ाके आशीष माँगथे। एक उछाह अउ बिश्वास के साथ अगहन बिरस्पत के परब ल महिला मन बड़ ऊर्जा अउ धरम करम अउ संयमित रहिके मनाथे। अउ इही भाव के कारण आज धरम करम मा महिला मन पुरुष मन से कतको आगू निकल गेहे।अच्छाई फैलथे, बुराई घटथे, घर मा सुख समृद्धि के वास होथे अउ घर परिवार समाज मा संस्कार जगथे। इही सीख देथे अगहन बिरस्पत के पूजा हा। माँ लक्ष्मी विनती हे, बने सब के बिगड़े काज। दीन हीन कोनो झन रहे,सब के राखव लाज।।* विजेन्द्र वर्मा,नगरगाँव
देवारी बिसेस : हमर पुरखा के चिनहा ल बचावव ग

देवारी बिसेस : हमर पुरखा के चिनहा ल बचावव ग

15-May-2021
देवारी बिसेस : हमर पुरखा के चिनहा ल बचावव ग ……हमर संस्कीरिती, हमर परंपरा अउ हमर सभ्यता हमर पहिचान ये।हमर संस्कीरिती हमर आत्मा ये।छत्तीसगढ़ के लोक परब, लोक परंपरा, अउ लोक संस्कीरिती ह सबो परदेस के परंपरा ले आन किसम के हावय।जिहाँ मनखे-मनखे के परेम, मनखे के सुख-दुख अउ वोखर उमंग, उछाह ह घलो लोक परंपरा के रूप म अभिव्यक्ति पाथे। जिंनगी के दुख, पीरा अउ हतास, निरास के जाल म फंसे मनखे जब येकर ले छुटकारा पाथे, अउ जब राग द्वेस से ऊपर उठ के उमंग अउ उछाह ले जब माटी के गीत गाथे अउ हमन खुसी ल जब मनखे चार के बीच म खोल देथे तब छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य अउ लोकगाथा सुवा, करमा, ददरिया, पंथी, राऊत नाचा,चंदैनी, भोजली, गेड़ी, बाँसगीत, गौर, सरहुल, मांदरी, दसरहा माटी के सिंगार कहाथे। ये जम्मो नृत्य केवल मनोरंजन के साधन नोहय…..बल्कि हमर हिरदे के अंदर के बात ल कहे के साधन घलो हरय।हमर भाव हमर कला के माधियम ले लोकमानस के बीच आथे।….तब मनखे-मनखे के बीच के दूरी दुरिहा जथे….अउ भेदभाव ल भुलाके…मनखे जब एके स्वर मे गाथे तब उही बेरा लागथे कि परंपरा मनखे ल मनखे ले जोड़े के काम करथे। फेर आज के कलजुगिया जमाना म हमर परंपरा अउ हमर संस्कीरिती ह दिनो दिन नंदावत हे। जेन चिंता के बिसय हरे।आज मनखे माया-मोह के जाल म अतेक अरझ गे हे, कि अपन पुरखा के समय ले चले आवत तिहार-बार के महत्तम ल घलो समझ नइ पावत हे। अपन सभ्यता ल खुदे भुलावत हे। हमर छत्तीसगढ़ म सबले बड़का तिहार के रूप म मनईया तिहार “देवारी” ल ही ले, ले…..पहली कस कुछू सोर नइ राहय अब गाँव म।……तिहार बार के दिन घलो गाँव गली मन सुन्ना-सुन्ना लागथे। गाँव-गाँव म मातर, गोबरधन पूजा के मनाय के तरीका ह घलो बदलत जात हे।…..मांतर जेकर मतलबे हे मात के मदमस्त होके उमंग उछाह ले मनाय के तिहार हरय। पहिली हमन नानकिन राहन मातर देखेे ल जान गड़वा बाजा अउ मोहरी के सुर म मन घलो बइहा जवय। पान खावत जब परी मन नाचय, कौड़ी के कपडा़ पहिरे, खुमरी ओढ़हे, पाहटिया मन जब सज के निकलय तभे लागय आज मातर हरय। फेर अब के समे म न पहिली कस दोहा परइया राऊत मिलय न पहिली कस बाजा के बजइया। जब ले बैंड बाजा ह पाँव पसारिस तब ले हमर कान के सुने के तरीका ह घलो बदल गे हे। एक जमाना रहिस जब पंदरा दिन पहिली ले मनखे मन घर दुवार के छबई-मुदई, लिपई-पोतई चालू कर देवय। फेर आज मनखे के सोच म फरक आ गे हे। गाँव के नोनी मन घरो-घर सुवा नाचे के चालू कर देवय।फेर आज खोजे ल लागथे सुवा के नचइया मन ल।तभो ले मिलय नहीं।…..कतेक कहिबे आज तो दिया बाती के जलाय के तरीका ह घलो बदलत हे।मनखे रंग-रंग के झालर अउ लाईट ले घर दूवार ल सजावत हे,चमकावत हे फेर मन मंदिर के अंधियार ल अंजोर नइ कर पावत हे। संस्कीरिती जिंदा हे, सभ्यता जिंदा हे बस संस्कार जिंदा नइ हे। त संगवारी हो पाश्चात्य संस्कीरिती के चक्कर म झन पड़व….अउ अपन परंपरा ल झन छोड़व।अपन संस्कीरिती म अपन छत्तीसगढ़ के दरसन करव….छत्तीसगढ़ के तीज-तिहार अउ लोकपरंपरा ल बचा के राखव…तभे हमर छ्त्तीसगढ़ के मान ह बाढ़ही।
कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना - किशोर दा की 89वीं जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना - किशोर दा की 89वीं जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

