मंतरी शिव डहरिया पुछिन- साग के कतका किलो बारी के आय न...

मंतरी शिव डहरिया पुछिन- साग के कतका किलो बारी के आय न...

15-May-2021
मंतरी शिव डहरिया पुछिन- साग के कतका किलो बारी के आय न... का साग हे, कइसे किलो देहे, बारी के हे न, तजा हवय न मुरई के कइसे किलो हे, भाटा अउ पताल कइसे देवथ हव... अइसने ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज म नगरीय प्रसासन मंतरी सड़क म साग बेचइया के बीच पहुचके सब्जी लिन। साग भाजी बेचईया लोगन ले पूछिस कि बाजार म कोनो सुलक तो नई लेवत हे। काबर कि मुख्यमंतरी सब्बो बाजार सुलक ल खतम कर देय हे। मंतरी अधिकारी मन ल निर्देस दिन कि कोचिया मन ले कोनो सुलक मत लेवय, संग ही सहर के मुख्य मार्ग के रोड मार्किंग अउ नगरीय निकाय के मईदान, बाजार म कोचिया-बेपारी मन के बइठे के बेवस्था जिला प्रसासन अउ नगर निगम ल निर्देस दिस। डहरिया ह मुख्यमंतरी के निर्देस के तहत सड़क तीर म बइठया ल कोनो परेसानी मत हो, येकर बेवस्था करे के निर्देस दिस। रायपुर खरोरा के रस्ता म साग भाजी लिन। अउ कहिन कि साग ताजा रहे ले स्वाद घलो रहथे। मंतरी अपन घर बर भाटा, मुरई, नवल गोल, गोभी अउ पताल लिन।
 स्थानीय कलाकार मन ल जायदा प्रस्तुति के अवसर मिलहि-मंतरी भगत

स्थानीय कलाकार मन ल जायदा प्रस्तुति के अवसर मिलहि-मंतरी भगत

15-May-2021
स्थानीय कलाकार मन ल जायदा प्रस्तुति के अवसर मिलहि-मंतरी भगत संस्कृति मंत री अमरजीत भगत बिभागीय बइथक म कामकाज के समीक्छा करिन। भगत कहिन कि प्रदेस के कलाकार मन ल अधिक प्रस्तुति के अवसर मिलना चाहि। भगत स्थानीय कला अउ संस्कृति ल संरक्छित करे निर्देस दिन। आगु कहिन कि कलाकार मन ल प्रस्तुत कार्यक्रम के मानदेय जलदी मिलना चाहि। भगत छत्तीसगढ़ के लोक, संस्कृति, लोकगीत, लोकगाथा, नृत्य, नाटक, परंपरा के संरक्छन अउ प्रदर्सन के अवसर उपलब्ध कराय के निर्देस अधिकारी मन दिस। बइथक म संस्कृति बिभाग के सचिव अन्बलगन पी, संचालक अमृत विकास टोपनो सहित कई अधिकारी उपस्थित रहिन।
स्वास्थ्य मंतरी टीएस सिंहदेव ह अपन सिविल लाइन के

