बस्तर म अब कभू अंधियार नई होवय : मुख्यमंत्री रमन सिंह

बस्तर म अब कभू अंधियार नई होवय : मुख्यमंत्री रमन सिंह

16-Sep-2018
बस्तर म अब कभू अंधियार नई होवय : रमन सिंह डॉ सिंह कहिस कि पहिली बस्तर म नक्सली मन बिजली ले टावर गिरा दय ,बस्तर दस-दस दिन तक अंधियार रहाय । अब इन्हा 440 केवी ,220 केवी अउ 132 केवी के तीन -तीन लाइन आ गेहे।जेमा चौबीस घंटा सरलग बिजली मिलही । अब कभू बस्तर म अंधियार नई होवय । मुख्यमंत्री कहिस की प्रदेस म 1 लाख 8 हजार महिला मन ला गैस कनेक्शन बांटे गेहे ,जेमा के 45 हजार गैस कनेक्शन बस्तर म बाटे गिस । ये नवा- नवा उदिम ह बस्तर ला नवा बस्तर बनाही अउ नवा ऊंचाई म पहुँचाही।।।
मुख्यमंत्री ह वरिष्ट सिलपिकार के करिस सम्मान

मुख्यमंत्री ह वरिष्ट सिलपिकार के करिस सम्मान

15-Sep-2018
मुख्यमंत्री ह देस वरिष्ट शिल्पकार मन के करिस सम्मान प्रदेस के राजधानी रायपुर म राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित करे गीस ।ये आयोजन परदेस सरकार के ग्रामोद्योग विभाग कोती ले आयोजित रिहिस हे ।जेन रायपुर म पहली बार हवय , मुख्यमंत्री के विशेस प्रयास ले ये आयोजन रायपुर म करे गीस।कपड़ा मंत्रलाय के तरफ ले य अवसर म साल 2016 के सिद्ध हस्तशिल्प मन ला शिल्प गुरु पुरस्कार अउ राष्ट्री पुरस्कार देहे गीस। ये पुरसकार के सुरुवात केन्द्र सरकार2002 म करें हे पुरस्कार के रूप म दू लाख रूपिया अउ एक सोना के सिक्का के साथ साल ,प्रमाण पत्र अउ ताम्र पत्र दिया जाथे। ये शिल्प हस्तशिल्प मन ला ऊंखर शिल्प के संवर्धन अउ कौसल स्तर बर दे जाथे । प्रदेस सरकार के ग्रामोद्योग विभाग के उपक्रम छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प के युवा मन के रुचि घलोक दिखथे ।प्रदेस सरकार के ग्रामोद्योग विभाग के उपक्रम छत्तीसगढ़ पुरस्कार योजना संग हस्तशिल्प मन ल बाजार देवाय बर सबरी एम्पोरियम , छत्तीसगढ़ हाट अउ माटी कला बोर्ड के स्थापना करें गये है ।बस्तर म कोंडागांव म हस्तशिल्प विकास परियोजना के संचालन करें जात हे , शिल्पी मन बर डिजाइन विकास संग मासिक आर्धिक सहायता योजना घलोक शुरू करे हे ।।।
अनुपूरक बजट विधानसभ म पेस

अनुपूरक बजट विधानसभ म पेस

15-Sep-2018
सिंह ह पेश करिन 2400 करोड़ के अनुपूरक बजट छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र म दूसरा  दिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ह 24 सौ करोड़ के अनुपूरक बजट पेश करिस। अनुपूरक बजट के चर्चा समय सदन में कांग्रेस ह जमके हंगामा करिस। कांग्रेस के मोहन मरकाम ह विशेष सत्र बुलाय के उपर सवाल घलो खड़ा करिस अउ किसान मन के बोनस ल सरकार के राजनीति से प्रेरित बताईस | ये दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ह CAG के रिपोर्ट सदन में रखीस। कांग्रेस के नेता मन महंगाई अउ डेंगू के मुद्दा उठात हुए स्थगन प्रस्ताव में चर्चा करे के मांग करिस। ये बात में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ह सफाई देते हुए कहिस कि महंगाई के मुद्दा केंद्र के हरे श्री चंद्राकर ह कहिस की राज्य के अहम मुद्दा के उपर सदन में चर्चा होनी चाहिए। अउ स्वास्थ्य समस्या पर अभी नही है , डेंगू अपन नियंत्रण म हे ।   सिंह ह पेश करिन 2400 करोड़ के अनुपूरक बजट छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र म दूसरा  दिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ह 24 सौ करोड़ के अनुपूरक बजट पेश करिस। अनुपूरक बजट के चर्चा समय सदन में कांग्रेस ह जमके हंगामा करिस। कांग्रेस के मोहन मरकाम ह विशेष सत्र बुलाय के उपर सवाल घलो खड़ा करिस अउ किसान मन के बोनस ल सरकार के राजनीति से प्रेरित बताईस | ये दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ह CAG के रिपोर्ट सदन में रखीस। कांग्रेस के नेता मन महंगाई अउ डेंगू के मुद्दा उठात हुए स्थगन प्रस्ताव में चर्चा करे के मांग करिस। ये बात में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ह सफाई देते हुए कहिस कि महंगाई के मुद्दा केंद्र के हरे श्री चंद्राकर ह कहिस की राज्य के अहम मुद्दा के उपर सदन में चर्चा होनी चाहिए। अउ स्वास्थ्य समस्या पर अभी नही है , डेंगू अपन नियंत्रण म हे ।   सिंह ह पेश करिन 2400 करोड़ के अनुपूरक बजट छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र म दूसरा  दिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ह 24 सौ करोड़ के अनुपूरक बजट पेश करिस। अनुपूरक बजट के चर्चा समय सदन में कांग्रेस ह जमके हंगामा करिस। कांग्रेस के मोहन मरकाम ह विशेष सत्र बुलाय के उपर सवाल घलो खड़ा करिस अउ किसान मन के बोनस ल सरकार के राजनीति से प्रेरित बताईस | ये दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ह CAG के रिपोर्ट सदन में रखीस। कांग्रेस के नेता मन महंगाई अउ डेंगू के मुद्दा उठात हुए स्थगन प्रस्ताव में चर्चा करे के मांग करिस। ये बात में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ह सफाई देते हुए कहिस कि महंगाई के मुद्दा केंद्र के हरे श्री चंद्राकर ह कहिस की राज्य के अहम मुद्दा के उपर सदन में चर्चा होनी चाहिए। अउ स्वास्थ्य समस्या पर अभी नही है , डेंगू अपन नियंत्रण म हे ।  
श्री गणेश जी के जन्म

