रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती

12-Sep-2018
महारानी दुर्गावती रानी दुर्गावती के जन्म 5 अक्टूबर सन 1524 के महोबा मं हांय रहिस। दुर्गावती के पिता महोबा के राजा रहिस। रानी दुर्गावती सुन्दर, सुषील, विनम्र, योग्य अउ साहसी लइका रहिस। महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल के एक एके ठन एकलउतीन बेटी रहिस। बांदा जिला के कालिंजर किला मं 1524 ईसवी के दुर्गा अष्टमी के जन्म के कारण उनकर नाम दुर्गावती रखे गइस। नाम के अनुरूप वोहर तेज, साहस, अउ सुन्दर होए के कारण इनकर प्रसिद्धि सबो डहर फइल गे रहिस। दुर्गावती के मइके अउ ससुराल पक्ष के जाति अलग रहिस। तभो ले दुर्गावती के प्रसिद्धि ले प्रभावित होके गोंडवाना सम्राज के राजा संग्रामष्षाह मंडावी संग विहाव करके उनला अपन पुत्र के वधू बनाइन। दुर्भागवष विहाव के चार बछर बाद राजा दलपत षाह के निधन हो गइस। वो बेरा दुर्गावती के गोद मं तीन बछर के नरायण रहिस। वो बेरा रानी ह स्वयं गढ़ मंडला के षासन संभाले लेय रहिन। उनमन केउ ठक मठ, कुंआ, बावली अउ धर्मषाला बनवाइन। वर्तमान जबलपुर उनकर राज के केन्द्र रहिस। उनमन अपन दासी के नाम मं दासी तलाव, चेरी के नाम मं चेरी तलाव, अपन नाम मं रानी तलाव अउ अपन विष्वासी दीवान आधार सिंह के नाम मं आधार ताल बनवाइन। महारानी दुर्गावती के सुषासन के सांथ पंद्रह बछर तक गोंडवाना मं राज रहिस। बिहाव के होय ले एक बछर बाद दुर्गावती के एक पुत्र होइस। जेकर नाम वीर नारायण रखे गेइस। जेन बेरा वीर नारायण केवल तीन बछर के रहिस वोकर पिता दलपत षाह के मृत्यु हो गईस। दुर्गावती के उूपर दुख के पहाड़ टूट परिस। परन्तु वोहर बड़ा धैर्य अउ साहस के संग ये दुःख पिरा ल सहन करिस। दलपतिष्षाह के मृत्यु के बाद उनकर पुत्र वीर नारायण गद्दी म बैइठिस। रानी दुर्गावती वोकर संरक्षिका बनिस अउ राज काज ल स्वयं देखिस समारिस। उन सदैव प्रजा के दुःख सुख के ध्यान रखत रहिन। चतुरा अउ बुद्धिमान मंत्री आधार सिंह के सलाह अउ सहयोग ले रानी दुर्गावती ह अपन राज्य के सीमा बढ़ाइस। राज्य के संगे-संग वोहर साज बाज के संग अपन सेना घलव बनाइन। उन अपन वीरता, उदारता, चतुरई ले राज, नीति, एकता स्थापित करिन। गोंडवाना राज्यष्षक्ति षाली अउ संपन्न राज्य मन मं गिने जावत रहिस। जेकर ले दुर्गावती के ख्याति फइल गेय रहिस। रानी दुर्गावती के ये सुखी अउ सम्पन्न राज्य मं मालवा के मुसलमानष्षासक बाज बहादुर ह केउ बेर हमला करिस, फेर हर हर खेप वोहर पराजित होइस। रानी दुर्गावती ह अपन पहली युद्ध मं जीत के भारत वर्ष मं अपन नाम रोषन कर लेय रहिस। वीरांगना रानी दुर्गावती षेरषाह के मौत के बाद सूरत खान ह उनकर कारभार बोहस जेन वो बेरा मालवा गणराज्य मंष्षासन करत रहिस। सूरत खान के बाद वोकर पुत्र बाजबहादुर कमान अपन हाथ मं लेइस। जेन रानी रूपमती संग पे्रम करे खातिर प्रसिद्ध होय रहिस। सिंहासन मं बइठते छन बाजबहादुर ल एक महिलाष्षासक नई झेलाइस। वोला हरवाना ल चुटकी के खल जानिस। एकरे सेती वोहर रानी दुर्गावती के गोंड साम्राज्य म धावा बोल देइस। बाज बहादुर के रानी दुर्गावती ल कमजोर समझना भारी भूल परिस। इही कारण वोला भारी हार के सामना करना परिस। ओकर कतको सैनिक घायल हो गइन। बाज बहादुर के खिलाफ ये जंग मं जीत के कारण पास परोस के राज्य मं रानी दुर्गावती के डंका बाज गईस। अब रानी दुर्गावती के राज्य ल पाय के हर कोई सपना देखे लगिन। जेन मं एक मुगल सूबेदार अब्दुल माजिद खान घलव रहिस। अब्दुल माजिद आसफ खान कारा मणिकपुर के शासक रहिस। जे रानी के नजदीक के राज्य रहिस। जब वो रानी के खजाना के बारे मं सुनिस त पगला गे। वो राज मं चढ़ाई करे बर विचार करे लागिस। रानी दुर्गावती के योग्यता अउ वीरता के प्रषंसा अकबर हर सुनिस। वोकर दरबारी मन वोला गोंडवाना ल अपन अधीन कर लेय के सलाह देय लगिन। उन आसफ खां नाम के सरदार ल गोंडवाना के गढ़ मंडला म चढ़ाई करे के उपाय बता देइन। अकबर अउ दुर्गावती तथा कथित महान मुगल षासक अकबर घलव राज्य ल जीत के रानी ल अपन खेमा मं मिला के रखना चाहत रहिस। एकर बर वोहर पैंतरा बाजी शुरु कर देईस। वो रानी के प्रिय सफेद हाथी सरमन अउ उनकर विष्वापात्र मंत्री आधार सिह ल भेंट के रूप मं अपन पास भेजे के आदेष कर देइस। रानी ये मांग ल ठुकरा देइस। एकर उपर अकबर ह अपन एक झन रिष्तेदार आसफ खाॅन के अगुवानी मं गोंडवाना उपर हमला करे के आदेष कर देइस। एक बेर तो आसफ खाॅ पराजित होगे, फेर दूसर खेप वोहर दुगुना सेना अउ तइयारी के संग हमला बोल देइस। दुर्गावती मेंर वो बेरा बहुत कम सैनिक रहिन। उन जबलपुर के पास ‘नरई नाला’’ के किनारे मोर्चा लगाइन अउ स्वयं पुरुष वेष मं युद्ध के नेतृत्व करे लागिन। ये युद्ध मं 3,000 मुगल सैनिक मारे गईन। रानी के घलव अपार क्षति होइस। अगले दिन 24 जून 1564 के मुगल सेना हर फेर हमला बोल बोल देइस। आज रानी के पक्ष दुर्बल रहिस। अनहोनी ल जान के रानी ह अपन पिलवा पुत्र नारायण ल सुरक्षित स्थान मं भेजवा देइस। तभे एक ठन तीर उनकर भुजा मं आके लग गे। रानी ह वोला निकाल के फेंक देइस। तुरते दूसर तीर ह उनकर आंखी मं बेध देइस। रानी ह इहू ल निकालिस फेर वोकर नोक आंखिच मं फंस के रहिगे। तइसने तीसर तीर आके उनकर गर्दन मं धंस गे। रानी ह अंत समय जान के मंत्री अधार सिंह ल कहिस अपन तलवार ले उनकर गर्दन ल काट देवय। फेर वोहर एकर बर तइयार नई होइस। त स्वयं रानी अपने कटार ल हेर के अपन सीना मं भोंक लेइस। आत्म बलिदान के पथ मं आगू बढ़ गे। महारानी दुर्गावती ह ए ले किसम अकबर के सेना सेनापति आसफ खान संग लड़त अपन आत्म उत्सर्ग कर देइस।

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