स्वास्थ्य मंतरी टीएस सिंहदेव ह अपन सिविल लाइन के

15-May-2021
स्वास्थ्य मंतरी टीएस सिंहदेव ह अपन सिविल लाइन के सासकीय घर म वायु प्रदूसन ले जागरूक करे बर पोस्टर जारी करिन। राज्य सासन के अभियान के तहत पोस्टर जारी करिन। ये पोस्टर म लोगन ल वायु प्रदूसन के खतरा, बीमारी अउ ओकर बचाव के बारे म बताय गिस। सिंहदेव ह अभियान के सफलता बर स्वास्थ्य बिभाग ल बधई दिस अउ कहिन कि कोरोना महामारी के दौर म वायु प्रदुसन बाढ़ गेय। ये प्रदूसन लोगन बर खतरा अउ जानलेवा हो सकत हे। सर्दी के मउसम म वायु प्रदूसन बाढ़ जथे जउन स्वास्थ्य बर हानिकारक होथे। प्रदूसन के ऊँचा स्तर अउ कोरोना मिले के बाद ख़तरनाक हो सकथे। सिंहदेव ह उम्मीद जगाइस कि ये अभियान राज्य के लोगन तक पहुँचहि अउ लोगन ल जागरूक करहि। पोस्टर जारी करे के बेरा राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र के निदेसक डॉ समीर गर्ग, जलवायु परिवर्तन के राज्य नोडल अधिकारी डॉ कमलेश जैन अउ स्वास्थ्य बिभाग के उप संचालक डॉ जी राव उपस्थित रहिन। स्वास्थ्य मंतरी टीएस सिंहदेव जारी करिन पोस्टर, लोगन ल वायु प्रदूसन ले बचे के दिन संदेस
अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति

अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति

15-May-2021
अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति….. सुशील भोले आजकाल ‘अस्मिता” शब्द के चलन ह भारी बाढग़े हवय। हर कहूँ मेर एकर उच्चारन होवत रहिथे, तभो ले कतकों मनखे अभी घलोक एकर अरथ ल समझ नइ पाए हे, एकरे सेती उन अस्मिता के अन्ते-तन्ते अरथ निकालत रहिथें, लोगन ल बतावत रहिथें, व्याख्या करत रहिथें। अस्मिता असल म संस्कृत भाषा के शब्द आय, जेहा ‘अस्मि” ले बने हे। अस्मि के अर्थ होथे ‘हूँ”। अउ जब अस्मि म ‘ता” जुड़ जाथे त हो जाथे ‘अस्मिता” अउ ये दूनों जुड़े शब्द के अरथ होथे- ‘मैं कोन आँव?”, मैं कौन हूँ?, मेरी पहचान क्या है?, मोर चिन्हारी का आय? अब ये बात ल तो सबो जानथें के हर मनखे के या क्षेत्र के चिन्हारी वोकर संस्कृति होथे। एकरे सेती हमन कहिथन के जे मन छत्तीसगढ़ के संस्कृति ल जीथे वोमन छत्तीसगढिय़ा। अइसने जम्मो क्षेत्र के लोगन के निर्धारण उंकर संस्कृति संग होथे। एक बात इहाँ ध्यान दे के लाइक हे के भाषा ह संस्कृति के संवाहक होथे, वोकर प्रवक्ता होथे, एकरे सेती कोनो क्षेत्र विशेष के भाषा भर ल बोले म कोनो मनखे ल वो क्षेत्र के मूल निवासी नइ माने जा सकय। अब हमन छत्तीसगढ़ के संदर्भ म देखन। इहाँ के मातृभाषा छत्तीसगढ़ी ल आज इहाँ के मूल निवासी मन के संगे-संग बाहिर ले आके रहत लगभग अउ जम्मो लोगन थोक-बहुत बोलबेच करथें, तभो ले उनला हम छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नइ मानन, काबर उन आजो इहाँ रहि के घलोक अपन मूल प्रदेश के संस्कृति ल जीथें। पंजाब ले आये मनखे पंजाब के संस्कृति ल जीथे, बंगाल ले आये मनखे बंगाल के संस्कृति ल जीथे, अउ अइसने आने लोगन घलो अपन-अपन मूल प्रदेश के संस्कृति ल ही जीथें, उही संस्कृति के अंतर्गत इहाँ कतकों किसम के आयोजन घलोक करत रहिथें। ए ह ए बात के चिन्हारी आय के वो ह आज घलोक छत्तीसगढ़ के ‘चिन्हारी” ल अपन ‘चिन्हारी” नइ बना पाए हे, इहाँ के अस्मिता ल आत्मसात नइ कर पाए हें। अउ जब तक वो ह इहाँ के अस्मिता ल आत्मसात नइ कर लेही तब तक वोला छत्तीसगढिय़ा नइ माने जा सकय। हम ए उदाहरण म भारत ले जा के विदेश म बसे लोगन मनला घलोक शामिल कर सकथन। आज घलो अइसन लोगन ल हम भारतीय मूल के लोगन कहिथन, भारतीय संस्कृति ल विदेश म बगराने वाला कहिथन काबर ते उन आने देश म रहि के घलोक भारत के संस्कृति ल जीथें, भारत के तिहार-बार ल मनाथें। जबकि उहाँ बसे अइसे कतकों लोगन हें, जे मन भारत के भाषा ल भुलागे हवंय, फेर संस्कृति ल आजो धरे बइठे हावंय। क्रिकेट खेले बर इहाँ वेस्ट इंडीज के जेन टीम आथे, वोमा अइसन कतकों झन रहिथें, जे मन भारतीय मूल के होथें, उंकर मनके नाम घलोक शिवराम चंद्रपाल जइसन भारतीय किसम के होथे, फेर उन इहाँ के भाषा ल नइ बोले सकयं। भाषा उहें के बोलथें जिहाँ अब रहिथें, तभो ले उनला भारतीय मूल के कहे जाथे, काबर ते वोकर पहिचान के या कहिन के चिन्हारी के मानक संस्कृति होथे। अब हम छत्तीसगढ़ के संस्कृति के बात करन या कहिन के अस्मिता के बात करन। त सबले पहिली ए बात उठथे के छत्तीसगढ़ के संस्कृति का देश के आने भाग म पाए जाने वाला संस्कृति ले अलग हे? त एकर जवाब हे- हाँ बहुत अकन परब-तिहार अउ रिति-रिवाज अलग हे, अउ उही अलगे मनके सेती हम छत्तीसगढ़ ल एक अलग साँस्कृतिक इकाई मानथन, जेकर सेती ए क्षेत्र ल एक अलग राज के रूप म मान्यता दे गे हवय। वइसे कुछ अइसे घलोक तिहार-बार हे, जेला पूरा देश के संगे-संग छत्तीसगढ़ म घलोक मनाए जाथे, फेर जब अलग चिन्हारी के बात आथे त अइसन मनला अलगिया दिए जाथे। अब प्रश्न ये उठथे के अइसन का अलग हे, जेन संस्कृति ल आने प्रदेश म नइ जिए जाय? त ए बात ल सब जानथें के मैं ह इहाँ के मूल संस्कृति ऊपर पहिली घलोक अड़बड़ लिखे हौं, अउ बेरा-बेरा म एकर ऊपर चरचा-भासन घलोक दिए हौं, तभो ले कुछ रोटहा बात ल थोक-मोक फेर करत हावंव। सबले पहिली छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति का आय, तेला फोरिया लेथन? काबर ते आज इहां के संस्कृति के जेन रूप देखाए जावत हे, वोकर मानकीकरण ल गलत करे जावत हे। असल म कोनो भी क्षेत्र या प्रदेश के संस्कृति के मानक उहाँ के मूल निवासी मन के संस्कृति होथे, बाहिर ले आके इहाँ बस गे लोगन मन के संस्कृति ह नइ होवय, फेर कोन जनी इहाँ के तथाकथित विद्वान मनला का मनसा भरम धर लिए हे, ते उन इहाँ के मूल निवासी मनके संस्कृति ल एक डहर तिरिया दिए हें, अउ बाहिर ले आए लोगन मन के संस्कृति ल छत्तीसगढ़ के संस्कृति के रूप म लिखत-पढ़त हें। ये ह असल म इतिहास लेखन संग दोगलागिरी करना आय, तभो ले कुछ लोगन ए दोगलागिरी ल