श्री गणेश जी के जन्म

15-Sep-2018
गणेस चतुर्थी के महतत गणेस चतुरथी एक हिन्दू परब हे ,जेन श्री गणेश के जन्मदिन अउ उकर स्वागत म हर बछर ये परब मनाये जाथे । गणेश के माता पार्वती अउ भगवान के शिव के बेटा ये । ये परब ला भारत देस के संगे संग पूरा विश्व म मनाये जाथे । अउ लोगन मन भगवान ले मनचाहा बरदान मांग के आसीस तको मांग थे । ‌ भगवान गणेश ह बुद्धि अउ समृद्धि के देवइया ये , भगवान गणेश के सब्बो देव म सबले पहली पूजा होथे । काबर की भगवान शिव के वरदान म मिले हे गणेश भगवान के पूजा ले सब्बो समस्या ,परेशानी सिरा जथे ,गणेश के जेन भगत होथे , वो भगत के जीवन म कोनो परकार के बाधा नई आवय । ‌ कोनो भी नवा काम होथे त सबले पहली गणेश के पूजा होथे ओकर बाद बाकी देव के , ये परब ला 10 दिन तक मनाथे गणेश के पूजा म लईका मन तको भारी जोरसोर ले भाग लेथे । गनेस परब चतुर्थी के सुरु होथे अउ अनन्त चतुर्थी के समापन होथे ।
संचार क्रांति म अगुवा छत्तीसगढ़

संचार क्रांति म अगुवा छत्तीसगढ़

12-Sep-2018
संचार क्रान्ति म अगुवा छत्तीगसढ़ देस अउ दुनिया के सबले बड़े स्मार्ट फोन बांटे वाले योजना संचार क्रांति योजना डॉ रमन सिंह ह राजधानी रइपुर ले प्रदेस सरकार के संचार क्रांति योजना ले निसुलक स्मार्ट फोन बाटे बर परदेश भर म मोबाइल तिहार के सुरुआत करिस । अउ कहिस की छत्तीसगढ़ नवा जुग म परवेश करथ हे ।परदेस के 50 लाख लोगन मन के हाथ म स्मार्ट मोबाइल फोन आही त बड़ा चमत्कार होही ।अब हमर छत्तीगसढ़ स्मार्ट छत्तीसगढ़ के नाम ले जाने जाही । मुख्यमंत्री ह ये अवसर म संचार क्रांति योजना बर राज म मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाये बर 556 टावर के लोकरपड करिस। अउ मोबाइल म राज्य सरकार के ""गोठ" नाम ले मोबाइल एप तको लोकरपड करिस । जेमा सरकार के योजना अउ किसानी के गोठ बात अउ छत्तीसगढ़ी कला संस्कृती के कारकरम ल भी देखे जा सकथे । ये योजना ह माईलोगन मन के ठाठस बडाये बर सरकार के बड़ भारी उपाय हे।परमुख सचिव सूचना अउ परोधकि श्री अमन कुमार सिंह कहिस की 26 जुलाई 2018 के दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास म बहुत महत् माने जाही , जब देस के पहली नागरिक राष्ट्रपती श्री राम नाथ गोविंग ह बस्तर जिला म छत्तीसगढ़ सरकार के संचार क्रांति योजना ला चालू करे रिहिस हें ।।।
मातृभासा के संरक्षण अउ संवर्धन जरूरी हे -राष्ट्री स्वयं सेवक संघ

