कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना - किशोर दा की 89वीं जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना - किशोर दा की 89वीं जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

30-Aug-2018

सदाबहार गानों से लोगों के दिलों में राज करने वाले किशोर कुमार की आज 89 वीं जयंती है. गायन ,अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में अपनी अमिट पहचान बनाने वाले फ़िल्मी दुनिया में वे किशोर दा के नाम से जाने जातें है. 
 
आइए जानते है उनसे जुड़ी बातें :-

किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को बंगाली परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने फिल्मी करियर में करीब 1500 से ज्यादा गाने गाए थे. 70-80 के दशक के बीच जितने लोगों ने मोहम्मद रफी की आवाज को पसंद किया उतना ही किशोर कुमार की आवाज को भी सराहा गया. 

फिल्म 'अमर प्रेम' का किशोर दा का यह गाना “कुछ तो लोग कहेंगे” गम में डूबे हर इंसान को हिम्मत देने का काम करता है.  
वहीं साल 1974 में आई फिल्म 'इम्तिहान' का गाना 'रुक जाना नहीं तू कभी हार के' कई युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. 
 
हिन्दी फ़िल्म उद्योग में उन्होंने बंगाली, हिंदी, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया था. उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है. उसी साल उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उस वर्ष के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने "किशोर कुमार पुरस्कार"(एक नया पुरस्कार) हिंदी सिनेमा में योगदान के लिए शुरू कर दिया था.
 
किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई. इस फ़िल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया. किशोर कुमार के एल सहगल के ज़बर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया. उन्होंने 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई.1954 में उन्होंने बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका निभाकर अपनी ज़बर्दस्त अभिनय प्रतिभा से भी परिचित किया.इसके बाद 1955 में बनी "बाप रे बाप", 1956 में "नई दिल्ली", 1957 में "मि. मेरी" और "आशा" और 1958 में बनी "चलती का नाम गाड़ी" जिसमें किशोर कुमार ने अपने दोनों भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया और उनकी अभिनेत्री थी मधुबाला.

जानिए महान कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर से जुड़ी अनसुनी बातें

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30-Aug-2018

महान साहित्यकार एवं कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर की 157 वीं जयंती के मौके पर जानिए उनसे जुड़ी ऐसे बातें जो आपकों नहीं पता होगें :-
 
> कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर को वर्ष 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, यह पुरस्कार पाने वालें वे पहले गैर-यूरोपीय थें.
 
> महात्मा गांधी को 'महात्मा' का खिताब रबीन्द्रनाथ टैगोर नें दिया था.
 
> काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्टमॉस्टर ये उनकी कुछ प्रमुख प्रसिद्ध कहानियां हैं.
 
> टैगोर ने 2000 से भी अधिक गीत लिखे थे.
 
> एकमात्र व्यक्ति जिसने तीन देशों के राष्ट्रीय गानों को बनाया है, जिनमें भारत के अलावा बांग्लादेश और श्रीलंका का भी शामिल हैं.  
 
> 1919में हुए जलियांवाला हत्याकांड के विरोध में अपना सर का उपाधि लौटा दिया था.
 
> टैगोर को गुरुदेव के ऊपनाम से सम्बोधित किया जाता है. 

श्रीदेवी : लाखों फैन्स की दिलों में आज भी जिन्दा है श्रीदेवी, जानिये उनसे जुडी 5 ऐसी बातें जो सायद ही आपको पता हो

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30-Aug-2018

बॉलीवुड की खूबसूरत और टेलेंटेड एक्ट्रेस श्रीदेवी भले ही इस दुनिया को छोड़ चुकी हैं, लेकिन आज भी उनकी यादें सबके दिलों में जिंदा है। 13 अगस्त को श्रीदेवी का 55वां जन्मदिन है, जिसे उनके फैंस उनकी याद में सेलिब्रेट करेंगे। इससे पहले आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जो शायद ही आपको पता हों।
 
मेकअप करने में लगते थे तीन घंटे :  श्रीदेवी को करीब से जानने वाले जानते हैं कि वो अपने लुक को लेकर काफी गंभीर रहती थीं, इसलिए चाहे एयरपोर्ट जाना हो, शॉपिंग या फिर कहीं फिल्म प्रमोशन के लिए वह तीन घंटे तक तैयार होती थीं।
 
