छत्तीसगढ़ी के दुरदसा बर जिम्मेदार कोन

छत्तीसगढ़ी के दुरदसा बर जिम्मेदार कोन

02-Oct-2018
#गोठ_बात छत्तीसगढ़ी के दुरदसा बर जिम्मेदार कोन? अलग छत्तीसगढ़ राज बन गे। छत्तीसगढ़ी ल राजभासा के दरजा मिल गे। अलग आयोग बन गे। फेर, छत्तीसगढ़ी के बिकास वइसे नइ होवत हे, जइसे होय बर चाही। छत्तीसगढ़ी माध्यम म न पढ़ई-लिखई होवत हे, न सरकारी काम-बूता। छत्तीसगढ़ी ल आठवीं अनुसूची म घलो सामिल नइ करवात हें। सुग्घर, सरल, सहज छत्तीसगढ़ी म बोले-बतियाय बर इहां के पढ़े-लिखे मनखेमन लजाथें। इही मुद्दा ल लेके गोठ-बात। #अपन_भासा_ल_बोले_बर_लजाथें छत्तीसगढ़ ह अपन भासा अउ लोककला, संस्करीति बर परसिद्ध हे। कतको बछर ले राजनीति अउ परसासनिक लड़ई चलिस हे, तब छत्तीसगढ़ी ल राजभासा के दरजा मिले हे। छत्तीसगढ़ी भासा म मया, मधुरता अउ आत्मीयता ह झलकथे। छत्तीसगढिय़ामन बहुतेच सिधवा, सरल अउ मधुर वानी वाले होथें। इहां के बिद्वानमन छत्तीसगढ़ी म अब्बड़ अकन लेख, काव्य, साहित्य, कविता, फिलिमी गाना लिखे हें। आजकल के लइकामन ह टीवी, फिलिम अउ मोबाइल के चक्कर म अपन आप ल हिंदी अउ अंगरेजी म बोलई, लिखई ल जादा बने मानथें। छत्तीसगढ़ी बोले बर लजाथें अउ हंसी घलो उड़ाथें। आज के लइकामन छत्तीसगढ़ के गौरव, संस्करीति अउ लोककला से अनजान हावंय। अइसन सबो लइकामन ल छत्तीसगढ़ी पढ़े-लिखे बर आगू लाय बर चाही। सबो छत्तीसगढिय़ामन ल अपन भासा बोले, लिखे-पढ़े आय बर चाही। अपन संस्करीति, संस्कार, लोककला, लोकगीत ल सहेज के रखे बर चाही। तभे आगू जाके छत्तीसगढ़ के मान-मरयादा ह बने रइही। छत्तीसगढ़ी के बिकास होही। छत्तीसगढ़ी म पढ़ई अउ कामबुता घलो होही। #भासाई_असमिता_जगाय_बर_परही छत्तीसगढ़ म भासाई असमिता जगाय के परयास आज तक नइ होय हे। इस्कूल म आने भासा के पढ़ई-लिखई ल सिक्छित होय के परमान माने के भावना इहां के मूल निवासीमन के मन म जर जमाय हे। छत्तीसगढिय़ेचमन छत्तीसगढ़ी ल भासा नोहय, बोली आय कहिथें। ए बताय के काम सरकार के आय के छत्तीसगढ़ी एक सामरथ भासा आय। फेर, वोहा जानबूझ के अइसन नइ करे बर चाहय। काबर के अइसन करे ले छत्तीसगढिय़ामन म छत्तीसगढ़ी असमिता जागे अउ जेन परदेसियामन कुरसी म कब्जा जमाय हें, वोकर कुरसी खसले के खतरा हे। जेन राज के मुख्यमंतरी महतारी भाखा जरूरी करे के फरमान निकालथे वोकर पूजा होय बर चाही। जइसे के कतको राज के मुख्यमंतरीमन करथें। छत्तीसगढ़ राज बने के पहिली एकझन मुख्यमंतरी ह अंगरेजी ल रातोरात जरूरी करे के कमाल देखा डरे हे। हमर मुख्यमंतरी चाहंय त उही कमाल आजो छत्तीसगढ़ी खातिर रातोरात संभव हे। छत्तीसगढ़ी माध्यम म पढ़ई-लिखई जरूरी करे बर चाही। #गरब_ले_बोलव_अपन_भासा_ल छत्तीसगढ़ी बोले बर लजाथन, सरमाथन त दूसर भासा के बोलइयामन ले हमन कइसे छत्तीसगढ़ी म बोले के आस लगा सकथन। आज छत्तीसगढिय़ामन ह मानसिकता बना ले हें के छत्तीसगढ़ी बोलइयामन ह गवांर होथें। ऐकर बर एक पैमाना घलो तय कर डारे हें के जउन ह अंगरेजी बोलथे वोहा मंडल, हिंदी बोलइया गरीब अउ छत्तीसगढ़ी बोलइया भिखमंगा। अइसन मानसिकता ह महतारी भासा बर खतरनाक आय। कहीं अइसे झन हो जाए के छत्तीसगढ़ी भासा ह नदा जही। अब बेरा आ गे हे भासा ल जतन के रखे के, तभे हमर संस्करीति अउ पहचान ह बचे रइही। आज के नेता अउ अभिनेतामन ह अपन काम साधे बर दू-चार लाइन छत्तीसगढ़ी बोल देथे। छत्तीसगढ़ी के संग अनियाय करे म छत्तीसगढिय़ामन के घलो हाथ हावय। अब तो गांव के मनखे सहर म का आ जथे, अपन महतारी भासा ल भूला जथे। गांव देहात के संगवारी मिलथे वोकरो ले छत्तीसगढ़ी म नइ गोठियाय। इहां के मनखे ह जब तक ले छत्तीसगढ़ी बोले म गरब नइ करहीं अउ अधिकार के संग नइ बोलहीं, तब तक छत्तीसगढ़ी म पोठलगहा काम नइ होवय। #अनुसूची_म_सामिल_नइ_करवात_हें आजो कतको मनखेमन ए गोठ म संसो करथें के छत्तीसगढ़ी ल बोली कहिबो त पूरा छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ी म गोठियावाय नइ अउ भाखा हे त अठ्ठारा बछर म न आयोग अउ न ही सरकार ऐला आठवीं अनुसूची म सामिल करा पाय हे। तेकरे सेती छत्तीसगढिय़ामन छत्तीसगढ़ी भ

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