पूरा बेसरमी के साथ करत हें। एमा वो लोगन मन के संख्या जादा हे, जे मन उत्तर भारत ले आ के इहाँ बसे हवंय, एकरे सेती उन अस्मिता के आत्मा के रूप म संस्कृति ल छोड़ के भाषा ल बतावत रहिथें। काबर ते उन ए बात ल अच्छा से जानथें के जब इहाँ के मूल संस्कृति के बात करबो तब तो हमूँ मन गैर छत्तीसगढिय़ा हो जाबो, बाहिरी हो जाबो, काबर ते छत्तीसगढ़ के संस्कृति ल तो उहू मन नइ जीययं। अब कुछ मूल संस्कृति के बात। त सबले पहिली वो चातुर्मास के बात जेला चारोंखुंट मनाथें, फेर जे छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति म लागू नइ होय। अइसे कहिथें के चातुर्मास के चार महीना म देंवता मन बिसराम करथें या कहिन के सूत जाथें, एकरे सेती ए चार महीना (सावन, भादो, कुंवार अउ कातिक) म कोनो भी किसम के शुभ कारज (माँगलिक कार्य, जइसे- बर-बिहाव आदि) नइ करे जाय। अब हम छत्तीसगढ़ के परब-तिहार के बात करन त देखथन के इहाँ ईसरदेव अउ गौरा के बिहाव के परब ल ‘गौरा पूजा” या ‘गौरी-गौरा” के रूप म इही चातुर्मास के भीतर माने कातिक महीना के अमावस्या तिथि म मनाए जाथे। अब प्रश्न उठथे, के जब इहां के बड़का भगवान के बिहाव ह देवउठनी माने चातुर्मास सिराये के पहिली हो जाथे, त ए चातुर्मास के रिवाज ह हमर छत्तीसगढ़ के संस्कृति म कहाँ लागू होइस? मोर तो ए कहना हे के छत्तीसगढ़ के संस्कृति म चातुर्मास के इही चारों महीना ल सबले जादा शुभ अउ पवित्र माने जाथे, काबर ते इही चारों महीना- सावन, भादो, कुंवार, कातिक म ही छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति के जम्मो बड़का परब मन आथें, जेमा हरेली ले लेके कातिक पुन्नी ले चालू होवइया मेला-मड़ई परब ह आथे। अब एक अइसे बड़का तिहार के चरचा जेला पूरा देश म मनाए जाथे, फेर वोकर कारण अउ स्वरूप म बाहिर म अउ छत्तीसगढ़ म थोर-बहुत फरक होथे, वो तिहार आय होली। होली के बारे ए बात ल जानना जरूरी हे के छत्तीसगढ़ म एला ‘काम दहन” के रूप म मनाए जाथे, जबकि देश के आने भाग म ‘होलिका दहन” के सेती। होलिका दहन ल सिरिफ पाँच दिन के मनाए जाथे, जे ह फागुन पुन्नी ले लेके रंग पंचमी (चइत महीना के अंधियारी पाख के पंचमी) तक चलथे। छत्तीसगढ़ म जेन ‘काम दहन” मनाए जाथे वोला चालीस दिन के मनाए जाथे- बसंत पंचमी (माघ महीना अंजोरी पाख के पंचमी) ले लेके फागुन पुन्नी तक। बिल्कुल अइसने दसरहा के बारे म जानना घलोक जरूरी हे। काबर के इहू परब ल छत्तीसगढ़ म अउ देश के आने भाग म अलग-अलग कारण के सेती मनाए जाथे। जिहाँ देश के आने भाग म एला ‘रावण वध” के सेती मनाए जाथे, उहें छत्तीसगढ़ म ‘विष हरण” माने ‘दंस हरन” के रूप म मनाए जाथे। हमर बस्तर म जेन रथ यात्रा के परब मनाए जाथे वो असल म मंदराचल पर्वत के मंथन अउ वोकर बाद निकले विष के हरण के परब आय। अस्मिता के जब बात होथे त भाषा अउ इतिहास के बात घलोक होथे। काबर ते इहू मन अस्मिता माने ‘चिन्हारी” के अंग आयं। जिहाँ तक भाषा के बात हे त हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा सन् 1885 म लिखे छत्तीसगढ़ी भाखा के व्याकरण संग एकर प्रकाशित रूप हमर आगू म हवय, जेला अब इहाँ के राज सरकार ह प्रदेश म ‘राजभासा” के दरजा दे दिए हवय, फेर केन्द्र सरकार के माध्यम ले संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल करे के बुता ह अभी घलोक बाँचे हवय। आज छत्तीसगढ़ी भाखा म हर विधा के अंतर्गत रचना करे जावत हे, अउ अच्छा रचना करे जावत हे, जेला राष्ट्रीय स्तर के आने भाखा के साहित्य मन संग तुलना करे जा सकथे। नवा पीढ़ी के रचनाकार मन म अच्छा उत्साह देखे जावत हे, जे मन ल इहां के पत्र-पत्रिका मन म प्रकाशन के अवसर घलोक अच्छा मिलत हे। सबले बढिय़ा बात ये हे के इंटरनेट के आधुनिक तकनीक के प्रयोग घलोक ह छत्तीसगढ़ी भाखा ल देश-दुनिया के चारों खुंट म पहुंचावत हे। ए सबला देख के लागथे के छत्तीसगढ़ी के आने वाला बेरा ह चमकदार रइही। आखिरी म इतिहास के घलोक खोंची भर बात हो जाय। काबर ते इहाँ जेन किसम के इतिहास लेखन होवत हे वोकर ले मैं भारी नराज हावंव। ए देखे म आवत हे के अधकचरा जानकारी रखने वाले मन इहां इतिहासकार अउ गुन्निक बनके सबला चौपट करत हवयं। संग म इहू देखे म आवत हवय के कुछ वर्ग विशेष के मनखे मन जानबूझ के आने वर्ग के लोगन मन के बड़े-बड़े कारज मन के घलोक उपेक्षा करत हें। एमा विश्वविद्यालय मनके भूमिका घलोक ह बने नइ लागत हे। भलुक ए कहना जादा ठीक होही के आँखी मूंद के पीएचडी के डिगरी ल बांटे जावत हे। ए सब दुखद हे। भरोसा हे के ईमानदार आँखी के माध्यम ले ये सबला नवा सिरा से देखे जाही। …….
मुख्यमंतरी भूपेश बघेल ह प्रसिद्ध साहित्यकार