30-Aug-2018

सदाबहार गानों से लोगों के दिलों में राज करने वाले किशोर कुमार की आज 89 वीं जयंती है. गायन ,अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में अपनी अमिट पहचान बनाने वाले फ़िल्मी दुनिया में वे किशोर दा के नाम से जाने जातें है. 
 
आइए जानते है उनसे जुड़ी बातें :-

किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को बंगाली परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने फिल्मी करियर में करीब 1500 से ज्यादा गाने गाए थे. 70-80 के दशक के बीच जितने लोगों ने मोहम्मद रफी की आवाज को पसंद किया उतना ही किशोर कुमार की आवाज को भी सराहा गया. 

फिल्म 'अमर प्रेम' का किशोर दा का यह गाना “कुछ तो लोग कहेंगे” गम में डूबे हर इंसान को हिम्मत देने का काम करता है.  
वहीं साल 1974 में आई फिल्म 'इम्तिहान' का गाना 'रुक जाना नहीं तू कभी हार के' कई युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. 
 
हिन्दी फ़िल्म उद्योग में उन्होंने बंगाली, हिंदी, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया था. उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है. उसी साल उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उस वर्ष के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने "किशोर कुमार पुरस्कार"(एक नया पुरस्कार) हिंदी सिनेमा में योगदान के लिए शुरू कर दिया था.
 
किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई. इस फ़िल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया. किशोर कुमार के एल सहगल के ज़बर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया. उन्होंने 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई.1954 में उन्होंने बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका निभाकर अपनी ज़बर्दस्त अभिनय प्रतिभा से भी परिचित किया.इसके बाद 1955 में बनी "बाप रे बाप", 1956 में "नई दिल्ली", 1957 में "मि. मेरी" और "आशा" और 1958 में बनी "चलती का नाम गाड़ी" जिसमें किशोर कुमार ने अपने दोनों भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया और उनकी अभिनेत्री थी मधुबाला.

जानिए महान कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर से जुड़ी अनसुनी बातें

जानिए महान कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर से जुड़ी अनसुनी बातें

30-Aug-2018

महान साहित्यकार एवं कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर की 157 वीं जयंती के मौके पर जानिए उनसे जुड़ी ऐसे बातें जो आपकों नहीं पता होगें :-
 
> कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर को वर्ष 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, यह पुरस्कार पाने वालें वे पहले गैर-यूरोपीय थें.
 
> महात्मा गांधी को 'महात्मा' का खिताब रबीन्द्रनाथ टैगोर नें दिया था.
 
> काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्टमॉस्टर ये उनकी कुछ प्रमुख प्रसिद्ध कहानियां हैं.
 
> टैगोर ने 2000 से भी अधिक गीत लिखे थे.
 
> एकमात्र व्यक्ति जिसने तीन देशों के राष्ट्रीय गानों को बनाया है, जिनमें भारत के अलावा बांग्लादेश और श्रीलंका का भी शामिल हैं.  
 
> 1919में हुए जलियांवाला हत्याकांड के विरोध में अपना सर का उपाधि लौटा दिया था.
 
> टैगोर को गुरुदेव के ऊपनाम से सम्बोधित किया जाता है. 

श्रीदेवी : लाखों फैन्स की दिलों में आज भी जिन्दा है श्रीदेवी, जानिये उनसे जुडी 5 ऐसी बातें जो सायद ही आपको पता हो

श्रीदेवी : लाखों फैन्स की दिलों में आज भी जिन्दा है श्रीदेवी, जानिये उनसे जुडी 5 ऐसी बातें जो सायद ही आपको पता हो

30-Aug-2018

बॉलीवुड की खूबसूरत और टेलेंटेड एक्ट्रेस श्रीदेवी भले ही इस दुनिया को छोड़ चुकी हैं, लेकिन आज भी उनकी यादें सबके दिलों में जिंदा है। 13 अगस्त को श्रीदेवी का 55वां जन्मदिन है, जिसे उनके फैंस उनकी याद में सेलिब्रेट करेंगे। इससे पहले आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जो शायद ही आपको पता हों।
 