मातृभासा के संरक्षण अउ संवर्धन जरूरी हे -राष्ट्री स्वयं सेवक संघ

12-Sep-2018
मातृभाषा के संरक्षण संवर्धन जरूरी हे - राष्टीय स्वयं सेवक संघ अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के ये मत हे, के भाषा कोनों भी मनखे अउ समाज के पहचान के एक महत्वपूर्ण अंग अउ वोकर संस्कृति के सजीव संवाहिका होथे। देष मं प्रचलित अनेक भाषा अउ बोलीमन हमार संस्कृति के श्रेष्ठ परंपरा मनके महत्वपूर्ण ज्ञान अउ ज्ञान के बगरे संसार संस्कार अउ साहित्य ल अटल बनाये रखे के संगे संग वैचारिक नवा सृजन बर घलव परम आवष्यक होथे। अलग अलग भाषा मनमं उपलब्ध लिखित साहित्य के संगसंग कइ गुना अधिक ज्ञान गीत, लोकोक्ति अउ लोक कथा मनके मौखिक परंपरा के रूप मं होथे। आज केउठन भारतीय भाषा अउ बोली मनके चलन अउ उपयोग मं होवइया कमी, उनकर शब्द मनके विलोप अउ आने भाषा के षब्द मनके अवइया रेला एक गम्भीर समस्या बनके उभरत हें। आज कतकोन भाषा अउ बोली मन विलुप्त हो चुके हें अउ केउ आने भाषा के अस्तित्व उूपर संकट घपटे हे। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के ये मानना हे के देष के कतको भाषा अउ बोली मनके संरक्षण, संवर्धन बहंुते जरूरी हे। जरूरी हे के सरकार येकर बर ध्यान देवै। एकर संगे संग अन्य नीति नियम धरइया स्वैच्छिक संगठन समेंत समाज के जमों मनखे मनला हरेक संभव प्रयास करना चाहिए। येकर बर ये किसम के प्रयास उपयोगी हे - 1. देष भर मं प्राथमिक षिक्षा मातृभाषा के फेर कोनों भारतीय भाषा मं ही होना चाही। येकर बर पालक मन अपना मन बनावैं। सरकार ये दिषा मं उचित नीति निर्माण कर आवष्यक प्रावधान संजोवै।000 2. तकनीकी अउ आयुर्विज्ञान समेंत उच्च षिक्षा के स्तर मं सब संकाय मं षिक्षण पाठ्य सामग्री अउ परीक्षा के विकल्प भारतीय भाषा मनमं घलव सुलभ करवाना आवष्यक हे। 3. राष्ट्ीय पात्रता अउ प्रवेष परीक्षा नीट अउ संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भाषा मनमं लेना शुरू करे गेय हे। ए पहल स्वागत के योग्य हे। एकर संगेसंग अउ आने प्रवेष अउ प्रतियोगी परीक्षा मनला जेन अभी भारतीय भाषा मनमं आयोजित नई करे जावत हे। उनमं घलव ये विकल्प सुलभ करवाय जाना चाही। 4. जम्मों किसम के शासकीय अउ न्यायिक काम-काज मं भारतीय भाषा मनला प्राथमिकता देय जाना चाही। एकर संगेसंग जमों शासकीय अउ निजी क्षेत्र मं नियुक्ति, पदोन्नति अउ सब किसम के कामकाज मं अंग्रेजी भाषा के प्राथमिकता न रख के भारतीय भाषा मनला बढ़ावा देय जाना चाही। 5. स्वयं सेवक समेंत समस्त समाज ल अपन पारिवारिक जीवन मं वार्तालाप अउ दैनिक व्यवहार मं मातृभाषा ल महत्व देना चाही। इन भाषा अउ बोली मनके साहित्य संग्रह अउ पठन-पाठन के परंपरा के विकास होना चाही। एकरे संग इंकर नाटक, सगीत, लोक कला मनला घलव भरपूर प्रोत्साहन देना चाही। 6. पारंपरिक रूप से भारत मं भाषा मन समाज ल जोड़े के साधन रहिन हें। त सब ल अपन मातृभाषा के स्वाभिमान राखत आने सब भाषा मनके प्रति सम्मान के भाव रखना चाही। 7. केंद्र अउ राज्य सरकार मनला सबो भारतीय भाषा अउ लिपि मनके सरक्षण अउ संवर्धन बर प्रभावी प्रयास करना चाही। अ.भा. प्रतिनिधि सभा बड़अकन ज्ञान ल पाय बर विष्व के कतकोन भाषा मनला सीखे के समर्थक हें। फेर प्रतिनिधि सभा भारत जइसन बहुभाषी देष मं हमार संस्कृति के संवाहक सबो भाषा मनके संरक्षण अउ संवर्धन ल परम आवष्यक मानत हे। प्रतिनिधि सभा सरकारी, स्वैच्छिक संगठन, जनसंचार के माध्यम, पंथ-संप्रदाय मनके षिक्षण संस्था अउ प्रबुद्धवर्ग समेंत संपूर्ण समाज ल आह्वान करत हे के हमार दैनन्दिन जीवन मं भारतीय भाषा मनके उपयोग अउ उनकर व्याकरण, षब्द चयन अउ लिपि मं षुद्धता सुनिष्चित करत उनकर संवर्धन के हर सम्भव प्रयास करे जाना चाही।
उपलब्धि ले भरे हे बीज निगम - श्याम बैस

