भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव

भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव

15-May-2021
भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ म निर्माण कार्य के ठेका म बड़का बदलाव करे हे। अभी लागु पंजीयन सरेनी अ,ब, स,द के बाद अब नवा सरेनी ई बनाय के निरन य लेय हे। येकर उद्देस्य ब्लॉक स्तर के स्नातक बेरोजगार ल रोजगार उपलब्ध कराना अउ स्थानीय संसाधन उपयोग करना हवय। लोक निरमान बिभाग डाहर ले येकर आदेस मंत्रालय महानदी भवन ले जारी करे गेय हे। नवा ई सरेनी म पंजीयन बर स्नातक अउ बेरोजगार होना जरुरी हे। येकर पंजीयन ई सरेनी म करे जाहि। अउ ये पंजीयन ह 5 बछर ले मान्य रहि। हैडिंग- स्नातक बेरोजगार ल ब्लाक स्तर के निरमान कार्य म मिलहि ठेका
संविधान दिवस के मउका म स्कूल सिक्छा बिभाग डाहर ले राज्य स्तरीय वेबिनार

संविधान दिवस के मउका म स्कूल सिक्छा बिभाग डाहर ले राज्य स्तरीय वेबिनार

15-May-2021
संविधान दिवस के मउका म स्कूल सिक्छा बिभाग डाहर ले राज्य स्तरीय वेबिनार के आयोजन करे गिस। ये कार्यक्रम म मुख्यमंतरी भूपेश बघेल कहिन कि लोगन के गरिमा अउ देस के एकता ल हमर संविधान बनाय राखे हे। हम सब ल संकल्प लेय ल पढ़हि कि हमर महान संविधान के रक्छा कर सकन। जब ये संविधान सुरक्छित रहि, तब हमर देस, इंहा रहइया लोगन अउ ओखर भविस्य सुरक्छित रहि। मुंख्यमंतरी कहिन कि नवा पीढ़हि के मन म अपन संविधान के प्रति आस्था अउ गौरव के भाव जगाय ल पढ़हि, अउ येकर लिये छत्तीसगढ़ के स्कूल म संविधान के प्रस्तावना के वाचन अउ महत्व पुर्न अंस के चर्चा के शुरुआत करे गेय हे। मुख्यमंतरी ये मउका म डॉ भीमराव अम्बेडर अउ सब्बो संविधान निर्माता ऊपर चर्चा घलो करिन। हमर महान नेता रास्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अब्दुल कलाम अउ डॉ. भीमराव अम्बेडकर जइसे मनिसि मन कहिन कि हमर देस संविधान ले चलहि। भूपेश बघेल कहिन कि हमर संविधान के निर्माण म देस के हर वर्ग, हर समाज अउ हर छेत्र के विचारक, चिंतक अउ विधि विशेसज्ञ के भूमिका रहिन। गौरवसाली संविधान बनाय के बाद येला 26 नंवबर 1949 म संविधान सभा येला अंगीकार करिस। येकर सेती आज के दिन संविधान दिवस कहलाथे अउ 26 जनवरी 1950 के येला लागु करे गिस। मुख्यमं तरी कहिन कि संविधान के रचना उदारता के साथ करे गेय हे येमा संविधान निर्माण प्रक्रिया म सामिल सब्बो लोगन के अंतस के बात ल जोड़े गेय हे। संग म अवइया पीढ़ हि अउ सब्बो लोगन ल ये संविधान जोड़ के राखे रहि। मुख्यमंतरी कहिन कि हमर संविधान के विसेसता हे कि येला भारत के लोगन मन खुद बनाइस अउ खुद ल समर्पित करिन। भूपेश बघेल आखिर म संविधान के प्रस्तावना के पाठ करिन।
किसान अउ मजदूर देस के नीव