मेकअप करने में लगते थे तीन घंटे :  श्रीदेवी को करीब से जानने वाले जानते हैं कि वो अपने लुक को लेकर काफी गंभीर रहती थीं, इसलिए चाहे एयरपोर्ट जाना हो, शॉपिंग या फिर कहीं फिल्म प्रमोशन के लिए वह तीन घंटे तक तैयार होती थीं।
 
नौकरों के भरोसे कभी नहीं छोड़ा किचन : एक और जहां बॉलीवुड के सितारे अपने किचन में जाना पसंद नहीं करते, वहीं श्रीदेवी खुद किचन के सारे काम देखती थी। उन्होंने बताया था कि वह घर में काम करने वाले नौकरों के भरोसे कभी भी अपना घर नहीं छोड़ती। इसलिए वह इस बात का खास ख्याल रखती थी कि उनके किचन में क्या पक रहा है और कितनी सफाई के साथ नौकर खाना बना रहे हैं। 
 
रोज चेक करती थी बेटियों के टिफिन : एक इंटरव्यू में श्रीदेवी ने बताया था कि वह बचपन से ही अपनी दोनों बेटियों के टिफिन चेक करती हैं, क्योंकि वह उनके खाने को लेकर कभी कोई समझौता नहीं करती थीं। उन्होंने बताया था कि जब भी उनकी दोनों बेटियां स्कूल से घर आती थीं तो वह उनके टिफिन और डायरी ही चेक करती थीं। उसी से उन्हें पता चल जाता था कि बेटियों का दिन कैसा रहा।
 
साड़ियों से था बेहद प्यार : श्रीदेवी को अपनी साड़ियों से खास लगाव था। वह जब भी कहीं जाती थीं तो वहां से अपने लिए साड़ी जरूर खरीद कर लाती थीं इसलिए अवॉर्ड हो या कोई प्रमोशन वह ज्यादातर साड़ी में ही नजर आती थीं।
 
उम्र की बात से आता था गुस्सा : श्रीदेवी के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह भी थी कि उनसे जब कोई उनकी उम्र और 50 साल के उनके अनुभव के बारे में बात करता था तो उन्हें ये पसंद नहीं आता था। खुद एक इंटरव्यू में उन्होंने यह बात स्वीकार की थी कि बोनी जब भी उन्हें उनकी उम्र की याद दिलाते हैं तो वह उनसे खूब लड़ती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तब नाराज होती हैं जब लोग उनसे कहते हैं कि आपने 50 साल काम किया है और उनसे अहसास करवाते हैं कि वह दूसरों से ज्यादा बड़ी हैं।

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर आई अक्षय कुमार की गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते को नही मिली अच्छी ओपनिंग, जानिए अब तक कितनी की हुई कमाई

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर आई अक्षय कुमार की गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते को नही मिली अच्छी ओपनिंग, जानिए अब तक कितनी की हुई कमाई

30-Aug-2018

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर इस बार दो फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दी। अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते सिनेमा घरों में एक-दूसरे को बराबर की टक्कर दे रही हैं।

15 अगस्त पर रिलीज हुई फिल्म को हॉलीडे का फायदा मिला और दोनों फिल्मों ने अपने ओपनिंग डे पर अच्छा बिजनेस किया। जहां गोल्ड फर्स्ट डे 25.25 करोड़ का बिजनेस करने में कामयाब रही, वहीं सत्यमेव जयते ने अपने ओपनिंग डे पर 20.52 करोड़ का बिजनेस किया था। सत्यमेव जयते और गोल्ड को मिली पॉजिटिव पब्लिसिटी को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म गुरुवार को भी अच्छा बिजनेस करेंगी। लेकिन फिल्में अपने दूसरे दिन 9 करोड़ से भी कम का बिजनेस ही कर पाई। 

बताया जा रहा है कि फिल्म को मॉर्निंग शो जहां दर्शकों से फुल जा रहा था, वहीं शाम होते-होते थिएटर खाली नजर आने लगे। इ्सका मुख्य कारण था देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन।

ट्रेड एनालिस्ट सुमित कडेल के ट्वीट के अनुसार इस खबर से दोनों ही फिल्म गोल्ड और सत्यमेव जयते के बिजनेस पर असर पड़ा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'शाम के वक्त शो देखने जाने वाले लोगों की भीड़ में गिरावट। गोल्ड और सत्यमेव जयते के नाइट शो में भी काफी गिरावट आई है, शॉकिंग।' वहीं, ट्रेड एक्सपर्ट तरन आदर्श ने भी अपने ट्वीट में बताया कि 16 अगस्त वर्किंग डे होने के कारण फिल्मों की कमाई में गिरावट आई है