मुख्यमंतरी भूपेश बघेल ह प्रसिद्ध साहित्यकार

15-May-2021
मुख्यमंतरी भूपेश बघेल ह प्रसिद्ध साहित्यकार, भासाविद् अउ छत्तीसगढ़ी राज गीत के सिरजन करइया डॉ नरेंद्र देव वर्मा ल ओखर जयंती म नमन करिन। 4 नंवबर के डॉ. नरेंद्र देव वर्मा के जन्म हो रहिस। मुख्यमतरी ह नरेंद्र देव ल याद करत कहिन कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहिस। वो हा कवि, उपन्यासकार, नाटककार, संपादक अउ मंच संचालक जइसे भुमिका म अमिट छाप छोड़िस। वोहा अंग्रेजी म घलो अपन रचना लिखिस। अपन बात अउ तर्क ले कोनो जल्दी प्रभावित करे के छमता रहिस। युवा उत्सव के समारोह म अपन बिचार ले प्रधानमंतरी पंडित जवाहरलाल नेहरू ल प्रभावित करिन। अरपा पइरी के धार, महानदी हे अपार... के रूप म अमर रचना करिन। सुघ्घर रचना म छत्तीसगढ़ महतारी के वैभव साकार होइस। ये रचना ह नरेंद्र देव वर्मा के पहिचान अउ छत्तीसगढ़ के मान बढ़ाइस। ओखर कलम ले निकल के ये गीत राजगीत के रूप म आज बस्तर ले लेके सरगुजा तक छत्तीसगढ़िया मन के मान बढ़ात हे। छत्तीसगढ़ के अइसने वन्दना एक सचा सपुत हि कर सकत हे। बघेल कहिन कि डॉ. नरेंद्र देव के रचना ह लोगन के अंतस म समा गेय। हिन्दी उपन्यास सुबह के तलाश के जब छत्तीसगढ़ी म अनुवाद सोनहा बिहान के रूप म होइस, जउन रंगमंच के माध्यम ले लोगन तक पहुंचिन। ये बेरा लोगन के जीवन म सोनहा बिहान आय उम्मीद जागिस। बघेल कहिन कि छत्तीसगढ़ी भाखा के बिकास बर नरेंद्र देव वर्मा के अमुल्य योगदान सल्लग याद करे जाहि।
टेनिस म छत्तीसगढ़ ले मिलिस नवा पहिचान