किसान अउ मजदूर देस के नीव

15-May-2021
किसान अउ मजदूर देस के नीव हे, ईंखर हित के रक्षा जरूरी हे : सांसद राहुल गांधी छत्तीसगढ़ बनथ हे देस के नवा मॉडल सांसद श्री राहुल गांधी के वर्चुवल उपस्थिति म परदेसवासी मन ला मिलिस कई सौगात किसान ल राजीव ग़ांधी किसान न्याय योजना के तिसरइया क़िस्त के रासि 1500 करोड़ रुपिया अंतरित स्वामी आत्मानंद इंगलिस मिडियम स्कूल अउ 30 नगरीय स्लम एरिया म मोबाइल हॉस्पिटल अउ लैबोटरी के शुभारंभ हमर जनकल्याण के योजना अउ उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर म रेखांकित होइस : मुख्यमंत्री श्री भूपेश छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर म लोकसभा सांसद श्री राहुल ग़ांधी के वर्चुवल उपस्थिति म राज के 19 लाख किसान के खाता म राजीव गांधी किसान न्याय योजना के क़िस्त 1500 करोड़ रुपिया अंतरित करे गिस। सांसद श्री राहुल ग़ांधी ह छत्तीसगढ़ के लोगन ल राज्योत्सव के सुभकामनाएं देवत कहिन कि किसान अउ मजदूर देस के नीव हे।ईंखर कमजोर होय ले देस कमजोर होही। सांसद ह देस वर्तमान समय म कोविड-19 के कारन मुस्किल दौर ले गुज़रत हे । अइसे समय म जोन कमजोर हे उनला ज्यादा कठिनाई होवत हे ।देस के किसान के हालत कोने ले छुपे नइये ।किसान के आत्महत्या के ख़बर लगातार आवत हे।हम किसान मजदूर के रक्षा करनी चाहिये, उनके साथ खड़ा होना चाहिये। उन कहिन की सहर के नीव अउ गाँव के नीव किसान अउ मजदूर हे। किसान अउ मजदूर कमजोर होही त पूरा देस कमजोर हो जहि। किसान अउ मजदूर के रक्षा के मतलब देस के रक्षा के संग गे संग देस के नीव तको ला मजबूत अउ भविस्य ल बेहतर बनना हे। उनमन कहिन की देस के भविष्य के नीव लइका अउ जवान हे।युवा ल बेहतर अवसर अउ भविष्य नई मिलहि त देस कमजोर होही। सांसद श्री राहुल गांधी ह छत्तीसगढ़ सरकार कोती ले किसान ,मजदूर अउ गरीब के भलाई बर सुरु करे गिस राजीव ग़ांधी किसान न्याय योजन अउ स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तारीफ करत हुए कहिन की छत्तीसगढ़ सरकार के ये तीन योजना नीव ल मजबूत बनया अउ उंखर रक्षा करय्या हे । येमा पूरा देस ल मजबुती मिलही। गांधी ह आगे कहिन की छत्तीसगढ़ ह पूरा देस ल रद्दा देखाय हे। चाहे वो किसान के मद्दद अउ जमीन के रक्षा के मामला हो, उद्योग धंधा ल बढ़ावा दे म ग्रामीण अउ युवा स्वालंबी बनाये के काम होवत हे। उन कहिन की मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के अगुवाई मंत्री -मंडल अउ सहयोगी मन के टीम पूरा विजन के संग काम करथ हे। उन कहिन की देस म छत्तीसगढ़ नवा माडल राज बनत हे। किसान ,आदिवासी के हित के रक्षा अउ बेहतर शिक्षा के व्यवस्था करके युवा के भविष्य ल गढ़े के काम छत्तीसगढ़ राज म होवत हे।उन मन छत्तीसगढ़ सरकार ह राज इंगलिस मिडियम स्कूल सुरु करके आर्थिक रूप ले कमजोर परिवार के लईका अउ युवा ल भी अंग्रेजी माध्यम म शिक्षा सुलभ कराये हे। सांसद श्री राहुल गांधी कहिन की छत्तीसगढ़ यूनिक स्टेट हे ,इन्हा जल ,जंगल, जमीन अउ प्राकृतिक सम्पदा भरपूर हे।छत्तीसगढ़ गरीब नई ये ।,जनता गरीब हे।मोल खुसी ह की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व म हमर सरकार ह ये सब विसंगति मन ल दूर करके ,पूरा प्रतिबद्धता ले काम करहि ।उनमन कहींन की छत्तीसगढ़ के राशि इंहा के लोगन के बेहतर अउ छत्तीसगढ़ के नवा विजन के संग आगे ले जाना खर्च करे जाही ।उन मन कहिन की ये लक्ष्य के दिशा म सरकार अउ उंखर पूरा टीम एक साथ मिलके काम करत हे । कार्यक्रम ल संबोधित करत हुव मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ह छत्तीसगढ़ राज के 21 वा स्थापना दिवस के सब्बो प्रदेशवासि मनला बधाई अउ सुभकामनाएं दिन। श्री बघेल ह कहिन की हम सब के पिछड़ेपन अउ असंतुलित विकास ल दूर कर छत्तीसगढ़ के आम लोगन के भावना के अनुपुर विकास करे के छत्तीसगढ़ राज के निर्माता के सोच के अनुपुर काम करके हम सफल है। हमन पाछु 22 महीना ले अइसे योजना मन के क्रियान्वयन करे हन। जेहर से मूल म छत्तीसगढ़ के गरीब, किसान, वनाश्रित, अनुसूचित जाति अउ पिछड़े लोगन के उत्त्थान ह।इन योजना के सफल परिणाम सब्बो झेत्र म अब अब साफ तौर म दिखाई देवत हे । रोज़गार उपलब्ध, कृषि उत्पादन, भू-जल स्तर म वृद्धि ,स्वच्छता, व्यापारिक अउ अद्द्योगिक छेत्र , जिसटी के आंकड़ा ,उत्पादन आदि म हमर सफलता राष्ट्रीय स्तर म रेखांकित होवत ह।आदिवासी झेत्र म संचालित पोसक ,स्वस्थ, शिक्षा अउ रोज़गार के योजना मन के सफलता के प्रसंसा नीति आयोग अन्य नीति निर्माता संस्था मन करिन ह।
एक सच्चा कोरोना वारियर जऊन सबला बीमारी ले बचाय बर निभावत हे अपन कर्तव्य

