देस म ओडीएफप्लस म अगुवा छत्तीसगढ़

देस म ओडीएफप्लस म अगुवा छत्तीसगढ़

06-May-2021
देस म ओडीएफप्लस म अगुवा छत्तीसगढ़ देस के ईकलौता ओडीएफप्लस प्लस राज म अगुवा छत्तीसगढ़।छत्तीसगढ़ राम के अंबिकापुर सहर ओडीएमप्लस राज म अगुवा हे। सरकार ह कचरा प्रबंधन बर सहर मन के रेटिंग जारी करत कहिस की छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर सहर अउ म.प्र.के इंदौर संग छःसहर ला ‘कूड़ा मुक्त पांच सितारा सहर’ घोसित करेगे हे। केन्द्र ह कहिस कि कोविड-19 महामारी ले निपटे बर स्वच्छ भारत मिसन ‘सबले बडे ताकत हे । छत्तीसगढ़ के भेलाई नगर ला ‘ तीन सितारा कूड़ा मुक्त रेटिंग‘मिलीस हे। आवासस अउ सहरी मामला के केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ह कूड़ा मुक्त सहर के स्टार रेटिंग के परिणाम के घोसना करिन । कुल 141 सहर के रंेटिग होईस हे। जेनमा 6 के पंाच सितारा, 65 ला तीन सितारा अउ 70 ला एक सितारा मिले हे। अंबिकापुर अउ इंदौर के अलावा गुजरात के राजकोट अउ सूरत,कर्नाटक के मॅसूर अउ महाराष्ट्र के नवी मुंबई ला भी पांच सितारा रेंटिग मिलीस। देस म अगुवा अंबिकापुर छत्तीसगढ़ राज के अंबिकापुर सहर पुरा म देस ओडीएफप्लस म अगुवा हें । अगुवा होए के मुख्य कारन- - देस के पहिली डोर टू डोर कचरा संग्रहन करने वाला पहला सहर बनीस। - स्वच्छता दीदिमन के समूह बना के एसएलआरएम ला आत्मनिर्भर बनाईस। - कचरा प्रबंधन करके देस के पहला कचरा डंप मुक्त सहर बनीस। -पुराना कचरा डंपिन्ग यार्ड ला स्वच्छता पार्क म बलदने वाला पहिली सहर -खुला मा सौच मुक्त होने वाला पहला निगम। -प्लास्टिक कचरा निपटान बर देस के पहली गार्बेज कैफे खोले गिस। - सबो सार्वजनिक स्थान के सौन्दर्यीकरन।
पसुपालक ला लाभ पहुचाए म अगुवा छत्तीसगढ

पसुपालक ला लाभ पहुचाए म अगुवा छत्तीसगढ

03-Jul-2020

पसुपालक ला लाभ पहुचाए म अगुवा छत्तीसगढ
छत्तीसगढ़ देस के पहिली राज हे जेन पसुपालक मन ला फायदा पहुंचाए बर गोबर खरीदहि । गऊपालन ल लाभ पहुॅंचाए बर ,गोबर प्रबंधन अउ पर्यावरन सुरक्षा बर छत्तीसगढ़ म सुरू होही ‘ गोधन न्याय योजना’ 
हरेली तिहार ले होही ऐ अभिनव योजना के सुरूआतःश्री भूपेश बघेल
गऊ-पालन अउ गोबर प्रबंधन ले पसुपालक ला होही लाभ
निर्धारित दर म होही गोबर के खरीदी , सहकारी समितिय ले बिकही वर्मी कम्पोस्ट
गोबर के खरीदी के दर तय करेबर पांच सदस्यीय मंत्री मण्डल के उप समिति गठित
गोबर प्रबंधन के पूरा प्रक्रिया के निर्धारन करेही मुख्य सचिव के अध्यक्षता म सचिवमन के कमेटी