टेनिस म छत्तीसगढ़ ले मिलिस नवा पहिचान

15-May-2021
टेनिस म छत्तीसगढ़ ले मिलिस नवा पहिचान 19 नवंबर के राजधानी रइपुर के मध्य भारत के सर्वसुविधायुक्त पहली टेनिस अकादमी के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ध् अपन निवास कार्यलय म वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम ले भूमिपूजन कर खिलाड़ी प्रेमी ल बढ़ सौगात दिन । कृषि विश्विद्यालय रइपुर के सांस्कृतिक भवन ले लगे 4 एकड़ भूमि म टेनिस स्पोर्ट्स अकादमी के निर्माण करे जहि । निर्मान बर 15 महीना के समय निर्धारित करें गिस । मुख्यमंत्री ह कहिन की टेनिस अकादमी बने ले राजधानी रइपुर म अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस प्रतियोगिता आयोजित कर जहि । ये अकादमी ले टेनिस जगत म छत्तीसगढ़ ल नवा पहिचान मिलहि। संगे संगे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी ल अपन प्रतिभा निखारे के बेहतर अवसर मिलही ।राजधानी रइपुर के लाभांडी क्षेत्र म टेनिस स्पोर्ट अकादमी म एडमिन बिल्डिंग , हॉस्टल बिल्डिंग अउ एक मुख्य टेनिस कोर्ट के निर्माण करे जाही ।टेनिस कोर्ट के निर्माण अंतरास्ट्रीय स्तर के होही ।।।
मछरी पालन ल खेती के दर्जा दे के होही पहल

मछरी पालन ल खेती के दर्जा दे के होही पहल

15-May-2021
मछरी पालन ल खेती के दर्जा दे के होही पहल राज सरकार छत्तीसगढ़ म मछरी पालन के खेती के दर्जा दे के पहल करहि । राज सरकार ध् एखर बर योजना बनाये के निर्देस अधिकारी मन ल दिन । मुख्यमंत्री ध् कहिन की खेती किसानी जइसे मछरी पालन बर कोऑपरेटिव बैंक ले ब्याज मुक्त रिन दे जाही किसान ल बिजली दर म छूट मिलथे उसने मछरी पालन म निसाद केवट अउ ढीमर समाज के लोगन ल छूट मिलहि । मुख्यमंत्री श्री बघेल 21 नवम्बर के इन्हा अपन निवास कार्यालय म विस्व मत्स्य दिवस के मौका म आयोजित कार्यक्रम छत्तीसगढ़ मछुआरा समाज के समेलन ल संबोधित करत रहिन । श्री बघेल ह ये अवसर म 15 मछुआरा ल मोटरसाइकिल संग साईस बॉक्स अउ 2 मछुआरा ल ऑटो संग आईस बॉक्स के वितरण करे गिस ।
मत्स्य उत्पादन म छत्तीसगढ़ छटवा स्थान म