एक सच्चा कोरोना वारियर जऊन सबला बीमारी ले बचाय बर निभावत हे अपन कर्तव्य

15-May-2021
एक सच्चा कोरोना वारियर जऊन सबला बीमारी ले बचाय बर निभावत हे अपन कर्तव्य .विष्णु वर्मा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी रायपुर, दुनिया वाले मन के नजर म ये काम बहुत छोटकन हे, फेर ये छोट कन काम ल कोनो अपनाना नइ चाहए। सबो ये काम ले दूरिहा भागना चाहथे। कोनो-कोनो जे मन एला अपनाए हें, ये उंखर मजबूरी ये, पेट पाले के, परिवार पाले के। वइसे तो कोनो काम छोटे या बड़े नइ होवय, फेर ये कलजुग ये। इहां हर काम के कीमत होथे, अऊ जिहां कीमत होथे, उहें वो काम या चीज के फरक छोटे या बड़े म आंके जाथे। ये काम घलोक अपन कीमत के सेती छोटे हे। द्वापर जुग म एक कन्हैया रहिस जऊन बंसरी बजात रहिस, दुखिया मन के दुख-दरद दूर कर देत रहिस। अब कलयुग ये अऊ इहां मनखे के रुप म कइ झन कन्हैया हें। अइसनहे एक कन्हैया हे जऊन बंसरी त नइ बजावय, फेर ओखर सीटी रोज बाजथे। उहू सैकड़ों मनखे के दुख-दरद दूर करथे। दरअसल ये कन्हैया एक सफाईकर्मी ये अऊ रोज मनखे मन के घर के कचरा उठाके सबला बीमार होए ले बचाथे। वो ह बचपन ले ही ठीक से बोल नइ सकय, ठीक ले चल नइ सकय, ये कन्हैया अपन मेहनत अऊ स्वाभिमान के बलबूता म बहुत मनखे मन बर प्रेरणा अऊ आदर्श तको बन सकत हे, जेमन शारीरिक रूप ले सही सलामत हें। छत्‍तीसगढ़ी-हिन्‍दी आनलाईन शब्‍दकोश सफाईकर्मी कन्हैया के भागदौड़ के शुरुआत सूरुज निकले के पहिलीच शुरु हो जाथे। अपन रिक्शा लेके गली-मुहल्ला म घुसतेच गर म ओरमाए सीटी मुंह म आ जाथे। जोर-जोर से सांस भरत वो अइसन सीटी बजाथे, के पारा-मुहल्‍ला के घर के मनखे सावचेत हो जाथें। ये बेरा म चाहे कतको बड़का काम काबर न होवय? कन्हैया के सीटी के आगू सब काम छोटकन हो जाथे। सब काम छोंड के मनखे मन घर के दरवाजा खोलथें अऊ कन्हैया के रिक्शा म अपन घर के मुसीबत ल कचरा के रूप म वोकर रिक्‍शा म डार देथें। घर म सकलाए कचरा के मतलब तो उही घर वाला जानथे जे ह अपन घर ल साफ-सुथरा रखना चाहथे। एक दिन के भीतरेच जमा होए कचरा म खान-पान के अपशिष्ट के अलावा न जाने अऊ कतका अपशिष्ट अऊ अनुपयोगी समान होथे जे ह समय के संग घर म परेशानी के सबब बन जाथे। कन्हैया रोज सबके घर ले गीला अऊ सूखा कचरा उठाके मनखे मन के परेशानी ल दूर कर देथे। ये बीच घर म मौजूद गंदगी कन्हैया के रिक्शा म चल देथे अउ स्‍वच्‍छता के संग घर म खुशी के एक लहर छा जाथे। छत्‍तीसगढ़ी-हिन्‍दी आनलाईन शब्‍दकोश कन्हैया रोजेच रिक्शा ले घूम-घूम के टाटीबंद ले लगे कबीर नगर के करीबन 200 घर मन के कचरा उठाथे। भिनसरहा 7 बजे ले मंझनिया 2 बजे तक वो ह अपन डयूटी म पूरा ईमानदारी अपनाथे। लड़खड़ात जुबान अऊ चाल ओखर जिंदगी के हिस्सा ये। हो सकत हे ये कोनो बीमारी होही। कोरोना संक्रमण के दौर म बखूबी अपन दायित्व मन ल निभात कन्हैया ह कोरोना के डर ले कभू खुद ल कचरा उठाए के काम ले अलग नइ करिस। ओखर शारीरिक परेशानी घलोक कभू आड़े नइ आईस। वो कहिथे घलोक के बचपन ले ही मेहनत करइया ल भला रिक्शा खींचे म का परेशानी आही? छत्‍तीसगढ़ी-हिन्‍दी आनलाईन शब्‍दकोश खैर कन्हैया तो कलयुग के कन्हैया ये। बचपन ले ही वोकर पिता के साया उठ जाय के बाद सिरिफ 14 साल के उमर ले ही दुख के बीच वो ह जीना सीखे हे। आज वो 28 साल के हे अऊ घर-घर जाके रिक्शा खींचत, कचरा उठात वोजा 5 साल हो गे हे। वो कहिथे के कोनो मनखे कोनो के संग नइ देवय। अपन मेहनत अऊ स्वाभिमानेच ह सब कुछ ये। पिताजी के रहत ओ हर पांचवीं तक पढ़ाई करिस, फेर वोखर मौत के बाद ओला मजबूरन काम करना परिस। घर म ओखर माता हे, जऊन मजदूरी करथे। एक छोटे भाई अऊ बहिनी घलोक हे जऊन घर म रहिथे। छत्‍तीसगढ़ी-हिन्‍दी आनलाईन शब्‍दकोश कन्हैया के बताती कोरोना संक्रमण के पहिली सीटी के अवाज सुनके मनखे मन घर के बाहिर आत रहिन, कचरा रिक्शा म डाले के संग कुछ गोठ-बात घलोक कर लेत रहिन। फेर अब अइसन नइ ये। सीटी बजाय के बाद मनखे सावचेत त हो जाथे फेर कचरा ल दूरिहा ले ही फेंकत बिना कुछ बोले चुपचाप घर म घुसर जाथें। कन्हैया बताथे के अधिकांश मनखे कोरोना संक्रमण के डर ले वोखर ले बात नइ करना चाहत होही, एकरे सेती उहू चुपचाप अपन काम करत निकल जाथे। रोजेच अपन घर के कचरा कन्हैया के रिक्शा म डरइया श्रीमती वीणा देवी कहिथे के कोरोना महामारी जइसे संकटकाल म कोनो अनजान त दूर अपन चीन-पहिचान ले हाथ मिलाए म परहेज करइया मनखे कन्हैया जइसे सफाईकर्मी के परवाह शायदेच करत होहीं। कम पगार म अपन परिवार के खरचा उठाके एक जिम्मेदार नागरिक के परिचय देवइया कन्हैया बहुत झन के समस्या मन ल भले पइसा कमाए के खातिर दूर करे हे फेर ये तको सत ये के काकरो घर के गंदगी ल साफ करना अऊ ओ मन ल राहत देना कोनो आसान काम घलोक नइ हे। हम ये कलयुग म लापरवाही के किस्सा बहुत देखथन। मनखे जिम्मेदार पद म होत घलोक अपन जिम्मेदारी के निर्वहन नइ करयं। अइसन म कन्हैया वो कोरोना वारियर ये जऊन ह, सबके मुसीबत ल दूर करत हे। हमला घलोक चाही के समाज म एक अलगेच भावना ले देखे के जगा कन्हैया जइसे सफाईकर्मी मन के रिक्शा म कचरा डारत बेरा उंखर से दूरिहा ले ही सहीं, कुछ घरी बात करके उंकर सुख-दुख जान तो लन, ताकि हमर घर साफ-सुथरा रहय अऊ कोनो बीमारी झन फइलय। इंकर मन संग दू बानी मीठ बोले ले इंकरो हिम्‍मत बाढ़ही अउ हम करोना जइसे महामारी ले लड़े के हिम्‍मत जुटा पाबोन
स्टील उद्योग बर छत्तीसगढ़ के नीति सबले बने

