मातृभासा के संरक्षण अउ संवर्धन जरूरी हे -राष्ट्री स्वयं सेवक संघ

मातृभासा के संरक्षण अउ संवर्धन जरूरी हे -राष्ट्री स्वयं सेवक संघ

12-Sep-2018
मातृभाषा के संरक्षण संवर्धन जरूरी हे - राष्टीय स्वयं सेवक संघ अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के ये मत हे, के भाषा कोनों भी मनखे अउ समाज के पहचान के एक महत्वपूर्ण अंग अउ वोकर संस्कृति के सजीव संवाहिका होथे। देष मं प्रचलित अनेक भाषा अउ बोलीमन हमार संस्कृति के श्रेष्ठ परंपरा मनके महत्वपूर्ण ज्ञान अउ ज्ञान के बगरे संसार संस्कार अउ साहित्य ल अटल बनाये रखे के संगे संग वैचारिक नवा सृजन बर घलव परम आवष्यक होथे। अलग अलग भाषा मनमं उपलब्ध लिखित साहित्य के संगसंग कइ गुना अधिक ज्ञान गीत, लोकोक्ति अउ लोक कथा मनके मौखिक परंपरा के रूप मं होथे। आज केउठन भारतीय भाषा अउ बोली मनके चलन अउ उपयोग मं होवइया कमी, उनकर शब्द मनके विलोप अउ आने भाषा के षब्द मनके अवइया रेला एक गम्भीर समस्या बनके उभरत हें। आज कतकोन भाषा अउ बोली मन विलुप्त हो चुके हें अउ केउ आने भाषा के अस्तित्व उूपर संकट घपटे हे। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के ये मानना हे के देष के कतको भाषा अउ बोली मनके संरक्षण, संवर्धन बहंुते जरूरी हे। जरूरी हे के सरकार येकर बर ध्यान देवै। एकर संगे संग अन्य नीति नियम धरइया स्वैच्छिक संगठन समेंत समाज के जमों मनखे मनला हरेक संभव प्रयास करना चाहिए। येकर बर ये किसम के प्रयास उपयोगी हे - 1. देष भर मं प्राथमिक षिक्षा मातृभाषा के फेर कोनों भारतीय भाषा मं ही होना चाही। येकर बर पालक मन अपना मन बनावैं। सरकार ये दिषा मं उचित नीति निर्माण कर आवष्यक प्रावधान संजोवै।000 2. तकनीकी अउ आयुर्विज्ञान समेंत उच्च षिक्षा के स्तर मं सब संकाय मं षिक्षण पाठ्य सामग्री अउ परीक्षा के विकल्प भारतीय भाषा मनमं घलव सुलभ करवाना आवष्यक हे। 3. राष्ट्ीय पात्रता अउ प्रवेष परीक्षा नीट अउ संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भाषा मनमं लेना शुरू करे गेय हे। ए पहल स्वागत के योग्य हे। एकर संगेसंग अउ आने प्रवेष अउ प्रतियोगी परीक्षा मनला जेन अभी भारतीय भाषा मनमं आयोजित नई करे जावत हे। उनमं घलव ये विकल्प सुलभ करवाय जाना चाही। 4. जम्मों किसम के शासकीय अउ न्यायिक काम-काज मं भारतीय भाषा मनला प्राथमिकता देय जाना चाही। एकर संगेसंग जमों शासकीय अउ निजी क्षेत्र मं नियुक्ति, पदोन्नति अउ सब किसम के कामकाज मं अंग्रेजी भाषा के प्राथमिकता न रख के भारतीय भाषा मनला बढ़ावा देय जाना चाही। 5. स्वयं सेवक समेंत समस्त समाज ल अपन पारिवारिक जीवन मं वार्तालाप अउ दैनिक व्यवहार मं मातृभाषा ल महत्व देना चाही। इन भाषा अउ बोली मनके साहित्य संग्रह अउ पठन-पाठन के परंपरा के विकास होना चाही। एकरे संग इंकर नाटक, सगीत, लोक कला मनला घलव भरपूर प्रोत्साहन देना चाही। 6. पारंपरिक रूप से भारत मं भाषा मन समाज ल जोड़े के साधन रहिन हें। त सब ल अपन मातृभाषा के स्वाभिमान राखत आने सब भाषा मनके प्रति सम्मान के भाव रखना चाही। 7. केंद्र अउ राज्य सरकार मनला सबो भारतीय भाषा अउ लिपि मनके सरक्षण अउ संवर्धन बर प्रभावी प्रयास करना चाही। अ.भा. प्रतिनिधि सभा बड़अकन ज्ञान ल पाय बर विष्व के कतकोन भाषा मनला सीखे के समर्थक हें। फेर प्रतिनिधि सभा भारत जइसन बहुभाषी देष मं हमार संस्कृति के संवाहक सबो भाषा मनके संरक्षण अउ संवर्धन ल परम आवष्यक मानत हे। प्रतिनिधि सभा सरकारी, स्वैच्छिक संगठन, जनसंचार के माध्यम, पंथ-संप्रदाय मनके षिक्षण संस्था अउ प्रबुद्धवर्ग समेंत संपूर्ण समाज ल आह्वान करत हे के हमार दैनन्दिन जीवन मं भारतीय भाषा मनके उपयोग अउ उनकर व्याकरण, षब्द चयन अउ लिपि मं षुद्धता सुनिष्चित करत उनकर संवर्धन के हर सम्भव प्रयास करे जाना चाही।

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