उपलब्धि ले भरे हे बीज निगम - श्याम बैस

12-Sep-2018
उपलब्धि ले भरे हे बीज निगम - श्याम बैस छत्तीसगढ़ राज्य मं बीज अउ कृषि विकास निगम के स्थापना स्वस्थ अउ गुणवत्ता पूर्ण सस्ता बीज अउ आने कषि उपज ले जुड़े लाभ किसान मनला उपलब्ध कराय के उददेष्य देय गेय रहिस। ताकि स्थानीय किसान मनला उनकर मांग के अनरूप सस्ता दर मं बीज उपलब्ध होय। अइसन उदगार एक भेट के दौरान बीज निगम के अध्यक्ष श्री याम बैस व्यक्त करिन। बैसजी बीज निगम के उपलब्धि बर सरलग बताइन। उनकर कहना रहिस के किसान मनला उनकर मांग के अनुसार कृषि सुविधा उपलबध कराना बीज निगम के प्रथम दायित्व हे। जेकर निर्वहन करत बीज निगम आर्थिक रूप से कमजोर कृषक मनला निःषुल्क बीज वितरण के काम भी सफलता पूर्वक करे गेय हे। जेकर लाभ लघु अउ सीमांत किसान पाय हें। बैसजी खुद एक प्रगतिषील कृषक हें। जेन किसान के परेषानी अउ कृषि काम मं अपइया बाधा के पूरा जानकार हें। किसान के हित ल ध्यान मं रख के बीज निगम मं कार्य योजना बनाए जात हे। बैसजी कहिन के बीज निगम मं कृषक मनके हित मं अनेक किसम के योजना चलत हे। जेखर लाभ सीधा किसान भाई ले सकत हें। बीज उत्पादन, बीज निगम के उपलब्धि हे के निगम गठन के समय 2005-06 मं बीज उत्पादन 5.917 हेक्टेयर क्षेत्र मं अउ वर्ष 2006-07 मं 64.366 क्विटल उत्पादन रहिस। जेन वर्ष 2016-17 मं 35,670 हेक्टेयर क्षेत्र मं 10,063 कृषक मनके द्वारा उत्पादन लेय गइस। जेन वर्ष 2005-06 के तुलना मं 503 प्रतिषत जादा हे। वर्ष 2017-18 मं बीज उत्पादन 400000 हेक्टेयर क्षेत्र मं लेय जाही। बीज उपार्जन, वर्ष 2012-13 मं 6.52.608 क्विटल उपार्जन करे गइस। जेन वर्ष 205-06 के तुलना मं 1.014 प्रतिषत ले बाढ़ के रहिस। वर्ष 2016-17 मं 9.39.000 क्विटल प्राप्त होय के संभावना रहिस। वर्ष 2005-06 के तुलना मं 1458 प्रतिषत जादा हे। वर्ष 2017-18 मं 10 लाख क्विंटल बीज उपार्जन के लक्ष्य रखे गेय हे बीज वितरण, वर्ष 2005-06 मं 66.980 क्विटल बीज के वितरण के विरूद्ध वर्ष 2012-13 मं 6.74.353 क्ंिवटल बीज के वितरण करे गइस। जेन वर्ष 2005-06 के तुलना मं 1.007 प्रतिषत जादा हे। वर्ष 2016-17 मं 10.85.404 क्विटल बीज के वितरण करे गेय हे। जेन वर्ष 2005-06 के तुलना मं 1.014 प्रतिषत ले बाढ़ के वर्ष 2016-17 मं 9.39.000 क्विटल पैक्ड बीज मिले के संभावना हे। जेन वर्ष 2005-06 के तुलना मं 1458 प्रतिषत जादा हे। वर्ष 2017-18 मं 10 लाख क्ंिवटल बीज वितरन के लक्ष्य रखे गेय हे। उत्पादन मं उल्लेखनीय बृद्धि होय के कारन छ.ग. प्रदेष ला भारत सरकार ले 3 बेर कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुके हे। निःषुल्क धान बीज वितरण, मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के अनुसार सूखा प्रभावित क्षेत्र मं प्रदेष के लघु अउ सीमान्त कृषक मन ला राहत पहंुचाय बर बीज निगम द्वारा 2016 मं 4.44.835 क्विंटल धान बीज राषि रू. 