स्टील उद्योग बर छत्तीसगढ़ के नीति सबले बने

15-May-2021
स्टील उद्योग बर छत्तीसगढ़ के नीति सबले बने बस्तर के विकास ले ही बस्तर के समस्या के समाधान होही । स्टील सेक्टर के उद्योग बर रॉ मटेरियल कमी नई होवय । बस्तर अंचल म उद्योग के स्थापना बर पर्याप्त शासकीय जमीन हावय । राज्य सरकार कोती ले स्टील सेक्टर म दे गे छूट ले लाभ ज्यादा ले ज्यादा उद्योगपति मन उठावत है , मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह उद्योगपति मन ले बस्तर म स्टील सहित खाद्य अउ लघुवनोपज प्रसंशकरण उद्योग म निवेश करेके आहवाहन करिन । मुख्यमंत्री श्री बघेल इंहा अपन निवास कार्यलय म छत्तीसगढ़ स्टील एवं सपंज आयरन उत्पादन संघ के प्रतिनिधि मंडल ले चर्चा करिन । प्रतिनिधि मंडल ल प्रदेश म स्टील उद्योग बर सबके अच्छा निति लागू करे बर मुख्यमंत्री ल बधाई अउ शुभकामनाएं दीन । ये नीति ले नवा निवेश आकर्षित करे म मदद मिलहि । संघ के प्रतिनिधि ह कहिन की राज सरकार कोती ल स्टील उद्योग ल प्रतिस्पर्धा म टीके रहे बर ऊर्जा प्रभार में दे गए छूट ले ये सेक्टर म 85 प्रतिसत उद्योग ल सुरक्षा मिलहि। लोकडौन म उद्योग के संचालन बर दे गए छूट के प्रति आभार प्रकट करिन । प्रतिनिधि मंडल कहींन कि 8 अक्टूबर 2020 के दिन अव्याया समय म स्टील डे के रूप म याद करे जहि । स्टील उद्योग म नवा घोसडा ले नवा उत्साह आही ।स्टील उद्योग ल जीयसटी अहम योजना है। पाछु 10 बच्छर म प्रदेस म कोनो नवा स्टील उद्योग चालू नई होय हे ।स्टील उद्योग ल दे गए रियायत के फलस्वरूप राज म नवा स्टील चालू नई होय हे ।स्टील उद्योग ल दे गए रियासत के फलस्वरूप राज म नवा कई इकाइयों सथापित होही।
छत्तीसगढ़ी भाषा ल बढ़ावा देना हे -मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ी भाषा ल बढ़ावा देना हे -मुख्यमंत्री

15-May-2021
छत्तीसगढ़ी भाषा ल बढ़ावा देना हे -मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी भाषा ल बढ़ावा देना हे मुख्यमंत्री ह कहिन छत्तीसगढ़ी भाषा के जतेक सेवा करबो ,जतका उपयोग करबो अउ प्रचार करबो , ओतना हमर संस्कृति अउ भाषा के विकास होही ।बजार अउ कंपनी ला तको छत्तीसगढ़ी म गोठ बात करना चाही । मुख्यमंत्री कहिन की छत्तीसगढ़ी ल आठवी अनुसूचि म शामिल करें बर विधानसभा म संकल्प पारित कराके, केंद्र सरकार ला भेजे गे हे ।हम अपन ताकत ले छत्तीसगढ़ी भाषा ल अगुवा बना सकथन ।।।
सुरतांजलि