नौकरों के भरोसे कभी नहीं छोड़ा किचन : एक और जहां बॉलीवुड के सितारे अपने किचन में जाना पसंद नहीं करते, वहीं श्रीदेवी खुद किचन के सारे काम देखती थी। उन्होंने बताया था कि वह घर में काम करने वाले नौकरों के भरोसे कभी भी अपना घर नहीं छोड़ती। इसलिए वह इस बात का खास ख्याल रखती थी कि उनके किचन में क्या पक रहा है और कितनी सफाई के साथ नौकर खाना बना रहे हैं। 
 
रोज चेक करती थी बेटियों के टिफिन : एक इंटरव्यू में श्रीदेवी ने बताया था कि वह बचपन से ही अपनी दोनों बेटियों के टिफिन चेक करती हैं, क्योंकि वह उनके खाने को लेकर कभी कोई समझौता नहीं करती थीं। उन्होंने बताया था कि जब भी उनकी दोनों बेटियां स्कूल से घर आती थीं तो वह उनके टिफिन और डायरी ही चेक करती थीं। उसी से उन्हें पता चल जाता था कि बेटियों का दिन कैसा रहा।
 
साड़ियों से था बेहद प्यार : श्रीदेवी को अपनी साड़ियों से खास लगाव था। वह जब भी कहीं जाती थीं तो वहां से अपने लिए साड़ी जरूर खरीद कर लाती थीं इसलिए अवॉर्ड हो या कोई प्रमोशन वह ज्यादातर साड़ी में ही नजर आती थीं।
 
उम्र की बात से आता था गुस्सा : श्रीदेवी के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह भी थी कि उनसे जब कोई उनकी उम्र और 50 साल के उनके अनुभव के बारे में बात करता था तो उन्हें ये पसंद नहीं आता था। खुद एक इंटरव्यू में उन्होंने यह बात स्वीकार की थी कि बोनी जब भी उन्हें उनकी उम्र की याद दिलाते हैं तो वह उनसे खूब लड़ती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तब नाराज होती हैं जब लोग उनसे कहते हैं कि आपने 50 साल काम किया है और उनसे अहसास करवाते हैं कि वह दूसरों से ज्यादा बड़ी हैं।

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर आई अक्षय कुमार की गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते को नही मिली अच्छी ओपनिंग, जानिए अब तक कितनी की हुई कमाई

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर आई अक्षय कुमार की गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते को नही मिली अच्छी ओपनिंग, जानिए अब तक कितनी की हुई कमाई

30-Aug-2018

स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर इस बार दो फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दी। अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड और जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते सिनेमा घरों में एक-दूसरे को बराबर की टक्कर दे रही हैं।

15 अगस्त पर रिलीज हुई फिल्म को हॉलीडे का फायदा मिला और दोनों फिल्मों ने अपने ओपनिंग डे पर अच्छा बिजनेस किया। जहां गोल्ड फर्स्ट डे 25.25 करोड़ का बिजनेस करने में कामयाब रही, वहीं सत्यमेव जयते ने अपने ओपनिंग डे पर 20.52 करोड़ का बिजनेस किया था। सत्यमेव जयते और गोल्ड को मिली पॉजिटिव पब्लिसिटी को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि फिल्म गुरुवार को भी अच्छा बिजनेस करेंगी। लेकिन फिल्में अपने दूसरे दिन 9 करोड़ से भी कम का बिजनेस ही कर पाई। 

बताया जा रहा है कि फिल्म को मॉर्निंग शो जहां दर्शकों से फुल जा रहा था, वहीं शाम होते-होते थिएटर खाली नजर आने लगे। इ्सका मुख्य कारण था देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन।

ट्रेड एनालिस्ट सुमित कडेल के ट्वीट के अनुसार इस खबर से दोनों ही फिल्म गोल्ड और सत्यमेव जयते के बिजनेस पर असर पड़ा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'शाम के वक्त शो देखने जाने वाले लोगों की भीड़ में गिरावट। गोल्ड और सत्यमेव जयते के नाइट शो में भी काफी गिरावट आई है, शॉकिंग।' वहीं, ट्रेड एक्सपर्ट तरन आदर्श ने भी अपने ट्वीट में बताया कि 16 अगस्त वर्किंग डे होने के कारण फिल्मों की कमाई में गिरावट आई है