94 करोड़ 50 लाख के निःषुल्क धान बीज वितरण करे गेय हे। जेकर ले प्रदेष के किसान मन मं उत्साह रहिस। बीज प्रक्रिया केंद्र, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र दंतेवाड़ा जिला के गीदम मं नवां बीज प्रक्रिया केंद बनाए जात हे। कोण्डागाॅव अउ सुकमा जिला मं घलव बीज प्रक्रिया केंद्र जल्दी शुरू करे जाही। बीज गोदाम एवं भंडारण क्षमता - वर्ष 2005-06 मं निगम के प्रकिया केंद्र मं 12 गोदाम के भंडारण क्षमता 8.500 मीट््िरकटन रहिस, उही वर्ष 2012-13 मं बढ़ा के 43 गोदाम करे गइस। जेकर क्षमता 64.500 मीट््िरकटन हो गेय हे। वर्ष 2016-17 मं 112 गोदाम जेकर भण्डारण क्षमता 1.72.500 मीट््िरकटन हे राषि रू. 6.60 करोड़ के लागत के 12 गोदाम बनाए जावत हे। जेकर पूर्ण होय मं कुल 124 गोदाम जेकर भण्डारण क्षमता 1.90.500 मीट््िरकटन हो जाही। वर्ष 2017-18 मं राष्ट््रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत राषि रू. 2.28 करोड़ लागत के 3 गोदाम क्षमता 1500-1500 मीट््िरकटन के प्रक्रिया केंद्र अभनपुर जिला रायपुर, चपले जिला रायगढ़ अउ खोखसा जिला जांजगीर मं बनाए जाही। गे्रडिंग मषीन, वर्ष 2005-06 मं राज्य के बीज प्रक्रिया केंद्र मं बीज के संसाधन कार्य 12 मषीन से करे जात रहिस। जेन मं वृद्धि करे गइस वर्ष 2012-13 मं 27 प्रक्रिया केंद्र मं कुल 50 मषीन लगाए गइस जेमा बीज संवर्धन कार्य करे जावत हे। वर्ष 2017-18 मं राष्ट््रीय कृषि विकास योजना से राषि रू. 2.30 करोड़ के लागत से 5 मषीन के प्रक्रिया केंद्र गीदम जिला-दंतेवाड़ा, बसना जिला-महासमुंद, घोटिया जिला-कवर्धा अभनपुर जिला-रायपुर अउ ंषिवपुरी जिला-राजनांदगांव मं स्थापित करे के कार्य योजना हे। जेकर ले कुल मषीन के क्षमता बढ़के 55 हो जाही। जिला कार्यालय, निगम मं वर्तमान मं छ.ग. राज्य के जमों जिला मं जिला कार्यालय संचालित हे। जेमा कृषक मनला तकनीकी मार्ग दर्षन के संगे-संग उन्नत किसम के कृषि यंत्र पौधा के संरक्षण औषधि मनके सामग्री प्रदाय छ.ग.षासन के राज्य स्तरीय समिति के अनुमोदित दर मं योजना के अंतर्गत प्रदाय करे जात हे। जैव उर्वरक, छोटे उरला ’अभनपुर’ मं प्रदेष के पहला बायोफर्टि लाईजर संयंत्र के स्थापना वर्ष 2011-12 मं 14.00 लाख पाकिट कलपनर के उत्पादन करे जात रहिस। संयंत्र के उत्पादन क्षमता मं वृद्धि करके वर्ष 2016-17 मं 32.14 लाख पाकिट उत्पादन अउ वितरण कार्य करे गेय हे। बायोफर्टिलाईजर संयंत्र ल आधुनिक करत तरल जैव उर्वरक संयंत्र लगाय के कार्य करे जात हे। गुजरात पैटर्न मं अनुदान व्यवस्था, अनुसार कृषि के अनुसार अनुदान व्यवस्था-प्रदेष के कृषक मनला ड््रीप स्प्रीकलर अउ कृषि यंत्र प्राप्त करे मं अध्यक्ष के सुलभ सुविधा प्राप्त होवय एकर बर गुजरात पेटर्न लागू करे गेय हे। किसान के हित मं अनुदान मं कृषियंत्र अउ सिंचाई सामग्री प्रदाय करे बर एक नवां प्रणाली प्रारंभ करे गेय हे। जेन सूचना प्रोद्योगिकी आई.टी. के प्रयोग से पूरा पारदर्षी अउ आॅनलाईन होही।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रक्षाबंधन के अवसर पर महिला मोर्चा अध्यक्षों ने बांधा रक्षासूत्र - छत्तीसगढ़ की पूजा विधानी ने भी बांधी राखी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रक्षाबंधन के अवसर पर महिला मोर्चा अध्यक्षों ने बांधा रक्षासूत्र - छत्तीसगढ़ की पूजा विधानी ने भी बांधी राखी