मुुख्यमंत्री श्री भूपेश बधेल छत्तीसगढ़ राज म गऊ-पालन ल आर्थिक रूप ले लाभदायी बनाये अउ खुले म चराई के रोकथाम अउ सडक , सहरमन जिहां-जिहां आवारा घुमत पसुअ मन के प्रबंधन अउ पर्यावरन के रक्षा बर छत्तीसगढ़ राज म गोधन न्याय योजना के सुरू करे के एलान करिस । ये योजना के सुरूआत राज म हरेली तिहार के सुभ दिन ले होही। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपन निवास कार्यालय म सभा कक्ष म आनलाईन राज सरकार के अभिनव योजना के जानकारी  दीन।
    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ह गोधन न्याय योजना के बारे म विस्तार ले जानकारी देवत हुए बताईस कि ये योजना के उछेश्य प्रदेस म गौपालन ल बढ़ावा दे के साथ ही उनखरं सुरक्षा अउ उंखर माध्यम ले पसुपालक मन ला  आर्थिक रूप ले लाभ पहुचाना हे। उन मन कहिन कि छत्तीसगढ़ सरकार ह पाछु डेढ़ साल म छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा,गरूवा,बाड़ी के माध्यम ले राज के गा्रमीन अर्थव्यवस्था ल मजबूती ले दे जाही चार चिन्हारी ल बढ़ावा देे के प्रयास करे गिस हें। गांव म पसुधन के सरंक्षन अउ सवर्धन बर गौठान के निर्मान करे गे हे। राज म 2200 गांव म गौठान के निर्मान हो गे हे। अउ 2800 गांव म गौठान के निर्मान करे जात हे।आने वाला दू-तीन महीना म लगभग 5 हजार गांव म गौठान बन जाहीं। इन गौठान ल  हम आजीविका केन्द्र के रूप् म विकसित करे हनं। ईहां बड मात्रा म वर्मी कम्पोस्ट के निर्मान तक कहिला स्व-सहायाता समूह के माध्यम ले सुरू करे गिस।  मुख्यमंत्री ह कहिन कि गोधन न्याय योजना राज के पसुपालक के आर्थिक हित के संरक्षन के एक अभिनव योजना साबित होही। उन मन कहिन कि पसुपालक ले गोबर बिसाय बर एक रेट म करे जाही। दर के निर्धारित बर लिए कृषि अउ जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चैबे के अध्यक्षता म पांच सदस्य मंत्री मण्उलीय उप समिति गठित करे गिस।  ये समिति म वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर सहकारिता मंत्री मण्डीय उप समिति गठित करे गिस है। ये समिति म वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, सहाकारित मंत्री डाॅ.प्रेमसाल सिंह टेकाम,नगरीय प्रसासन मंत्री डाॅ.सिव कुमार डहरिया, राजस्व मंत्री श्री जयसिहं अग्रवाल सामिल करे गे हे।ये मंत्री मण्डलीय समिति राज म किसान, पसुपालक , गौ -साला संचालक अउ बुद्धिजीवियों ल मन बात ल समझ के आठ दिन म गोबर खरिद के दर निर्धारित करही। मुख्यमंत्री ह कहिन कि गोबर खरीदी ले लेकर ओखर वित्तिीय प्रबंधन अउ वर्मी कम्पोस्ट के उत्पानल ले के ओखर बेचे के तरिका क निर्धारिन बर मुख्य सचिव के अध्यक्षता म प्रमुख्य सचिव के अध्यक्षता म प्रमुख सचिव अउ सचिव के कमेटी गठित करे गिस । उन मन कहिन कि राज म हरेली तिहार म पसुपालक अउ किसान बर गोबर निर्धारित दर म क्रय करे जाए के सुरूआत होही। ये योजना राज म  अर्थव्यवस्था ले अउ गा्रमीन अर्थव्यवस्था ल बेहतर बनाए के महत्वपून साबित होही अउ एखर दूरगामी परिनाम होहीेश्। एखर माध्यम ले गांव म रोजगार क अवसर तको बडहीं 

योगाभ्यास म अगुवा छत्तीसगढ़

योगाभ्यास म अगुवा छत्तीसगढ़

29-Jul-2019
योगाभ्यास म अगुवा छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ म ज्यादा से ज्यादा जगह स योगाभ्यास के गोल्डन बुक आंॅफ वल्र्ड रिकार्ड म लीखे गिस ।मुख्यमंत्री श्री भूपेस बघेल के निर्देस म सबो जिला मुख्यालय,स्कूल, महाविघालय,नगरीय निकाय व ग्राम पचांयत के संग अनेक संस्था अउ अबड जगह म विसेस योगाचार्यो के अगुवाई म 60 लंाख लोगन मन सामूहिक योगाभ्यास म सामिल होईस । राजधानी राईपुर म सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम म करें गिस । इहंा लगभग 600 स्कूली लईका,जनप्रतिनिधिगण अउ अधिकारि मन योगाभ्यास करिन ।कार्यक्रम ला सब्बों विस्वघिालय,महाविघालय,स्कूल अउ अब्बड़ संस्थान मन तको आयोजित करिन। गोल्डन बुक आॅंफ वल्र्ड रिकार्ड के प्रतिनिधि आलोक कुमार ह छत्तीसगढ म नवा रिकार्ड क प्रमाण पत्र महापौर दुबे ला दिन।पुरा देस सबले ज्यादा मल्टीपल जगह म लोगन द्वारा योगाभ्यास क वल्र्ड रिकार्ड बनाईस ।
पं.रविसंकर सुक्ल सम्मान