सुरतांजलि

15-May-2021
दाऊ रामचंद्र देशमुख के मिशन ‘चंदैनी गोंदा’ म खुमान लाल साव जी के भूमिका : सुरतांजलि पुरखा के सुरता जन मन के गीत ल जन-जन के अंतस म उतारने वाला महान संगीतकार खुमान साव अब हमर बीच नइ रिहिन। 5 सिंतबर 1929 के अवतरे खुमान लाल साव जी ह 90 बच्छर के उमर म 9 जून 2019 के ये दुनिया ल छोड़ दिस अऊ जावत-जावत हारमोनियम अउ तबला के संगत म सबला रोवावत कहिगे- “माटी होही तोर चोला रे संगी, माटी होही तोर चोला...।” सिरतोन म ये चोला माटी के तो आए अउ सबला एक दिन दुनिया छोड़ उही माटी म जाना हावय। फेर ये नश्वर दुनिया म उंकरे अवई ह सार्थक होथे जेन जावत खानी अपन काम के बुति जबर नाम छोड़ जाथे। लोक संगीत के दुनिया म खुमान लाल साव जी एक अइसे नाम आए जेन ल जन-जन जानथे। साव जी ये मुकाम तक पहुंचे बर गजब मेहनत करे हावय, 14 बच्छर के नान्हे उमर म संगीत के लगन ह उनला नाचा पेखन ले जोड़ दिस। दाऊ मंदराजी के रवेली साज के अलावा अऊ कतकोन नाचा पार्टी, आर्केस्टा उक म अपन संगीत के धाक जमाईस। साव जी आन-आन संगीत समिति ले जुड़े बर तो जुड़िस फेर ओकर मन ह तो छत्तीसगढ़ के लोक संगीत बर कुछ ठोस काम करने बर मनन करते राहय, ठउका उही बखत दाऊ रामचंद्र देशमुख जी ह उनला अपन संस्था म शामिल करिस अउ फेर ताहन शुरू होइस मिशन चंदैनी गोंदा। साव जी ह अपन बारे म कहाय कि जब मैं दाऊ रामचंद्र देशमुख जी संग जुरेव तव कई महीना ले अपन घर-दुवार, खेती-खार, परिवार सब ल छोड़के संगीत के कठिन साधना करेवं। 14 बच्छर के उमर ले सुरू होय संगीत साधना के सफर ह अंतिम सांस तक जारी रिहिस। अऊ ये कला यात्रा म धुप छॉव सही कतकोन दुख-सुख उंकर आगू आइस जेकर ने लड़के छत्तीसगढ़ी लोककला मंच के सर्जक दाऊ रामचंद्र देशमुख जी के बाद चंदैनी गोंदा के सियानी पागा बांधे दाऊ जी के सपना ल पूरे करे म कोनो कसर नइ छोड़िन। कला के प्रति समर्पण ल देखत लोक संगीतज्ञ खुमान साव जी ल हम छत्तीसगढ़ी कला संस्कृति अउ साहित्य के क्रांति युग 1971 के आखरी महारथी कहि सकथन। अऊ अब उंकर जाए ले माने एक युग सिरागे। साव जी घलोक दाऊ रामचंद्र देशमुख के सानिध्य म छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़िया के अस्तित्व अउ अस्मिता के बात अपन गीत-संगीत अउ गम्मत के माध्यम ले आम जनता के बीच राखे के प्रयास करय। गुनी जन मन कहिथे कि दाऊ रामचंद्र देशमुख के चंदैनी गोंदा सिरिफ सांस्कृतिक संस्था भर नइ रिहिस भलुक एक मिशन रिहिस छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़िया मनके अस्तित्व अउ अस्मिता जागाए के। जेमा खुमान लाल साव जी के भी अहम भूमिका रिहिसे। अतका साल बाद अब अइसे लगथे कि दाऊ जी के सपना ह साकार रूप लेवथे। गांव-गांव म छत्तीसगढ़ी कला, संस्कृति अउ साहित्य के संस्था बनगे हावय। अलग छत्तीसगढ़ राज बनगे। छत्तीसगढ़ी म गीत, गजल, कहानी, बियंग, उपन्यास सबे कुछ लिखे जावथे। वइसे दाऊ रामचंद्र देशमुख जी ल देखे के सौभाग्य तो नइ मिलिस हमला फेर जतका उनला पढ़े हाबन ते मुताबिक इहिच तो सपना रिहिस दाऊ जी के जेन ल पुरा करे खातिर खुमान साव जी ल अपन संग जोड़ के मिशन चंदैनी गोंदा के माध्यम ले छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी कला संस्कृति अउ साहित्य के अलख जगाइस। दाऊ जी के अधुरा सपना ल खुमान साव जी ह पूरा होवत अपन नजरभर देखे हावय अउ ओमन सरग म जाके ये सब बात ल उनला जरूर बताइन होही। अलग छत्तीसगढ़ राज बने के बाद कई बार चंदैनी गोंदा के कार्यक्रम देखे के अवसर मिलिस। गजब के प्रस्तुतिकरण रिथे, शहर म तो एके दू घंटा के होथे पर असल आनंद तो गांव के मंच म रातभर देखे ले आथे। लगभग 30-40 कलाकार के दल ल अतका साल तक चलाना