चंदुलाल चंद्रकार

चंदुलाल चंद्रकार

04-Sep-2018
चंदूलाल मेडिकल कॉलेज का 210 करोड़ रुपए में हुआ सौदा, संतोष रूंगटा ग्रुप संभालेगा प्रबंधन प्रदेश का निजी क्षेत्र का पहला मेडिकल कॉलेज चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को आखिरकार खरीदार मिल ही गया। उसे संतोष रूंगटा ग्रुप ने 210 करोड़ में खरीद लिया। जिसके बाद कॉलेज पर मंडरा रहा तालाबंदी का संकट टल गया है। नीट द्वारा मेडिकल कॉलेज के प्रवेश में मैनेजमेंट कोटा समाप्त होने के बाद से ही चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन वित्तीय संकट में घिर गया था। उसके बाद से वह कॉलेज को बेचने के लिए खरीदार तलाश रहा था। तमिलनाडु की एक शिक्षण संस्था ने इसे खरीदने में रूचि भी दिखाई थी और एडवांस के रूप में कुछ रकम भी भुगतान कर दिया था लेकिन बाद में किसी कारण से उस संस्था ने सौदा निरस्त कर दिया। जिसके बाद शहर के ही संतोष रूंगटा ग्रुप ने मेडिकल कॉलेज को खरीदने सामने आया। दो-तीन दौर की बैठक के बाद चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 210 करोड़ में कॉलेज संतोष रूंगटा ग्रुप को बेचने पर सहमति बनी। जिसके बाद नए ग्रुप कॉलेज का संचालन अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया है। खर्च 100 करोड़, जनरेट हो रहा था 30 करोड़ रुपए: हर वर्ष संचालन के लिए करीब 100 करोड़ की जरूरत होती है। कोटा समाप्त होने के बाद मिलने वाली फीस से महज 30 करोड़ ही जनरेट हो रहे थे। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज। स्टाफ की कमी को जल्द करेंगे दूर संतोष रूंगटा ग्रुप ने कॉलेज का संचालन हाथ में लेते ही स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। कॉलेज में वर्तमान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेसीडेंट्स और जूनियर रेसीडेंट्स के कई पद खाली है। इनमें अनाटोमी, बायोकेमेस्ट्री, पैथोलॉजी, माइक्रोबायलाजी, फोरेंसिक मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के रिक्त पद शामिल हैं। वहीं क्लीनिक्स में जनरल मेडिसिन, टीबी समेत अन्य विभागों में भर्ती की जाएगी। टेकओवर की प्रक्रिया शुरू पहले तामिलनाडु की एक संस्था ने दिया था एडवांस 200 करोड़ रुपए की देनदारी है प्रबंधन पर पुराने प्रबंधन पर बैंक और मार्केट की 200 करोड़ रुपए की देनदारी है। इनमें करीब 150 करोड़ रुपए इंडियन बैंक और सेंट्रल बैंक से लोन के रूप में है। जिनकी हर महीने की ईएमआई ही करीब 4 करोड़ रुपए हो रही है। 3 महीने से अधिक समय ईएमआई का भुगतान नहीं हुआ था। जबकि तीन महीने तक भुगतान नहीं होने की स्थिति में बैंक प्रबंधन ऐसे खातों को एनपीए में डाल सकता है। वहीं स्टाफ को वेतन भी भुगतान नहीं हो पा रहा था। इसके चलते कॉलेज में तालाबंदी की नौबत आ गई थी। कॉलेज के बिकने से यह संकट टल गया। चंदूलाल मेडिकल कॉलेज खरीदने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेकओवर की प्रक्रिया शुरू हो गई। एक-एक कर विभागों का संचालन अपने हाथों में ले रहे हैं। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती कर रहे है। सोनल रूंगटा, डायरेक्टर, संतोष रूंगटा ग्रुप प्रवेश निरस्त होने से गड़बड़ाई व्यवस्था शिक्षा सत्र 2017-18 से सरकार ने मैनेजमेंट कोटा समाप्त कर दिया। जिस दिन आदेश जारी हुआ उसके पहले ही चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट सीट के लिए प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसके चलते विद्यार्थियों को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

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