पं.रविसंकर सुक्ल सम्मान

02-Oct-2018
पं.रविसंकर सुक्ल सम्मान पंडित रविषंकर षुक्ल के जन्म 2 अगस्त 1877 के सागर मं होय होय रहिस। इनकर सिक्षा सागर अउ रायपुर मं होइस। स्नातक अउ कानून के सिक्षा प्राप्त पंडित रविषंकर सुक्ल के गणना उंूचा वकील मं होत रहिस। 1902 मं पंडित रविषंकर सुक्ल खैरागढ़ रियासत मं प्रधान अध्यापक के पद मं नियुक्त होइन। कानून के परीक्षा उत्तीर्ण करे के बाद राजनांदगांव मं वकालत आरंभ करिन। 1921 मं उन कांग्रेस के औपचारिक सदस्यता ग्रहण करिन। हिन्दी भासा के प्रचार बर घलव पंडित सुक्ल सदैव सक्रिय रहिन। 1922 मं नागपुर मं संपन्न मध्यप्रदेष हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्षता करिन। छत्तीसगढ़ के राजनैतिक अउ समाजिक चेतना जागृत करे बर उन 1935 मं महाकोषल सप्ताहिक पत्र के पकाषन आरंभ करिन। 1942 मं भारत छोड़ो आंदोलन के नेतृत्व के भार छत्तीसगढ़ मं आप संभारे रहिन। स्वतंत्रता के पूर्व आप 1946 मं राज्य विधान सभा के मध्यप्रांत के मुख्य मंत्री अउ पाछू अविभाजित मध्यप्रदेष के प्रथम मुख्य मंत्री बनिन। पंडित षुक्ल ल आधुनिक मध्यप्रदेष के निर्माता कहे जाथे। भिलाई इस्पात संयंत्र के स्थापना के श्रेय इनला देय जाथे। रायपुर म संस्कृत, आयुर्वेद, विज्ञान अउ इंजीनियरिग सिखा खातिर महाविद्यालय के स्थापना इनकर पे्ररणा ले होइस। 31 दिसम्बर 1956 के कर्मठ राजनेता महान सिक्षाविद अउ दूरदर्षी ये राजनेता के निधन होइस। छत्तीसगढ़ सासन उनकर स्मृति मं समाजिक, आर्थिक अउ सैक्षिक क्षेत्र मं नवां प्रयत्न बर पंडित रविषंकर षुक्ल सम्मान स्थापित करे हे। ये संमान वर्स 2001 से स्थापित करे गेय हे।
राजा चक्रधर सिंह सम्मान

राजा चक्रधर सिंह सम्मान

02-Oct-2018
राजा चक्रधर सिंह सम्मान राजा चक्रधर सिंह के जन्म 19 अगस्त 1905 के रायगढ़ रियासत मं होय रहिस। नन्हें महराज के नाम ले पहिचाने जाने वाला चक्रधर सिंह ल संगीत विरासत मं मिले रहिस। 1924 मं राज्य भिसेक के पाछू उन अपन परोपकारी नीति अउ मृदुभासिता ले रायगढ़ रियासत मं जनता के बीच सीघ्र लोक प्रिय हो गइन। कत्थक नृत्य बर उनला खास करके जाने गईस। अपन अनुभूति अउ संग्रीत के गहराइ मं डूब के उनमन कत्थक के एक बिल्कुल नवां अउ विसिस्ट स्वरूप विकसित करिस। जेन ला रायगढ़ घराना के नाम ले जाने जाथे। उनमन कत्थक के अनेक नवां बंदिस तैयार करिन। नृत्य अउ संगीत के इन दुर्लभ बंदिस के संग्रह ग्रंथ के रूप मं आइस। जेमा मूरत परन पुस्पाकर ताल तोयनिधि राग रत्न मंजूसा अउ नर्तन स्वर्गस्वम विसेस रूप से उल्लेखनीय माने जाथे। संगीत के क्षेत्र मं उनमन विसिस्ट योगदान ल ध्यान करके मध्य प्रदेस सासन भोपाल मं चक्रधर नृत्य केंद्र के स्थापना करे हे। 17 अक्टूबर 1947 के रायगढ़ मं इनकर निधन होइस। फेर राजा चक्रधर सिंह अपन राजतंत्र मं सासन करते करत कला के प्रति जेन संवेदन सीलता के परिचय देइन वइसन दूसर मिसाल बहुत कम मिलथे। छत्तीसगढ़ सासन उनकर स्मृति मं कला अउ संगीत के खातिर ‘‘राजा चक्रधर सिंह सम्मान स्थापित करे हे। ये सम्मान 2001 ले स्थापित करे गेय हे।
चन्दूलाल चन्द्राकर पुरस्कार

चन्दूलाल चन्द्राकर पुरस्कार

02-Oct-2018
चन्दूलाल चन्द्राकर पुरस्कार छत्तीसगढ़ ले बाहिर जाके रास्ट््रीय स्तर मं पत्रकारिता करइया ये प्रदेस के जेन विलक्षण पत्रकार के नाम लेय जाथे उनमा चनदूलाल चंद्राकर प्रमुख हें। उनकर जन्म 1 जनवरी 1921 के दुर्ग जिला के निपानी गांव के कृसक परिवार मं होइस। उन बाल काल से ही मेधावी रहिन। दुर्ग मं प्रारंभिक षिक्षा के दौरान साहित्य अउ खेलकूद के प्रति उनकर रूझान रहिस। अंचल ले उनला बड़ लगाव रहिस। ग्रामीण मनके समस्या के समाधान करे मं उन सदैव तत्पर रहंय। राजनीति के पूर्व उन सक्रिय पत्रकारिता ले जुड़े रहिन। द्वितीय विष्वयुद्ध के समय से उन अपन पत्रकारिता ल गति देइन अउ धीरे धीरे मंजे हुए पत्रकार बन गये। 1945 से पत्रकार के रूप मं देस भर मं उनकर पहिचान बनगे। चंदूलाल चंद्राकर के लिखे समाचार देस विदेस के अनेक अखबार मं प्रकासित होय लगिस। उनला नौ ओलंपिक खेल अउ तीन एषियाई खेल के रिपोर्टिग के गहिरा अनुभव रहिस। चन्दूलाल चंद्राकर रास्ट््रीय अखबार दैनिक हिन्दुस्तान मं संपादक के रूप मं घलव आपन सेवा देइन। छत्तीसगढ़ से रास्ट््रीय समाचार पत्र के संपादक पद मं पहुंचने वाला उन प्रमुख पत्रकार रहिन। युद्ध स्थल से रिपोर्टिग करे के उनला अनुभव रहिस। उन विष्व के लगभग जम्मों देष मनके यात्रा पत्रकार के रूप मं करिन। ये कउनों भी पत्रकार बर बड़ उपलब्धि के बात हे। उनमन 1970 मं पहिली बेर लोक सभा के निर्वाचित सदस्य होय के संगे संग सक्रिय राजनीति मं हिस्सा लेइन। उन लोक सभा के सदस्य बर पांच बेर निर्वाचित होइन। पर्यटन, नागरिक उड्डयन, कृसि, ग्रामीण विकास जइसन महत्वपूर्ण विभाग मनके मंत्री के दायित्व संभालत देष के सेवा करिन। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव अउ मध्यप्रदेस कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता के रूप मं उन सक्रिय रहिन। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण सर्वदलीय मंच के अध्यक्ष रहिके उन राज्य आंदोलन ल नवां सक्ति देइन। अपन लेखनी ले ज्वलंत मुद्दा उठाय बहंस के गुंजाइस तैयार करने वाला पत्रकार मं चंदूलाल चंद्राकर के सम्मानजनक स्थान रहिस। 2 फरवरी 1995 के उनकर निधन हो गइस। श्रेस्ठ पत्रकारिता ले छत्तीसगढ़ के नाम रोसन करइया व्यक्ति ले नवां पीढ़ी पे्ररणा ग्रहण करय। मूल्य आधारित पत्रकारिता ल प्रोत्साहन मिलय एकर खातिर छत्तीसगढ़ सासन उनकर स्मृति मं पत्रकारिता के क्षेत्र मं चन्दूलाल चंद्राकर सम्मान 2001 से स्थापित करे हे।
गुण्डाधूर सम्मान