मत्स्य उत्पादन म छत्तीसगढ़ छटवा स्थान म

15-May-2021
मत्स्य उत्पादन म छत्तीसगढ़ छटवा स्थान म राज सरकार कोरी ले प्रदेस मत्स्य पालन ल बढ़वा दे के कारन छत्तीसगढ़ राज म पाछे दु बछर म मत्स्य बीज उत्पादन म 13 अउ मत्स्य उत्पादन म 9 प्रतिसत के उल्लेख वृद्धि मिले हे ।मछली पालन के क्षेत्र वृद्धि मिले हे ।मछली पालन के क्षेत्र म उल्लेखनीय काम कारज राज के दु मत्स्य कृषक ल राष्ट्रीय स्तर म पुरुस्कार अउ संमानित करे गिस । एम छत्तीसगढ़ राज के मेमर्स एम एम फीस सीड कल्टिवेसन प्राइवेट लिमिटेड माना , जिला रायपुर ल बेस्ट फिसिरिज इंटरप्राइजेज के तहत दु लाख रुपिया के नगद पुरुस्कार अउ प्रशस्ति पत्र अउ मेमर्स एम आई के कॉम्पनी , सिहावा , जिला धमतरी ल बेस्ट प्रोपाइटर फर्म संवर्ग ले एक लाख रुपिया के नगद पुरुस्कार अउ प्रशस्ति पत्र दे जाही । पाछु दु बछर में प्रदेस म 13 प्रतिसत के वृद्धि के संग मत्स्य बीज उत्पादन 251 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई ले 267 करोड़ एस्टेण्डर्स करोड़ एस्टेण्डर्स फ्राइ उत्पादन म करे गिस। देश म राज ह मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र म छटवा स्थान मिलिस ।
छत्तीसगढ़ के परंपरा के अनुरूप  श्री भूपेश बघेल ह अपन

छत्तीसगढ़ के परंपरा के अनुरूप श्री भूपेश बघेल ह अपन

15-May-2021
छत्तीसगढ़ के परंपरा के अनुरूप श्री भूपेश बघेल ह अपन निवास म देवारी म धान के झालर बधिंन छत्तीसगढ़ म दीपावली के सांस्कृतिक परम्परा के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ह अपन निवास म धान के झालर बांधे के नेग ल पूरा करिन । बस्तर ले कर सरगुजा तक ये तरह के झालर अंगना अउ दुवारी म लटकाये के परपरा है जेनला पहटा अउ पिंजरा तको केहे जाथे । देवारी म खेती पाती म जब नवा फसल पक के तईयार हो जाथे , तब ग्रामीण धान के केयूर बाली ल कलात्मक झालर तईयार करे जात हे ।येखर से घर के सजावट करके माता लक्ष्मी ले सुख समृद्धि बार माता की धन्यवाद दे जात हे । अउ पूजा करके माता ल आमंत्रित उन चिड़िया मन के माध्यम ले करे जात हे । ये झालर ले चिरई चुरगुन मन चुगथे । अइसने प्रदेस के लोक संस्कृति अपन खुसी ल प्राकृति के संग बाटथे अउ संगे संग सहेज के रखथे ।
भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव

भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव

15-May-2021
भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव करे हे। अभी लागु पंजीयन सरेनी अ,ब, स,द के बाद अब नवा सरेनी ई बनाय के निरन य लेय हे। येकर उद्देस्य ब्लॉक स्तर के स्नातक बेरोजगार ल रोजगार उपलब्ध कराना अउ स्थानीय संसाधन उपयोग करना हवय। लोक निरमान बिभाग डाहर ले येकर आदेस मंत्रालय महानदी भवन ले जारी करे गेय हे। नवा ई सरेनी म पंजीयन बर स्नातक अउ बेरोजगार होना जरुरी हे। येकर पंजीयन ई सरेनी म करे जाहि। अउ ये पंजीयन ह 5 बछर ले मान्य रहि। हैडिंग- स्नातक बेरोजगार ल ब्लाक स्तर के निरमान कार्य म मिलहि ठेका