शहीद वीर नारायण सिंह

शहीद वीर नारायण सिंह

12-Sep-2018
शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार जन-जाति के वीर नारायण सिंह के जन्म सोना खान जि.बलौदा बाजर मं होय रहि। पिता रामराय सोना खान के जमींदार रहिस। पिता रामराय ह 1818-19 के बेरा अंग्रेज अउ भोसला मनके विरूद्ध विद्रोह करिस। फेर नागपुर के कैप्टन मैक्सन ये विद्रोह ल दबा देइस। पिता रामराय के स्वर्ग सिधारे के बाद 1830 मं नारायण सिंह जमींदार बनाय गइस। परोपकारी प्रवृत्ति के कारण नारायण सिंह गाॅव-गाॅव जाके लोगन के समस्या ल दूर करत रहय। वो बेरा तालाब निर्माण, वृक्षारोपण जइसन जन-कल्याण के काम करय। गुरतुर भाखा, मिलनसार, धरम करम के मनइया नारायण सिंह मं एक आदर्ष जमींदार के सरी गुण रहिस। 1856 में छत्तीसगढ़ दूबी तक नई उल्हिस अइसन भीषण सूखा के चपेट मं आगे। लोगन दाना-दाना बर तरसे लगिन। फेर गाॅव के व्यापारी माखन के गोदाम अनाज ले भरे रहिस। नारायण सिंह ल जनता के एकिसम भूखे मरत देखे नई जा सकिस। वोहर अनाज भंडार के ताला ल टोर डारिस। व्यापारी माखन के षिकायत म इलियट ह वीर नारायण सिंह के विरूद्ध वारंट जारी कर देइस। 24 अक्टूबर 1856 के उनला संबलपुर मं गिरफ्तार कर लेय गइस। 28 अगस्त 1857 के नारायण सिंह अपन तीन सांथी मनके संग जेल ले भगा गें। नारायण सिंह सोना खान पहुंच के 500 बंदूक धारी मनके एक ठन सेना बना लेइस। उनला गिरफ्तार करना अंग्रेज मन बर प्रतिष्ठा के प्रष्न बन गे। नारायण सिंह ह सोना खान ले अंग्रेज संग जमके विरोध करे लगिस। लेकिन आखरी मं स्मिथ के चाल मं अंग्रेज के सेना ह भारी मसक्कत के बाद उनला पकड़ घालिस। फेर इलियट के अदालत मं उनकर विरूद्ध मुकदमा चलाय गईस। 10 दिसंबर 1857 के दिन नारायण सिंह ल फांसी के सजा सुनाके लटका दिये गईस। वो स्थान ’’जय स्तंभ चैक’’ रायपुर के नाम से आज प्रसिद्ध है। वो दिन ले नारायण सिंह, ’’शहीद वीर नारायण सिंह’’ हो गईस। छत्तीसगढ़ के माटीपुत्र ’’शहीद वीर नारायण सिंह’’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम वीर षहीद हें।

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