गुण्डाधूर सम्मान

02-Oct-2018
गुण्डाधूर सम्मान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मं जनजातीय क्षेत्र के क्रंातिवीर मन मं बस्तर के गुण्डाधूर के नाम बहुंत श्रद्धा के साथ लेय जाथे। इनकर जन्म बस्तर के नेतानार गांव मं होय रहिस। धुरवा जाति के ये वीर युवक सन् 1910 के आदिवासी विद्रोह के प्रमुख सूत्रधार रहिस। वो समय अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनता के आक्रोस बस्तर मं भूमकाल के रूप मं प्रकट होय रहिस। ये जागरन के केन्द्र मं गुण्डाधूर के अदम्य साहस, सौर्य अउ उनकर रणनीति ले आदिवासी समुदाय बहुंत प्रभावित होइस। फरवरी 1910 के समूचा बस्तर मं विद्रोह के भूचाल आ गेय रहिस। गुण्डाधूर के नेतृत्व मं अंग्रेंजी षासन के जड़ ले उखाड़ फेके खातिर सासकीय संस्था मनके अउ संपत्ति ल निसाना बनाय गइस। गुण्डाधूर ह अपन सहयोगी मनला सकेल के गांव अलनार मं अंगे्रज मन संग मुकाबला करिन। गुण्डाधूर ल चारो मुड़ा ले घेर लेय गईस। फेर सैनिक मनके बंदूक के सामना करत हुए वो बंच निकलिन। अंग्रेज मन वोला बस्तर के चप्पाचप्पा छान मारिन, लेकिन गुण्डाधूर अंत तक पकड़ मं नई आइन। उन एक महान सेनानी, छापा मार युद्ध के जानकार अउ देष भक्त होय के संगे संग आदिवासी मनके पारंपरिक हित के रक्षा खातिर बड़ जागरूक रहिन। छत्तीसगढ़ सासन ह उनकर स्मृति मं साहसिक काम अउ खेल के क्षेत्र मं उत्कृस्ट प्रदर्सन के खातिर गुण्डाधूर के नाव मं सम्मान के स्थापना करे हे। ये सम्मान के स्थापना सन 2001 ले करे गेय हे।
डॉ खूबचंद बघेल सम्मान

डॉ खूबचंद बघेल सम्मान

02-Oct-2018
डाॅं. खूबचंद बघेल सम्मान डाॅं. खूबचंद बघेल के समर्पण जीवन समाज अउ कृसक मनके कल्याण अउ विभिन्न रचनात्मक कार्य बर समर्पित रहिस। इनकर जनम रायपुर जिला के पथरी गांव मं 19 जुलाई 1900 के होय रहिस। पिता के नाम जुड़ावन प्रसाद अउ माता के नाम केकती बाई रहिस। डाॅ. खूबचन्द बघेल के प्रारंभिक सिक्षा गांव मं अउ हाईस्कूल के पढ़ाई रायपुर मं होईस। 1925 मं नागपुर ले चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण करे के पाछू असिस्टेंट मंेडिकली आफिसर के रूप मं कार्यरत रहिन। 1930 मं नमक सत्याग्रह के दौरान सासकीय नौकरी छोड़ के उन आंदोलन मं सामिल हो गइन। 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह मं तीसर बेर जेल गइन। 1942 मं भारत छोड़ो अंादोलन मं इनला फेर ढाई बछर के कठोर कैद होईस। डाॅ. खूबचंद बघेल 1951 मं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित होइन अउ 1962 तक सदस्य रहिन। 1967 मं इनला राज्य सभा के सदस्य चुने गइस। डाॅं. खूबचंद बघेल कृसि ल उद्योग के समकक्ष विकसित करे के दिसा मं अभूतपूर्व प्रयास करिन। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बर जन चेतना जागृत करे के दिसा मं उन लगातार संलग्न रहिन। साहित्य सृजन लोक-मंचीय प्रस्तुति अउ बोलचाल मं उन छत्तीसगढ़ी के पक्षधर रहिन। इन उद्देस्य मनला पूरा करे खातिर उनमन 1967 मं रायपुर मं ‘‘छत्तीसगढ़ - भ्रातृ संघ नामक संस्था के गठन करिन। 22 फरवरी 1969 के उनकर निधन हो गइस। छत्तीसगढ़ शासन उनकर स्मृति मं कृसि के क्षेत्र मं महत्वपूर्ण उपलब्धि अउ अनुसंधान ल बढ़ावा देय बर डाॅ. खूबचंद बघेल सम्मान स्थापित करे हे। ये सम्मान 2001 ले स्थापित करे गेय हे।
 तपस्वी योगी स्वामी आत्मानंद