साव जी के कुशल नेतृत्व क्षमता ल दर्शाथे। चंदैनी गोंदा के कार्यक्रम जेन भी गांव म लगे होही ओमन साव जी के बेवहार ले भी वाकिफ होही। गांव के लोगन जब कार्यक्रम लगाये बर जाथे तो साव जी आगूच म रट-रट माने सोज-सोज बात करय, अतका कन देबे, एदइसे-एदइसे कार्यक्रम होही अउ गांव म तै अइसन बेवस्था बनाके राखबे। साव जी साफ-साफ बात करय भले सामने वाला ल लगय के सियान ह कड़ा जुबान के हावय फेर साव जी तो साफ अउ नेक दिल के स्वाभिमानी व्यक्ति रिहिसे। उन जीवन म कभु अपन स्वाभिमान संग समझौता नइ करिन। स्वाभिमानी अउ सिद्धांतवादी साव जी अनुशासन के पक्का रिहिसे जेन गांव म भी कार्यक्रम लगय उहां कोनो भी विकट परिस्थिति होवय पहुंचय जरूर। चंदैनी गोंदा के अलावा अउ कोई संस्था छत्तीसगढ़ शायद ही होही जेमा 30-40 हजार के दर्शक जुटत होही। अतका भीड़ ल संभालना अउ रातभर मंच ले जोड़े रखना साव जी के कुशल निर्देशन क्षमता अउ प्रतस्तुतिकरण के ऊंचाई ल दर्शाथे। 21 वीं सदी के भारत म पुरातन छत्तीसगढ़ के लोकरंग के अमिट छाप छोड़ना चंदैनी गोंदा के मिशन अउ खुमान साव जी मेहनत ले ही साकार होइस। मिशन चंदैनी गोंदा के कारण ही आज छत्तीसगढ़ के लोक कला कहा ले कहा पहुंचगे हावय। केहे जाथे कि छत्तीसगढ़ के लोक जीवन म कला, संस्कृति अउ साहित्य ह तइहा समे ले अब तक वाचिक परंपरा म संरक्षित हावय। जुन्ना सियान मन भलुक आखर गियान कोति चेत नइ करिन फेर अपन परंपरा अउ संस्कृति के सरेखा करे के बड़ सुघ्घर उदिम करिन किस्सा-कहिनी अउ गीत-गाथा के रूप म अपन लोक कंठ म सहेजे के। पीढ़ी दर पीढ़ी उही लोक कला-संस्कृति अउ साहित्य ह आज मौखिक ले लिखित युग तक पहुंचगे हावय अउ ये समयांतराल म बखत के कतकोन धुर्रा माटी के लबादा ह उनला प्रभावित करे के कोशिश म लगे रिहिस तभे देवता सहीं छत्तीसगढ़ के माटी म दाऊ दुलार सिंह मंदराजी अउ दाऊ रामचंद्र देशमुख के बाना उचइया खुमान लाल साव जइसन व्यक्तित्व के जनम होइस। खुमान साव जी ह अपन जीवन भर लोक म बगरे गीत कर्मा, ददरिया, सुवा, गउरा-गउरी, भोजली, पंथी, फाग, जसगीत, बिहाव गीत, सोहर गीत के अलावा अऊ आन पारंपरिक गीत मनला संकलित करके ओला नवा साज संगत म पिरो के मौलिकता के संग लोकप्रिय बनाये के जबर बुता करे हावय। एक तरह से केहे जाए तव छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकगीत मन खुमान साव जी के संगीत ले नवा जीवन पाइस नहिते आधुनिकता के बरोड़ा अउ पाश्चात्य संगीत के प्रभाव ह जीलेवा हो जतिस। उकरे मेहनत के परसादे आज घर-घर म चंदैनी गोंदा के गाना बाजथे अउ ओकर गीत बिगर तो कोनो नेंग-जोग पूरा नइ होवय। बिहाव संस्कार के गीत ल ही देखव ना एक डहर दफड़ा, दमउ अउ मोहरी म चुलमाटी, तेलमाटी, मायन भड़उनी, टिकावन अउ बिदाई गीत बाजत रिथे अउ दूसर कोति दाई-माई, ढेड़हिन सुवासिन मन बिहाव के नेंग-जोग करत रिथे। छट्टी छेवारी आगे अब सोहर गाना हावय तव चंदैनी गोंदा के गीत बजाव। परंपरा के निर्वाह अउ धार्मिक अनुष्ठान बर पंथी, गउरा गउरी, सुवा, जसगीत, फाग, राउत नाचा अऊ उच्छाह मंगल बर कर्मा, ददरिया के लोकधुन। चंदैनी गोंदा अउ खुमान साव के ओढ़र म आज भले हम लोकगीत के बात करत हन फेर येमा छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति अउ साहित्य तको समाय हाबे। कला संस्कृति संग साहित्य घलो मिशन चंदैनी गोंदा के हिस्सा रिहिसे। आज के समे म हमर युवा पीढ़ी ह मौखिक ले लिखित परंपरा म आगे हावय तव हमरो जिम्मेदारी बनथे कि अपन पुराखा के करनी करम के सरेखा करन जेकर ले हमर अवइया पीढ़ी तको 1927 अउ 1971 के छत्तीसगढ़ी कला संस्कृति अउ साहित्य के पुरोधा मनके योगदान ल सुरता राखे राहय।
छत्तीसगढ़ी कथा -डॉ सत्यभामा आडिल