29-Aug-2018

प्रधानमंत्री मोदी को बांधी पूजा विधानी ने रक्षा सूत्र
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रक्षाबंधन के अवसर पर महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर के नेतृत्व में देश के कई राज्यों की महिला मोर्चा अध्यक्षों ने रक्षा सूत्र बांधी। प्रधानमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भाजपा महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष पूजा विधानी ने रक्षा सूत्र बांधी। वहीं भाजपा महिला मोर्चा महामंत्री मीनल चौबे ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के सभी जिलों में रक्षासूत्र बंधन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर घरों में जाकर भाईयों को राखी बांधी।  जिसमें भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष व पदाधिकारी कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में भाईयों-बहनों ने हिस्सा लिया। 

नई दिल्ली: संसद में तीसरे सप्ताह भी गतिरोध बना हुआ है और इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व वाईएसआर कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर सोमवार को चर्चा शुरू नहीं हो सकी.

नई दिल्ली: संसद में तीसरे सप्ताह भी गतिरोध बना हुआ है और इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व वाईएसआर कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर सोमवार को चर्चा शुरू नहीं हो सकी.

10-Jul-2018

नई दिल्ली: संसद में तीसरे सप्ताह भी गतिरोध बना हुआ है और इस बीच तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) व वाईएसआर कांग्रेस द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिसों पर सोमवार को चर्चा शुरू नहीं हो सकी. इससे पहले शुक्रवार को नोटिस दिया गया था और मंगलवार को दोनों पार्टियां एक बार फिर से अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर नोटिस देंगी. सोमवार को लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि सदन में व्यवस्था नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. वहीं सदन में मौजूद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है और सभी दल सहयोग दें.
सरकार ने राज्‍यसभा में फाइनेंस बिल भी लिस्‍टेड किया है, जबकि 11 दिनों से हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी है. इससे पहले सरकार इस बिल को लोकसभा में हंगामे के बावजूद पास करा चुकी है. सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही  एक घंटे स्थगित होने के बाद सदन की बैठक दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू हुई. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रस्ताव के नोटिस सदन पटल पर रखने को कहा, ताकि इस पर चर्चा शुरू की जा सके. प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए इसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए. लेकिन जैसा कि पिछले दो सप्ताह से हो रहा है. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) और टीआरएस सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास इकट्ठा हो गए.
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), समाजवादी पार्टी, एआईएमआईएम और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सहित कई विपक्षी दलों ने इन नोटिसों पर अपना समर्थन जताया. लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से खड़े होने को कहा, ताकि प्रस्ताव के समर्थक सदस्यों को गिना जा सके. इस दौरान टीआरएस और अन्नाद्रमुक के सांसद हाथों में तख्तियां लिए लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास इकट्ठा हो गए. महाजन ने कहा कि जो लोग खड़े हैं, वह उन्हें नहीं गिन पा रही हैं. उन्होंने कहा, "कृपया अपनी-अपनी सीटों पर जाएं. यदि सदन व्यवस्थित नहीं है तो ऐसे में मैं नोटिसों पर चर्चा शुरू नहीं करा सकती."
इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है. राजनाथ ने कहा, "हम किसी भी तरह की चर्चा के लिए तैयार हैं. हम अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए भी तैयार हैं. मैं सभी राजनीतक दलों से सहयोग की अपील करता हूं."
केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संवाददाताओं को बताया, "हम अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि सदन में हमारे पास समर्थन है. हम आश्वस्त हैं." तेदेपा के सांसद थोटा नरसिम्हन ने कहा कि पार्टी सदस्य पहले सदन में प्रस्ताव पेश करने पर जोर देंगे. उन्होंने कहा कि तेदेपा ने तृणमूल, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों से बात कर ली है.
तेदेपा के एक अन्य सांसद आर.एम.नायडू ने कहा कि वे संसद में यथासंभव विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, यह जानते हुए कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या होने की वजह से यह अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा. नायडू ने कहा, "सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे हमारा समर्थन करें. हम इस पर यथासंभव समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस पर चर्चा हो सके. हम सरकार गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं."
मौजूदा समय में लोकसभा में 539 सदस्य हैं, जिसमें से भाजपा के 274 सांसद हैं, जो अविश्वास प्रस्ताव गिराने के लिए आवश्यक 270 से अधिक है. भाजपा के पास शिवसेना और अकाली दल जैसी सहयोगी पार्टियों का भी समर्थन है. शिवसेना ने अभी अविश्वास प्रस्ताव पर अपने पत्ते नहीं खोलने का फैसला किया है.(साभार NDTV)

महिलाओँ के लिए शिक्षा के द्वार खोलने वाली देश की प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फूले को नमन

महिलाओँ के लिए शिक्षा के द्वार खोलने वाली देश की प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फूले को नमन

10-Jul-2018

अगर सावित्रीबाई फुले को प्रथम महिला शिक्षिका, प्रथम शिक्षाविद् और महिलाओं की मुक्तिदाता कहें तो कोई भी अतिशयोक्ति नही होगी, वो कवयित्री, अध्यापिका, समाजसेविका थीं। सावित्रीबाई फुले बाधाओं के बावजूद स्त्रियों को शिक्षा दिलाने के अपने संघर्ष में बिना धैर्य खोये और आत्मविश्वास के साथ डटी रहीं। सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिबा के साथ मिलकर उन्नीसवीं सदी में स्त्रियों के अधिकारों, शिक्षा छुआछूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह तथा विधवा-विवाह जैसी कुरीतियां और समाज में व्याप्त अंधविश्वास, रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष किया। ज्योतिबा उनके मार्गदर्शन, संरक्षक, गुरु, प्रेरणा स्रोत तो थे, ही पर जब तक वो जीवित रहे सावित्रीबाई का होसला बढ़ाते रहे और किसी की परवाह ना करते हुए आगे बढने की प्रेरणा देते रहे।
 
सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव नामक छोटे से गांव में हुआ था, 9 साल की अल्पआयु में उनकी शादी पूना के ज्योतिबा फुले के साथ किया गया। विवाह के समय सावित्री बाई फुले की कोई स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी वहीं ज्योतिबा फुले तीसरी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त किए थे। सावित्री जब छोटी थी तब एक बार अंग्रेजी की एक किताब के पन्ने पलट रही थी, तभी उनके पिताजी ने यह देख लिया और तुरंत किताब को छीनकर खिड़की से बाहर फेंक दिया, क्योंकि उस समय शिक्षा का हक़ केवल उच्च जाति के पुरुषों को ही था, दलित और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करना पाप था। थोड़ी देर में सावित्रीबाई उस किताब को चुपचाप वापस ले आई और उस दिन उन्होंने निश्चय किया कि वह एक न एक दिन पढ़ना ज़रूर सीखेगी और यह सपना पूरा हुआ ज्योतिबा फुले से शादी करने के बाद।
सावित्रीबाई फुले एक दलित परिवार से थी, जब ज्योतिबा फुले ने उनसे शादी की तो ऊंची जाति के लोगों ने विवाह संस्कार के समय उनका अपमान किया तब ज्योतिबा फुले ने दलित वर्ग को गरिमा दिलाने का प्रण लिया। वो मानते थे कि दलित और महिलाओं की आत्मनिर्भरता, शोषण से मुक्ति और विकास के लिए सबसे जरूरी है शिक्षा और इसकी शुरुआत उन्होंने सावित्रीबाई फुले को शिक्षित करने से की। ज्योतिबा को खाना देने जब सावित्रीबाई खेत में आती थीं, उस दौरान वे सावित्रीबाई को पढ़ाते थे,लेकिन इसकी भनक उनके पिता को लग गई और उन्होंने रूढ़िवादीता और समाज के डर से ज्योतिबा को घर से निकाल दिया फिर भी ज्योतिबा ने सावित्रीबाई को पढ़ाना जारी रखा और उनका दाखिला एक प्रशिक्षण विद्यालय में कराया। समाज द्वारा इसका बहुत विरोध होने के बावजूद सावित्रीबाई ने अपना अध्ययन पूरा किया।

 
अध्ययन पूरा करने के बाद सावित्री बाई ने सोचा कि प्राप्त शिक्षा का उपयोग अन्य महिलाओं को भी शिक्षित करने में किया जाना चाहिए, लेकिन यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि उस समय समाज लड़कियों को पढ़ाने के खिलाफ था। फिर भी उन्होंने ज्योतिबा के साथ मिलकर 1848 में पुणे में बालिका विद्यालय की स्थापना की, जिसमें कुल नौ लड़कियों ने दाखिला लिया और सावित्रीबाई फुले इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका बनीं।
कुछ ही दिनों में उनके विद्यालय में दबी-पिछड़ी जातियों के बच्चे, विशेषकर लड़कियाँ की संख्या बढ़ती गई, लेकिन सावित्रीबाई का रोज घर से विद्यालय जाने का सफ़र सबसे कष्टदायक होता था, जब वो घर से निकलती तो लोग उन्हें अभद्र गालियां, जान से मारने की लगातार धमकियां देते, उनके ऊपर सड़े टमाटर, अंडे, कचरा, गोबर और पत्थर फेंकते थे, जिससे विद्यालय पहुंचते पहुंचते उनके कपड़े और चेहरा गन्दा हो जाया करते थे। सावित्रीबाई इसे लेकर बहुत परेशांन हो गईं थीं, तब ज्योतिबा ने इस समस्या का हल निकला और उन्हें 2 साड़ियां दी, मोटी साड़ी घर से विद्यालय जाते और वापस आते समय के लिए थी, वहीं दूसरी साड़ी को विद्यालय में पहुंच कर पहनना होता था।