तपस्वी योगी स्वामी आत्मानंद

15-Sep-2018
पुरखा के सुरता - तपस्वी योगी स्वामी आत्मानंद (1) स्वामी जी के जीवन परिचय :- स्वामी जी के जन्म 6 अक्टूबर 1929 के बिहनिया बेर के ब्रम्ह मुहरत में ग्राम बरबंदा मा होइस हे। आपमन के माताजी के नाव भाग्यवती रिहिस हे, आपमन के माताजी हा बहुत धरम करम ला मानने वाला महिला रिहिस हे, भगवान भोलेनाथ के भक्ति भाव से पूजा करय, एक बार चमत्कारिक घटना होइस। जब आपमन के माताजी हा गर्भ मा रिहिस हे वो समय 5 अक्टूबर के रात कन भगवान भोलेनाथ हा सपना में प्रसन्न मुद्रा में खड़े रिहिस हे दूसर क्षन वो दिव्य शिशु बन के भाग्यवती के गोद मा खेले ले लागिस, भाग्यवती वो लइका ला स्तनपान करावत रिहिस हे, थोड़ा देर बाद भाग्यबती के नींद खुल गे अऊ ऊही दिन सुन्दर बालक तुलेंद्र के जन्म होइस। आपमन के बाबूजी के नाव धनीराम वर्मा मांढर स्कूल में शिक्षक रिहिस हे, सामाजिक कारन के वजह से देशभर के दौरा आपमन करत रेहे हव, स्वदेशी आंदोलन मा भी जुड़े रेहे हव, एक बार जिला भर के व्यायाम प्रतियोगिता में आपमन पहला आय हव जेमा 184 तोला चांदी अऊ भीम गदा इनाम मा मिलिस। जन्म राशि के आधार ले आपमन के नाव रामेश्वर रखे गे रिहिस हे, बाद में स्कूल भर्ती करे समय मा आपमन के नाव तुलेंद्र रखे गे रिहिस हे। आपमन के पढ़ाई के लगन ला देखत हुए 4 साल मा मांढर के स्कूल मा भर्ती करा दे गे रिहिस हे। डेढ़ साल के उमर मा आपमन हा राम नाम के संकीर्तन करात रेहे हव, आपमन 4 साल के उमर मा टाउन हॉल मा हारमोनियम ला बजा के गीत गाय रेहे हव जेन ला सुन के दर्शकगण अऊ अऊ पंडित रविशंकर शुक्ल हा दंग रिगे रिहिस हे। (2) स्वामी जी की शिक्षा :- आपमन मैट्रिक ला प्रथम श्रेणी ले पास करे हव। आगे के पढाई के व्यवस्था रइपुर मा नई होय के कारण नागपुर के साइंस कॉलेज मा भर्ती होय हव। उहा हॉस्टल के व्यवस्था नई होय के कारण आपमन रामकृष्ण मा रई के अध्ययन करे हव। आपमन हा एमएससी ला प्रथम श्रेणी ले उतीर्ण करेव, संगवारी मन के सलाह ले आईएएस के परीक्षा भी दिलायव जेमा आपमन ला प्रथम 10 उमीदवार मा स्थान मिले रिहिस हे, मानव सेवा के भाव के कारण आपमन ये नौकरी ला नई करे हव, बाद में रामकृष्ण के विचारधारा ले जुड़ के कठिन साधना अऊ स्वअधयाय में जुड़ गे रेहे हव। (3)स्वामी जी के समाज सेवा मा सम्पर्ण :- सन 1957 मा रामकृष्ण मिशन के महाध्यक्ष स्वामी शंकरानंद हा तुलेंद्र ला ब्रम्हचर्य मा दीक्षित करिस अऊ वोला नवा नाव स्वामी तेज चैतन्य दिस। अपन आप मा निरन्तर विकास अऊ साधना सिद्धि बर हिमालय मा स्थित स्वर्गाश्रम मा एक वर्ष ले कठिन साधना कर के वापस रइपुर आय हव। आपमन रइपुर में स्वामी विवेकानद आश्रम के निर्माण कार्य ला शुरुवात करे हव। ये काम बर आपमन ला मिशन ले कोई स्वीकृत नई मिलिस तभो ले आपमन के प्रयास अऊ मेहनत से रामकृष्ण मिशन बेल्लूर मठ से संबद्धता प्राप्त होइस। स्वामी भास्करेश्वरानंद के सानिध्य मा आपमन संस्कार के शिक्षा ग्रहण करे हव, यही आपमन ला स्वामी आत्मानन्द के नाव मिलिस हे। (4) स्वामी जी के अन्य कार्य:- आदिवासी मन ला उचित सम्मान, ठग मन ले बचाय बर अऊ वोकर मन के उपज मन के सही मूल्य दिलाय बर अबूझमाड़ प्रकल्प के स्थापना करे हव। नारायणपुर मा वनवासी सेवा केंद्र प्रारम्भ करेव जेमा वनवासी मन के दशा अऊ दिशा सुधारे के प्रयास होइस हे। खेती के संगेसंग पेयजल, शिक्षा, चिक्तिसा के कार्य भी होय लागिस। वनवासी छात्र मन बर आवासीय विद्यालय के साथ अन्य विद्यालय के निर्माण अऊ छात्रावास के निर्माण भी करे हव, आपमन ला यूनिसेफ ले आर्थिक मदद भी मिलिस हे। नागपुर मा सेवा संस्था के शुभारम्भ भी करेव, आपमन के द्वारा अध्ययन करे हुए छात्र मन बड़े बड़े प्रशासनिक पद मा चयनित होय हाबय। 27 अगस्त 1989 के दिन भोपाल के सड़क मार्ग के द्वारा रइपुर आवत रेहेव ता राजनाँदगाँव के समीप सड़क दुर्घटना मा आपमन के दुःखत निधन होंगे। (5) स्वामी आत्मानंद जी के भाई :- आपमन के 4 भाई होथव जेमा छोटे भाई प्रसिद्ध भाषाविद अऊ विवेक ज्योति के संस्थापक डॉक्टर नरेंद्र देव वर्मा स्वामी जी जीवन काल मा ही स्वर्ग सिधार गे रिहिस, शेष 3 भाई मा स्वामी त्यागनंद जी महाराज अपन बड़े भाई के रस्ता में चलत हुए इलाहाबाद रामकृष्ण के प्रमुख हाबय। स्वामी निखिलात्मकानंद जी महाराज छतीसगढ़ के वनवासी क्षेत्र मा शिक्षा संस्कार के ज्योति जलावत नारायणपुर आश्रम के प्रमुख हराय। सबके छोटे भाई डॉक्टर ओम प्रकाश वर्मा शिक्षाविद हे अऊ विवेकानंद विद्यापीठ रइपुर के प्रमुख हे।
रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती

12-Sep-2018
महारानी दुर्गावती रानी दुर्गावती के जन्म 5 अक्टूबर सन 1524 के महोबा मं हांय रहिस। दुर्गावती के पिता महोबा के राजा रहिस। रानी दुर्गावती सुन्दर, सुषील, विनम्र, योग्य अउ साहसी लइका रहिस। महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल के एक एके ठन एकलउतीन बेटी रहिस। बांदा जिला के कालिंजर किला मं 1524 ईसवी के दुर्गा अष्टमी के जन्म के कारण उनकर नाम दुर्गावती रखे गइस। नाम के अनुरूप वोहर तेज, साहस, अउ सुन्दर होए के कारण इनकर प्रसिद्धि सबो डहर फइल गे रहिस। दुर्गावती के मइके अउ ससुराल पक्ष के जाति अलग रहिस। तभो ले दुर्गावती के प्रसिद्धि ले प्रभावित होके गोंडवाना सम्राज के राजा संग्रामष्षाह मंडावी संग विहाव करके उनला अपन पुत्र के वधू बनाइन। दुर्भागवष विहाव के चार बछर बाद राजा दलपत षाह के निधन हो गइस। वो बेरा दुर्गावती के गोद मं तीन बछर के नरायण रहिस। वो बेरा रानी ह स्वयं गढ़ मंडला के षासन संभाले लेय रहिन। उनमन केउ ठक मठ, कुंआ, बावली अउ धर्मषाला बनवाइन। वर्तमान जबलपुर उनकर राज के केन्द्र रहिस। उनमन अपन दासी के नाम मं दासी तलाव, चेरी के नाम मं चेरी तलाव, अपन नाम मं रानी तलाव अउ अपन विष्वासी दीवान आधार सिंह के नाम मं आधार ताल बनवाइन। महारानी दुर्गावती के सुषासन के सांथ पंद्रह बछर तक गोंडवाना मं राज रहिस। बिहाव के होय ले एक बछर बाद दुर्गावती के एक पुत्र होइस। जेकर नाम वीर नारायण रखे गेइस। जेन बेरा वीर नारायण केवल तीन बछर के रहिस वोकर पिता दलपत षाह के मृत्यु हो गईस। दुर्गावती के उूपर दुख के पहाड़ टूट परिस। परन्तु वोहर बड़ा धैर्य अउ साहस के संग ये दुःख पिरा ल सहन करिस। दलपतिष्षाह के मृत्यु के बाद उनकर पुत्र वीर नारायण गद्दी म बैइठिस। रानी दुर्गावती वोकर संरक्षिका बनिस अउ राज काज ल स्वयं देखिस समारिस। उन सदैव प्रजा के दुःख सुख के ध्यान रखत रहिन। चतुरा अउ बुद्धिमान मंत्री आधार सिंह के सलाह अउ सहयोग ले रानी दुर्गावती ह अपन राज्य के सीमा बढ़ाइस। राज्य के संगे-संग वोहर साज बाज के संग अपन सेना घलव बनाइन। उन अपन वीरता, उदारता, चतुरई ले राज, नीति, एकता स्थापित करिन। गोंडवाना राज्यष्षक्ति षाली अउ संपन्न राज्य मन मं गिने जावत रहिस। जेकर ले दुर्गावती के ख्याति फइल गेय रहिस। रानी दुर्गावती के ये सुखी अउ सम्पन्न राज्य मं मालवा के मुसलमानष्षासक बाज बहादुर ह केउ बेर हमला करिस, फेर हर हर खेप वोहर पराजित होइस। रानी दुर्गावती ह अपन पहली युद्ध मं जीत के भारत वर्ष मं अपन नाम रोषन कर लेय रहिस। वीरांगना रानी दुर्गावती षेरषाह के मौत के बाद सूरत खान ह उनकर कारभार बोहस जेन वो बेरा मालवा गणराज्य मंष्षासन करत रहिस। सूरत खान के बाद वोकर पुत्र बाजबहादुर कमान अपन हाथ मं लेइस। जेन रानी रूपमती संग पे्रम करे खातिर प्रसिद्ध होय रहिस। सिंहासन मं बइठते छन बाजबहादुर ल एक महिलाष्षासक नई झेलाइस। वोला हरवाना ल चुटकी के खल जानिस। एकरे सेती वोहर रानी दुर्गावती के गोंड साम्राज्य म धावा बोल देइस। बाज बहादुर के रानी दुर्गावती ल कमजोर समझना भारी भूल परिस। इही कारण वोला भारी हार के सामना करना परिस। ओकर कतको सैनिक घायल हो गइन। बाज बहादुर के खिलाफ ये जंग मं जीत के कारण पास परोस के राज्य मं रानी दुर्गावती के डंका बाज गईस। अब रानी दुर्गावती के राज्य ल पाय के हर कोई सपना देखे लगिन। जेन मं एक मुगल सूबेदार अब्दुल माजिद खान घलव रहिस। अब्दुल माजिद आसफ खान कारा मणिकपुर के शासक रहिस। जे रानी के नजदीक के राज्य रहिस। जब वो रानी के खजाना के बारे मं सुनिस त पगला गे। वो राज मं चढ़ाई करे बर विचार करे लागिस। रानी दुर्गावती के योग्यता अउ वीरता के प्रषंसा अकबर हर सुनिस। वोकर दरबारी मन वोला गोंडवाना ल अपन अधीन कर लेय के सलाह देय लगिन। उन आसफ खां नाम के सरदार ल गोंडवाना के गढ़ मंडला म चढ़ाई करे के उपाय बता देइन। अकबर अउ दुर्गावती तथा कथित महान मुगल षासक अकबर घलव राज्य ल जीत के रानी ल अपन खेमा मं मिला के रखना चाहत रहिस। एकर बर वोहर पैंतरा बाजी शुरु कर देईस। वो रानी के प्रिय सफेद हाथी सरमन अउ उनकर विष्वापात्र मंत्री आधार सिह ल भेंट के रूप मं अपन पास भेजे के आदेष कर देइस। रानी ये मांग ल ठुकरा देइस। एकर उपर अकबर ह अपन एक झन रिष्तेदार आसफ खाॅन के अगुवानी मं गोंडवाना उपर हमला करे के आदेष कर देइस। एक बेर तो आसफ खाॅ पराजित होगे, फेर दूसर खेप वोहर दुगुना सेना अउ तइयारी के संग हमला बोल देइस। दुर्गावती मेंर वो बेरा बहुत कम सैनिक रहिन। उन जबलपुर के पास ‘नरई नाला’’ के किनारे मोर्चा लगाइन अउ स्वयं पुरुष वेष मं युद्ध के नेतृत्व करे लागिन। ये युद्ध मं 3,000 मुगल सैनिक मारे गईन। रानी के घलव अपार क्षति होइस। अगले दिन 24 जून 1564 के मुगल सेना हर फेर हमला बोल बोल देइस। आज रानी के पक्ष दुर्बल रहिस। अनहोनी ल जान के रानी ह अपन पिलवा पुत्र नारायण ल सुरक्षित स्थान मं भेजवा देइस। तभे एक ठन तीर उनकर भुजा मं आके लग गे। रानी ह वोला निकाल के फेंक देइस। तुरते दूसर तीर ह उनकर आंखी मं बेध देइस। रानी ह इहू ल निकालिस फेर वोकर नोक आंखिच मं फंस के रहिगे। तइसने तीसर तीर आके उनकर गर्दन मं धंस गे। रानी ह अंत समय जान के मंत्री अधार सिंह ल कहिस अपन तलवार ले उनकर गर्दन ल काट देवय। फेर वोहर एकर बर तइयार नई होइस। त स्वयं रानी अपने कटार ल हेर के अपन सीना मं भोंक लेइस। आत्म बलिदान के पथ मं आगू बढ़ गे। महारानी दुर्गावती ह ए ले किसम अकबर के सेना सेनापति आसफ खान संग लड़त अपन आत्म उत्सर्ग कर देइस।