छत्तीसगढ़ी कथा -डॉ सत्यभामा आडिल

15-May-2021
छत्तीसगढ़ी कथा -डॉ सत्यभामा आडिल अपन-अपन भाग मेटावरहिन सहर मं बसगे । घरवाला पटवारी रहिस । रिटायर होईस तव गांव के खेतीखार ल बेचके सहर तीर मं चार एकड़ खेरा खरीदिस अऊ बड़े पक्का मकान सहर के बीच मं बनईस । चार कुरिया नीचे,चार कुरिया ऊपर । नीचे ऊपर बाथरूम,लेट्रिन,अंगना छत। बीचो बीच सीढ़िया । ऊपर दू झन किरायादार। तीन बेटा अऊ एक बेटी संग पटवारी अऊ मेटावरहिन नीचे रहांय। छोटे बेटा दूसर मं डाक्टरी पढ़त रहय । दू बेटा के विहाव करिस, तीसर बेटा के आंख लड़िस,सामने घर के लड़की संग,अऊ उढ़रिया भाग गे। ओला लेके पटवारी मूंड़ धर के बईठगे । पटवारी पईसा के मनखे ए। अपन कमईस,फेर लईका मन के मकई ल धरथें। एक झन भाग गे, त दू बेटा बहू,घर मं ,बहू मन के हाथ मं पईसा नई रहय। बड़े बहु के तीन बेटा,दूसर बहू के लईका नई होए रहय, चार बछर होेगे बिहाव होय। ‘‘लईका नई होवय ठगड़ी के ‘‘ -अइसने गारी दय ससुर ह । बात - बात मं ‘‘घर ले निकल जा‘‘ कहाय । बेटा कमती बोलईया । एक दिन सिरतोन मं बेटा ह बहू संग रेंग दिस । बड़े बेटा के तबादला दूसर सहर मं होगें। ऊहू इ लईका मन संग रेंग दिस। पटवारी अऊ मेटावरहिन अकेल्ला होगें । ऊहू ह लईका मन संग रेंग दिस । बड़े बेटा के तबादला दूसर सहर मं होगे। एक बछर बीतीस तहाॅं ले बड़े बेटा के दू झन बेटा ल ले अईन। कोरा मं खेलत तीसर बेटा ल बहू करा छोड़दिन। एक दिन अईसन होईस कि बड़े बहू ह कोरा के लईका ल छोड़ के दूसर संग उढ़रिया भाग गे। बेटा ह लईका ल मां बाप करा छोड़िस अऊ घर जा के फांसी लगालिस। बहू के चालचलन पहिलीच ले बने नई रिहिस। दूसर बहू ह छोटे लईका ल ‘‘गोद लेंहू‘‘ कहिके मांगिस । ससुर ह ओला ‘‘ठगड़ी ‘‘ कहिके फेर गारी दिस । लईका ल नई दिस। पटवारी के डाक्टर बेटा अऊ बेटी के बिहाव होईस। दूसर बेटा बहू ल नई नेंवनिस।‘‘ठगड़ी के नजर झन लागय‘‘-कहिके पटवारी ह सबो परिवार वाले मन ल चेता दिस। डाक्टर ह बिहाव करके चल दिस। बेटी चलो नौकरिहा पति संग चल दिस। ये बिहाव के बछर भर बाद,दूसर बहू के पांव भारी होगे। ‘‘ठगड़ी के बेटा होगे ‘‘रऊतईन करा सुनके घलो पटवारी ह देखेबर नई गिस। हां,मेटावरहिन ल लुकाके कपड़ा लत्ता लेके , देखेबर गिस। रऊतईन संग बहू बेटा के घर गिस। ओखर बनाये घर दुवार अऊ अपन नवा बंस ले देखके खुसी मं रो डारिस। सेंकिस-चुपरिस अऊ बहू ल घलो मया करके लुगरा,काजु,किसमिस, बदाम दिस खाय बर। बेटा ह महतारी बर नवा लुगरा लानिस। दू घंटा सरग नहीं बीतिस। मेटावरहिन पटवारी के डर मं चल दिस आंसू पोंछत,असीस देवत। मां के असीस घर मं फलिस फूलिस। बेटा कालेज में पढ़ावत रहिस। भर संास लेके,असीस देके लहुटत महतारी ल जी भर के देखिस। दूसर दिन ओ घर के रऊतईन,दऊड़त बताय बर अईस - मां के धड़कन खतम होगे। पटवारी ह चिल्लावत हे ‘‘ठगड़ी ठगड़ा ल कोनों झन बलाहु, ऊंखर मुंह नई देखंव, हमर बडे़ नाती हे आगी देहीं- डाक्टर घलो नई आही त ? ‘‘का किबे,चुपचाप बताय बर आए हंव अपन होके । नई गिन बेटा बहु मन। बहू के मन पानी देस के होईस , फरे दसगात्र अऊ तेरही घलो मं चिल्ला-चिल्ला के कहाय--‘‘निरबंसी मन के छांव नई देखंव,घर के हिस्सा नई देवंय। अऊ दसगात्र मं पगबंधी के बेरा-अपन पगबंधी करईस । बड़े बेटा के तीनों लईका मन ला बेटा के मरे के मिले पईसा नई दिस। बड़े नाती के अनुकंपा नियुक्ति होगे रहसि। पईसा ल पोटारे बुढवा,अकड़बाज पटवारी तीन महिना पाछू खतम होगे। डाक्टर अईस,भाई ल खबर भेजिस--‘‘आगी देही‘‘ नई गिस भाई ह । ‘‘पगबंधी करहीं‘‘, नई गिस भाई ह । ओ घर ले रिस्ता टोरिच् , त टोरी दिस। बाप ल न आगी दिस, न बंटवारा लिस। दूसर भाई ह जबर के जिद ठाने रिहिस। बेटा ह पांचवी मं रिहिस- एक दिन मोटर एक्सीडेंट मं दूसर भाई खतम होगे। डाक्टर अईस । सब काम करिस खुद होके। भऊजी ल कहिस-‘‘मंय ओ घर के बंटवारा दुहं-ऊहें दू कुरयिा मं रहव। ये मकान ल किराया में दे दव। जादा किराया आही।खरचाा चल जही।‘‘ फेर भऊजी नई मानिस- ‘‘तुंहर भईया,बाप के जायदाद ल नई छुंवव केहे रहिन। मंय बंटवारा नई लेवंस। ‘‘ ‘‘ये कईसे हो सकथे भऊजी पैतुक संपत्ति सबके होथे। मंय कमान ल बेचवाहूं। पईसा बांटहूं अउ एक एकड़ खेत ल मोर भजीजा के नांव मं चढ़ाहूं । ‘‘डाक्टर कहिस । भऊजी ल मनईस। ‘‘तोर दस्तखत बिन ए मकान बिकय नहीं,दस्तखत करेच् ल पढ़ही । मंय झगरा के जर ल खतम करके डयूटी मं जाहूं। भऊजी मजबूर होगे। भगवान मं दीया जलईस अऊ दस्तखत करिस। फटाफट मकान बिकगे। भगवान मं दीया जलईस अऊ दस्तखत करिस। फटाफट मकान किबगे । बढ़िया बेपारी लेवाल मिलगे। एक भाग पईसा,चार लाख रू. भऊजी ल देके कहिस -‘‘ए भतीजा के भाग के पईसा ए भऊजी, ऊपर वाला के मरजी ए । एक एकड़ खेत के धान चाऊॅंर तुमन खाहू। खेत रेगहा लवईया ल मंय ह चेता देय हंव। घर आके फसल के पईसा देहीं। भऊजी ह जी भर के डाक्टर देवर ल देखिस,मानों सग भाई खडे़ हे। सग भाई ह तो कुछु नई दिस,अऊ देवर ह सब दे दिस। अपन - अपन भाग । भगवान के नियाव ऊपर बिसवास होगे।
राम वन गमन पर्यटन परिपथ के काॅन्सेप्ट प्लान तइयार

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के काॅन्सेप्ट प्लान तइयार

15-May-2021
राम वन गमन पर्यटन परिपथ के काॅन्सेप्ट प्लान तइयार छत्तीसगढ़ के पर्यटन विभाग ह तइयार करिस 137.45 रूपिया के काॅन्सेप्ट प्लान श्राम राम वन गमन पर्यटन परिपथ म विकसित करे जाही चयनित नौ स्थान मुख्यंमत्री श्री भूपेस बघेल ह केन्द्रीय पर्यटन राजमंत्री श्री प्रहलाद पटेल ला चिट्टी लिख के उनला छत्तीसगढ़ म राम वन गमन पर्यटन परिपथ ला विकसित करे बर तइयार किए गे हे काॅन्सप्ट प्लान ला केन्द्र सरकार के स्वदेस दर्सन योजना के तहत स्वीकृति प्रदान करे के आग्रह करे गिस। छत्तीसगढ़ म राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकसित करे बर छत्तीसगढ़ के पर्यटन विभाग कोति ले 09 स्थान के चिन्हा करके 137करोड45 लाख रूपिया के लागत के कान्सेप्ट प्लान तइयार करे गे हे। केन्द्र सरकार के स्वदेस दर्सन योजना के अंतर्गत पर्यटन के चयनित परियोजना मन में पर्यटक मन के सुविधा बर विष्वस्तरीय अधोसरंचना विकसित करे के प्रावधान हें। मुख्यमंत्री ह केन्द्रीय पर्यटन राजमंत्री ल चिट्टी म लिख के छत्तीगढ़ के इतिहास प्राचीन होए के साथ प्रसस्त तको हे । ़़त्रेतायुग म छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम दक्षिन कोसल अउ दण्डकारनय के रूप् म विरूयात रहिस। दण्डकारनय म भगवान श्रीराम के वन मगन यात्रा के पुष्टि वाल्मीकि रामायन म हे। सोधकर्ता ले प्राप्त जानकारी,सोध लेख अउ पुस्तक के अनुसार प्रभु श्रीराम के डहार ले अपन वनवास काल के 14 बघ्छर म से लगभग 10 बच्छर स ेले भी ज्यादा समय छत्तीसगढ़ म गुजारिस जिखर जानकारी इंहा के लोकगीत म देखे जा सकत हे। श्री बघेल ह कहिन कि प्रभु श्रीराम क उत्तर भारत ले छत्तीसगढ़ म प्रवेस के बाद आने -आने स्थान म चैमासा दीन काटत दक्षिन पथ तको कहे जात रिहीस। छत्तीसगढ़ म कोरिया जिला के बावाई नदी ले होकर सीतामढ़ी हरचैका स्थान म प्रभु श्रीराम ह छत्तीसगढ़ म प्रवेस करिन । ये दौरान उन मन 75 स्थान के भ्रमन करत सुकमा जिला के रामाराम ले दक्षिन भारत म प्रवेस करिन। अतका स्थान म 51 स्थान अइसे हे। जिंहा प्रभु श्रीराम ह भ्रमन के दौरान रूक रूक के समय बिताए रिहीस। जेखर जानकारी सोधकरता मन के सोध आलेख ले होथे । छत्तीसगढ़ सरकार कोति ले राम वन गमन पथ के पर्यटन के नगर ले विकास के योजना म काम करे जात हें। जेखर उद्देष्य राज म आने वाला पर्यटक,आगन्तुक के संग संग देस अउ राज के लोगन ल भी राम वन गमन मार्ग अउ स्थान ले परिचित कराना ये ऐतिहासिक स्थान के भ्रमन के संगे संग पर्यटक मन ला उच्च स्तर के सुविधा भी उपलब्ध कराना हें। मुख्यमंत्री ह चिट्टी म लिखे हे कि छत्तीसगढ़ म राम वन गमन पर्यटन परिपथ ला विकसित करे के उद्देष्य ले पहिली चरम म 9 स्थान के चिन्हा करे गिस इन स्थान म सीमामढ़ी-हरचैका (कोरिया) ,रामगढ़ अम्बिकापुर ,सिवरीनारयन (जाजगींर चापा),तुरतुरिया (बलौदाबाजार),सिहावा-सत्तऋषि आश्रम (घमतरी),जगदलपुर (बस्तर),रामारासम (सुकमा) सामिल हे। राम वन गमन पर्यटन परिपथ म प्रस्तावित 9 स्थान ला लेवत हुए पर्यटन विभाग डहार ले एक काॅन्सेप्ट प्लान तइयार करे गे हे। जेखर लागत 137.45 करोड़ रूपिया हे। राम वन गमन पर्यटन परिपथ बर राज सासन कोति ले साल 2019-20 म 5 करोड रूपिया रासि अउ साल 2020-21 म 10 करोड़ रूपिया रासि के प्रावधान बजट म करे गिस। कुल रासि 15 करोड़ रूपिया राज सासन स्वीकृत करे हे। मुख्यमंत्री श्री बघेल ह केन्द्रीय पर्यटन राज्यमंत्री श्री पटेल ले छत्तीसगढ म राम बन गमन पर्यटन परिपथ विससित करे ले काॅन्सेप्ट प्लान ला स्वीकृति बर आग्रह करिन।
तिहासिक बूढ़ा तालाब ला पर्यटन स्थल बनाए बर सौन्दर्यीकरन करे जात हे।

तिहासिक बूढ़ा तालाब ला पर्यटन स्थल बनाए बर सौन्दर्यीकरन करे जात हे।

15-May-2021
तिहासिक बूढ़ा तालाब ला पर्यटन स्थल बनाए बर सौन्दर्यीकरन करे जात हे। नगरीय प्रसासन अउ श्रम मंत्री डाॅ.सिवकुमार डहरिय ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब ला धरोहर के रूप् म संरक्षित करे बर अउ लोगन ल तरीया,नदी-नाला ला साफ,रखे व सरलग साफ-सफाई बर प्रेरित करे के उद्देष्य ले श्रमदान करिन। जानबा हे कि नगर निगम रायपुर क्षेत्र के तेलीबांधा तरीया,कटोरा तालाब अऊ प्रहलदवा तरीय जईसे सहर म स्थित आन तरीया ला सौन्दर्यीकरन करना हे बल्कि नाला के गंदा पानी ला ट्रीट करके कड़ी म बूढ़ा तलाब ला भी सौन्दर्यीकरन अउ साफ-सफाई करे जात हे। जानबा हे कि तरीया के सौन्दर्यीकरन करके ऐला पर्यटन स्थल के रूप् म विकसित करे बर नगर निगम अऊ रायपुर स्मार्ट सिटी के माध्यम ले करे जात हे। हाइड्रोलिक आर्म ले जलकुंभी अउ खरपतवार ले पटे तरीया के कचरा ला नीकाले जात हे। नगरीय प्रसासन मंत्री डाॅ.डहरिया ह रापा ,कुदारी हाथ म ले के तरीया के जलकुभी अउ गाद के साफ -सफाई करिन नगर निगम रायपुर के महापौर श्री ऐजाज ढेबर,सभापति श्री प्रमोद दुबे तको श्रमदान करिन।