 
एक घटना के बाद इन अत्याचारों का अंत हो गया, घटना यू हैं कि एक बदमाश रोज सावित्रीबाई का पीछा करता था और उनके लिए रस्ते भर अभद्र भाषा का प्रयोग करता था, एक दिन वह अचानक सावित्रीबाई का रास्ता रोककर खड़ा हो गया और उन पर हमला करने की कोशिश की, सावित्रीबाई फुले ने बहादुरी से उसका मुकाबला किया और उसे दो-तीन थप्पड़ जड़ दिए। उसके बाद से किसी ने भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश नही की।
1 जनवरी 1848 से लेकर 15 मार्च 1852 के दौरान सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले ने बिना किसी आर्थिक मदद और सहारे के लड़कियों के लिए 18 विद्यालय खोले। उस दौर में ऐसा सामाजिक क्रांतिकारी की पहल पहले किसी ने नही की थी। इन शिक्षा केन्द्र में से एक 1849 में पूना में ही उस्मान शेख के घर पर मुस्लिम स्त्रियों व बच्चों के लिए खोला था। सावित्रीबाई अपने विद्यार्थियों से कहा करती थी कि “कड़ी मेहनत करो, अच्छे से पढ़ाई करो और अच्छा काम करो”। ब्रिटिश सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले के योगदान को देखते हुए 16 नवम्बर 1852 को उन्हें शॉल भेंटकर सम्मानित किया।
सावित्रीबाई फुले ने केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नही बल्कि स्त्री की दशा सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण काम किया। उन्होनें 1852 में ”महिला मंडल“ का गठन किया और भारतीय महिला आंदोलन की प्रथम अगुआ भी बनीं। सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने बाल-विधवा और बाल-हत्या पर भी काम किया था, उन्होंने 1853 में ‘बाल-हत्या प्रतिबंधक-गृह’ की स्थापना की, जहां विधवाएं अपने बच्चों को जन्म दे सकती थीं और यदि वो उन्हें अपने साथ रखने में असमर्थ हैं तो बच्चों को इस गृह में रखकर जा सकती थीं।
इस गृह की पूरी देखभाल और बच्चों का पालन पोषण सावित्रीबाई फुले करती थीं। 1855 में मजदूरों को शिक्षित करने के उद्देश्य से फुले दंपत्ति ने ‘रात्रि पाठशाला’ खोली थी। उस समय विधवाओं के सिर को जबरदस्ती मुंडवा दिया जाता था, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने इस अत्याचार का विरोध किया और नाइयों के साथ काम कर उन्हें तैयार किया कि वो विधवाओं के सिर का मुंडन करने से इंकार कर दे, इसी के चलते 1860 में नाइयों से हड़ताल कर दी कि वे किसी भी विधवा का सर मुंडन नही करेगें, ये हड़ताल सफल रही। सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने अपने घर के भीतर पानी के भंडार को दलित समुदाय के लिए खोल दिया। सावित्रीबाई फुले के भाई ने इन सब के लिए ज्योतिबा की घोर निंदा की, इस पर सावित्रीबाई ने उन्हें पत्र लिख कर अपने पति के कार्यो पर गर्व किया और उन्हें महान कहा।
सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा ने 24 सितम्बर,1873 को सत्यशोधक समाज की स्थापना की। सावित्रीबाई फुले ने विधवा विवाह की परंपरा शुरू की और सत्यशोधक समाज द्वारा पहला विधवा पुनर्विवाह 25 दिसम्बर 1873 को संपन्न किया गया था और यह शादी बाजूबाई निम्बंकर की पुत्री राधा और सीताराम जबाजी आल्हट की शादी थी। 1876 व 1879 में पूना में अकाल पड़ा था तब ‘सत्यशोधक समाज‘ ने आश्रम में रहने वाले 2000 बच्चों और गरीब जरूरतमंद लोगों के लिये मुफ्त भोजन की व्यवस्था की।
28 नवम्बर 1890 को बीमारी के के चलते ज्योतिबा की मृत्यु हो गई, ज्योतिबा के निधन के बाद सत्यशोधक समाज की जिम्मेदारी सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन के अंत तक किया। 1893 में सास्वाड़ में आयोजित सत्यशोधक सम्मेलन की अध्यक्षता सावित्रीबाई फुले ने ही की थी, वहां उन्होंने ऐसा भाषण दिया कि दलितों, महिलाओं और पिछड़े-दबे लोगों में आत्म-सम्मान की भावना का संचार हुआ।
1897 में पुणे में प्लेग की भयंकर महामारी फ़ैल गयी, प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की मौत हो रही थी। उस समय सावित्रीबाई ने अपने दत्तक पुत्र यशवंत की मदद से एक हॉस्पिटल खोला। वे बीमार लोगों के पास जाती और खुद ही उनको हॉस्पिटल तक लेकर आतीं थीं। हालांकि वो जानती थीं कि ये एक संक्रामक बीमारी है फिर भी उन्होंने बीमार लोगों की सेवा और देख-भाल करना जारी रखा। किसी ने उन्हें प्लेग से ग्रसित एक बच्चे के बारे में बताया, वो उस गंभीर बीमार बच्चे को पीठ पर लादकर हॉस्पिटल लेकर गईं। इस प्रक्रिया में यह महामारी उनको भी लग गई और 10 मार्च 1897 को सावित्रीबाई फुले की इस बीमारी के चलते निधन हो गया।
सावित्रीबाई प्रतिभाशाली कवियित्री भी थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत भी माना जाता है। वे अपनी कविताओं और लेखों में सामाजिक चेतना की हमेशा बात करती थीं। इनकी कुछ प्रमुख रचना इस प्रकार हैं -1854 में पहला कविता-संग्रह ‘काव्य फुले’, 1882 में पुस्तक ‘बावनकशी सुबोध रत्नाकर’,1892 ‘मातोश्री के भाषण’,ज्योतिबा फुले की मृत्यु के बाद 1891 में कविता-संग्रह ‘बावनकाशी सुबोध रत्नाकर’ आदि।
सावित्रीबाई फुले ने अपना पूरा जीवन समाज में वंचित तबके खासकर स्त्री और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता दिया। लेकिन सावित्रीबाई के काम और संघर्ष सामने नही आ पाते हैं, उन्हें ज्योतिबा के सहयोगी के तौर पर ज्यादा देखा जाता है, जबकि इनका अपना एक स्वतंत्रत अस्तित्व था, उन्होंने ज्योतिबा फुले के सपने को आगे बढ़ाने में जी जान लगा दिया सावित्री बाई फुले और ज्योतिबा फुले दोनों सही मायनों में एक दूसरे के पूरक थे।